Breaking News

कविता @ कर्म करना है…

Share


मानव कर्म करते जाना है।
प्रभु से उसका फल पाना है।
बादल का कर्म वर्षा लाना है।
पानी नीचे की ओर बहना है।
वातावरण बचे पेड़ लगाना है।
जनहित में उसका फल खाना है।
माली से बगिया बाग सिंचाना है।
फूल खिले उसे खुशबू महकाना है।
व्यापार में नाम अगर चमकाना है।
नेक सच्चाई दाम उसे बढ़ाना है।
बारह द्वार का चक्र यह जमाना है।
घंटे मिनट सेकेंड का राज बताना है।
वसंत हरियाली फूल खिलाना है।
विनम्रता फल लगते उसे झुकाना है।
माया नगरी एक दिन छल जाना है।
काम क्रोध लोभ मोह जन दीवाना है।
गैरों की उन्नति देख मनवा जलाना है।
खुद को उन्नत करो यही समझाना है।
मुहाना जहां फूटा नदी बन जाना है।
अनंत अथाह सागर मिल जाना है।
मात- पिता सेवा से पुण्य कमाना है।
श्रवण बने गर कोई देश अनजाना है।


Share

Check Also

लेख@ संस्कारों का हस्तांतरण अगली पीढ़ी को ठीक तरीके से न हो,तो उस समाज का क्षय होना निश्चित है…

Share अश्लीलता दबे पांव नहीं,सीना तानकर इंस्टा यूट्यूब के दरवाजे आपके घर तक आई है…इन …

Leave a Reply