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सोनहत (कोरिया) @ सेमरिया की टूटी पुलिया

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  • विकास’ के दावों पर सवाल, खतरे में बच्चों की जान
  • 7 महीने से बदहाल पुलिया,जिम्मेदार खामोश-किस हादसे का इंतजार?
  • स्कूल का रास्ता या मौत का पुल? सेमरिया में हर दिन जोखिम भरा सफर
  • बरसात में बही मिट्टी,अब तक नहीं सुधरी व्यवस्था—ग्रामीणों में आक्रोश
  • पुलिया टूटी,सिस्टम सोया—सेमरिया में ‘विकास’ की सच्चाई उजागर
  • नन्हे कदमों पर खतरा, जिम्मेदार बेखबर—सेमरिया की पुलिया बनी संकट
  • चुनाव में वादे,अब सन्नाटा—टूटी पुलिया पर नहीं किसी की नजर
  • सेमरिया की लाइफलाइन जर्जर,प्रशासन मौन—हादसे का बढ़ता खतरा
  • पुलिया पर दरार,व्यवस्था पर सवाल—कब जागेगा प्रशासन?
  • टूटी पुलिया और टूटी उम्मीदें—ग्रामीणों का सब्र जवाब देने को तैयार


-राजन पाण्डेय-
सोनहत (कोरिया) ,20 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।
कागजों में विकास की चमक भले ही दिखाई दे रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत ग्राम सेमरिया में बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है। वनांचल क्षेत्र के इस गांव में स्कूल जाने वाले मुख्य मार्ग पर बनी पुलिया पिछले करीब सात महीनों से बदहाल स्थिति में पड़ी है। पिछले वर्ष की बारिश में पुलिया के किनारे की मिट्टी बह जाने के बाद से यह मार्ग लगातार जर्जर होता जा रहा है, लेकिन अब तक न तो इसकी मरम्मत हुई है और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था की गई है, स्थिति इतनी गंभीर है कि ग्रामीण इसे अब ‘खतरे का रास्ता’ कहने लगे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि जैसे किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हों।
हादसे को न्यौता देती पुलिया, हर दिन जोखिम में ग्रामीण और बच्चे
सेमरिया गांव की यह पुलिया केवल एक संरचना नहीं, बल्कि पूरे गांव की जीवनरेखा है,इसी मार्ग से होकर ग्रामीण बाजार, अस्पताल और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन करते हैं, वहीं नन्हे बच्चे रोजाना इसी रास्ते से स्कूल पहुंचते हैं,ग्रामीणों के अनुसार, पिछले साल की मूसलाधार बारिश में पुलिया के दोनों ओर की मिट्टी पूरी तरह बह गई थी, जिससे उसका आधार कमजोर हो गया,अब पुलिया में दरारें साफ दिखाई देती हैं और किनारों पर गहरा कटाव हो चुका है, दिन के समय भी यहां से गुजरना जोखिम भरा है, लेकिन रात के अंधेरे में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। हल्की सी चूक किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है, वनांचल क्षेत्र होने के कारण जंगली जानवरों का खतरा अलग से बना रहता है, जिससे स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है।
स्कूली बच्चों की जान पर बना खतरा
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि छोटे-छोटे बच्चे रोजाना इसी खतरनाक पुलिया से होकर स्कूल जाते हैं,परिजनों का कहना है कि वे हर दिन डर के साये में अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं,बारिश के दिनों में यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि फिसलन और पानी के बहाव के कारण पुलिया और भी असुरक्षित हो जाती है,शिक्षा के अधिकार की बात तो होती है, लेकिन यहां बच्चों को स्कूल जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश, जनप्रतिनिधियों पर लगाए आरोप
सेमरिया के ग्रामीणों में इस मुद्दे को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है,उनका आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब गांव की इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं,ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद ग्राम पंचायत अमृतपुर की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है,सरपंच और सचिव पर निष्कि्रयता का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं की गई,तो इसका खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ेगा।
प्रशासन की अनदेखी से बढ़ रही समस्या
मामले में प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है,सात महीने का समय किसी भी छोटी मरम्मत के लिए पर्याप्त माना जाता है, लेकिन यहां अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है,ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिया की मरम्मत कर दी जाती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती,यहां सवाल उठता है कि क्या प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार है,या फिर यह समस्या उनकी प्राथमिकता में ही शामिल नहीं है?
आने वाले मानसून में बढ़ेगा खतरा
ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता आगामी बरसात को लेकर है। उनका कहना है कि यदि अगले दो महीनों के भीतर मरम्मत कार्य पूरा नहीं हुआ,तो बारिश के दौरान यह पुलिया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती है,ऐसी स्थिति में गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाएगा,जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा,इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी और दैनिक जीवन की गतिविधियां ठप पड़ सकती हैं।
ग्रामीणों की चेतावनीः आंदोलन के लिए होंगे मजबूर
गांव के युवा और जागरूक नागरिक अब इस मुद्दे को लेकर खुलकर सामने आ रहे हैं, ग्रामीण अवध यादव का कहना है कि पिछले साल से ही लोग डरते-डरते इस पुलिया से गुजर रहे हैं। यदि जल्द मरम्मत नहीं हुई, तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे, वहीं कोरिया जन सहयोग समिति के अध्यक्ष पुष्पेंद्र राजवाड़े ने भी प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि पंचायत ने शीघ्र व्यवस्था बहाल नहीं की, तो वे ग्रामीणों के साथ मिलकर जनपद का घेराव करेंगे।
विकास के दावों पर उठते सवाल
सेमरिया की यह पुलिया केवल एक गांव की समस्या नहीं है, बल्कि यह उन दावों पर भी सवाल खड़ा करती है, जिनमें ग्रामीण विकास की बात की जाती है, यदि एक छोटे से गांव की जीवनरेखा बनी पुलिया की मरम्मत सात महीने में नहीं हो पाती, तो यह स्पष्ट संकेत है कि जमीनी स्तर पर विकास की गति कितनी धीमी है, यह स्थिति यह भी दर्शाती है कि योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन समय पर नहीं हो पाता।
समय रहते नहीं जागा प्रशासन तो हो सकता है बड़ा हादसा
सेमरिया की टूटी पुलिया अब एक गंभीर चेतावनी बन चुकी है, यह केवल एक संरचनात्मक समस्या नहीं,बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा,बच्चों की शिक्षा और पूरे गांव के आवागमन से जुड़ा मुद्दा है,जरूरत इस बात की है कि प्रशासन तत्काल संज्ञान लेते हुए मरम्मत कार्य शुरू करे और इस मार्ग को सुरक्षित बनाए, क्योंकि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया,तो यह पुलिया कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है—और तब सवाल यही रहेगा कि चेतावनी के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई।


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