अंबिकापुर 2 फरवरी 2022 (घटती-घटना)। सरगुजा जिले में 15 से 18 वर्ष के किशोरों का टिकाकरण मात्र 66 प्रतिशत ही हो पाया है। अब स्वास्थ्य विभाग स्कूल त्यागी बच्चों को भी वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू कर रहा है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग लिया जा रहा है। मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से स्कूल त्यागी बच्चों की सूची तैयार की जा रही है।
सरगुजा जिले में एक तरफ जहां कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान में तेजी लाने स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किया जा रहा है। शहरी क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता अभियान चलाकर टिकाकरण के लिए नागरिकों को प्ररित किया जा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के समाने एक बड़ी चुनोतियों खड़ी हो गई है। स्कूल बंद होने की वजह से 15 से 18 वर्ष के बीच के किशोरों का टिकाकरण अभियान धीमा पड़ गया है। जिले में मात्र 66 प्रतिशस बच्चों को ही कोरोना वैक्सीन की पहली डोज का लाभ मिला है। जबकि 45 बच्चों को कोरोना की दूसरी डोज लग चुकी है। इस आयु वर्ग के बच्चों को शत प्रतिशत वैक्सीन लग सके इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा स्कूल त्यागी बच्चों को भी वैक्सीन लगाने की योजना बनाई गई है। स्कूल त्यागी बच्चों की खोज के लिए स्वास्थ्य विभाग मितानिनों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सहारा ले रहा है। मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्कूल त्यागी बच्चों की सूची तैयार करने काम पर लगाया गया है। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ राजेश भजनावली ने बताया कि जिले भर में लगभग 52 हजार बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इन 52 हजार बच्चों में से 3 से 4 प्रतिशत ऐसे बच्चे हैं जो स्कूल त्याग चुके है। वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले भर में 2 हजार स्कूल त्यागी बालिकाओं की सूची तैयार की गई है। जबकि 4 से 5 हजार ऐसे बालक है जिन की सूची तैयार की जा रही है। इन सभी स्कूली त्यागी बच्चों को खोज कर कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी। ताकि जिले में 15 से 18 वर्ष तक के बीच के बच्चों का शत प्रतिशत वैक्सीनेशन हो सके। वैक्सीनेशन के टारगेट को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती है क्योंकि स्कूल बंद है ऐसे में कई छात्र वैक्सीन लगाने से वंचित रह गए। हालांकि कुछ जागरूक छात्र टीकाकरण केंद्र पहुंचकर वैक्सीन लगवाना चाह रहे हैं लेकिन वह भी निराश होकर वापस लौट रहे है। इसकी बड़ी वजह यह है कि टीकाकरण केंद्रों में 15 से 18 वर्ष तक के बीज के बच्चों की आईडी नहीं खुल रही है। जिस वजह से उन्हें वैक्सीन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वही जिला टीकाकरण अधिकारी राजेश भजनावली का कहना है कि 10 फरवरी तक इन आयु वर्ग के बच्चों को वैक्सीन लगाकर लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
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