
- 3 घंटे बाद 3 लाख की सहायता
- दुर्घटना के बाद बवाल…कांग्रेस के दबाव में कंपनी ने दिया मुआवजा
- अंतिम संस्कार रोका,फिर झुकी कंपनी—परिजनों को मिली 3 लाख की मदद
- जनता का गुस्सा और कांग्रेस का दबाव, कंपनी को देना पड़ा मुआवजा
- मौत के बाद मचा आक्रोश,3 घंटे की जद्दोजहद के बाद मिली राहत राशि
-संवाददाता-
मनेंद्रगढ़,20 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।ग्राम परसगढ़ी में डीवी प्रोजेक्ट के वाहन से हुई भीषण दुर्घटना में ग्राम पंचायत बंजी निवासी स्व. राजभान सिंह की दर्दनाक मृत्यु के बाद क्षेत्र में शोक के साथ-साथ गहरा आक्रोश भी फैल गया,घटना के तुरंत बाद ही पीडि़त परिवार और ग्रामीणों ने न्याय एवं उचित मुआवजे की मांग को लेकर अंतिम संस्कार रोक दिया,जिससे हालात बेहद संवेदनशील हो गए।
अंतिम संस्कार रोका, न्याय की मांग पर अड़े ग्रामीण-दुर्घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उन्हें न्याय और ठोस मुआवजे का आश्वासन नहीं मिलेगा,तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा, सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग मृतक के घर के बाहर एकत्रित हो गए और प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताने लगे,स्थिति को देखते हुए यह मामला तेजी से गंभीर होता गया और प्रशासन पर तत्काल हस्तक्षेप का दबाव बढ़ने लगा।
कांग्रेस नेतृत्व मौके पर,लगातार बना दबाव-सुबह लगभग सात बजे से ही ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर अध्यक्ष सौरव मिश्रा बंजी पहुंचकर मृतक के घर पर डटे रहे, उन्होंने लगातार पीडि़त परिवार और ग्रामीणों के साथ खड़े होकर उनकी मांगों को मजबूती से उठाया,कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों की बड़ी उपस्थिति ने माहौल को और अधिक प्रभावी बना दिया, जिससे प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ा।
तीन घंटे बाद पहुंची कंपनी, शुरू हुई बातचीत- लगातार बढ़ते जनआक्रोश और राजनीतिक दबाव के चलते करीब तीन घंटे की प्रतीक्षा के बाद कंपनी के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे,सौरव मिश्रा के नेतृत्व में कंपनी प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच विस्तृत बातचीत हुई, इस दौरान प्रमुख रूप से पीडि़त परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता,इंश्योरेंस क्लेम की त्वरित प्रक्रिया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग रखी गई।
दबाव के आगे झुकी कंपनी, मौके पर दी 3 लाख की सहायता- ग्रामीणों के तीव्र आक्रोश और कांग्रेस नेताओं के दबाव के चलते कंपनी प्रबंधन को आखिरकार झुकना पड़ा,ग्रामवासियों की उपस्थिति में मृतक के पिता धन सिंह को तत्काल तीन लाख रुपये की नगद सहायता राशि प्रदान की गई,साथ ही कंपनी प्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया कि इंश्योरेंस क्लेम की प्रक्रिया जल्द पूरी कर पीडि़त परिवार को अतिरिक्त मुआवजा भी दिलाया जाएगा।
पहले दिन से सक्रिय रही कांग्रेस- घटना के बाद से ही कांग्रेस नेताओं ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सक्रियता दिखाई। पूर्व विधायक गुलाब कमरों के नेतृत्व में विधायक प्रत्याशी रमेश सिंह, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष कृष्ण मुरारी तिवारी, जिला महामंत्री रफीक मेमन, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) रामनरेश पटेल और सौरव मिश्रा थाने पहुंचे थे, उन्होंने पुलिस प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने की मांग जोरदार तरीके से उठाई थी।
‘यह सिर्फ शुरुआत है,असली न्याय बाकी ‘गुलाब कमरों-पूर्व विधायक गुलाब कमरों ने स्पष्ट कहा कि तीन लाख की सहायता केवल प्रारंभिक मदद है, उन्होंने कहा कि वास्तविक न्याय तभी होगा जब दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और पीडि़त परिवार को पूर्ण मुआवजा मिलेगा, उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि प्रशासन ने लापरवाही बरती तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी।
‘परिवार के साथ खड़ी है कांग्रेस ‘सौरव मिश्रा-ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही पीडि़त परिवार के साथ खड़ी है और यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक परिवार को पूरा न्याय नहीं मिल जाता,उन्होंने कहा कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि न्याय और जवाबदेही की लड़ाई है,जिसमें कांग्रेस हर स्तर पर साथ खड़ी रहेगी।
ग्रामीणों की एकजुटता से बढ़ा दबाव-पूरे घटनाक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद रहे। बंजी सरपंच एवं ब्लॉक कांग्रेस उपाध्यक्ष देव कुमार सिंह, महामंत्री खोनेश्वर प्रसाद,स्नेहिल शुक्ला,प्रेम सिंह,उमेंद्र सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर पीडि़त परिवार के समर्थन में आवाज उठाई,ग्रामीणों की एकजुटता और राजनीतिक दबाव ने इस पूरे मामले में निर्णायक भूमिका निभाई।
राहत मिली,लेकिन न्याय की लड़ाई जारी- इस पूरे घटनाक्रम में कंपनी द्वारा तत्काल राहत राशि देना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है,लेकिन पीडि़त परिवार और ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ शुरुआत है, अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और क्या पीडि़त परिवार को पूरा मुआवजा मिलेगा फिलहाल एक बात साफ है जनआक्रोश और संगठित दबाव के आगे कंपनी को झुकना पड़ा, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी जारी है।
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