



- पैकेज बढ़ाकर छोटे ठेकेदार बाहर,
- एक कंपनी के हाथ 21 सड़कें
- कोरिया में सड़क घोटाले की आहट,कम दर में ठेका,
- गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
- “कम कीमत,कमजोर सड़क?“
- PMGSY फेज-4 में ठेकों का संदिग्ध गणित
- पैकेजिंग का खेल,50 में 21 सड़कें एक ठेकेदार को, सिस्टम पर सवाल
- सड़क से पहले कटिंग,
- PMGSY कार्यों में तकनीकी नियमों की अनदेखी उजागर
- ग्रामीण सड़कों पर ‘सेटिंग’ का आरोप,बड़े ठेकेदारों को फायदा,छोटे बाहर
- कोरिया में PMGSY विवाद,करोड़ों की सड़कें,लेकिन शुरुआत से ही गुणवत्ता संदिग्ध
- ठेके में कटौती,निर्माण में गड़बड़ी,
- PMGSY फेज-4 पर बड़ा सवाल
- एक ही पैटर्न,कई सड़कें निर्माण में एक जैसी खामियां, जांच की मांग तेज
- “पैकेज मैनेजमेंट स्कीम?”
- PMGSY में बड़े ठेकेदारों को मिला जैकपॉट
-रवि सिंह-
कोरिया,12 अप्रैल 2026(घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई- Phase IV) के तहत स्वीकृत सड़कों को लेकर अब एक बड़ा विवाद सामने आ रहा है,दस्तावेज़ों,टेंडर प्रक्रिया और जमीनी निरीक्षण से यह संकेत मिल रहा है कि इस बार योजना के क्रियान्वयन में कई स्तरों पर गड़बड़ी की आशंका है, विशेष रूप से पैकेज निर्माण,ठेके की दरों और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं,इस योजना के तहत जिले में कुल 50 सड़कों को स्वीकृति मिली, जिनमें से 21 सड़कों का निर्माण कार्य एक ही ठेकेदार मेसर्स श्री राम कंस्ट्रक्शन को सौंपा गया,यह आवंटन चार बड़े पैकेजों के माध्यम से किया गया,जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।
बता दे की कोरिया जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई- Phase IV) के तहत स्वीकृत सड़कों ने विकास की उम्मीद जगाई थी, लेकिन अब यही योजना गंभीर सवालों के घेरे में है, दस्तावेज़ों और जमीनी निरीक्षण से जो तस्वीर उभर रही है, वह संकेत देती है कि इस बार सड़क निर्माण से ज्यादा पैकेज प्रबंधन पर ध्यान दिया गया, जिले में स्वीकृत 50 सड़कों में से 21 सड़कों का कार्य एक ही ठेकेदार एम/एस श्री राम कंस्ट्रक्शन को चार बड़े पैकेजों में सौंपा गया, जिससे पूरे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं, मामले को और गंभीर बनाता है ठेकों का वह गणित,जिसमें कार्यों को 11प्रतिशत से लेकर 23प्रतिशत तक कम दरों पर लिया गया,पहली नजर में यह सरकारी बचत लग सकती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी कटौती के बाद गुणवत्ता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है,यही आशंका अब जमीन पर भी दिखने लगी है, शुरुआती निर्माण कार्यों में ही कई स्थानों पर तकनीकी मानकों की अनदेखी सामने आई है न सूचना पटल, न उचित लेवलिंग,और न ही मानक के अनुरूप बेस तैयार किया गया, सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई सड़कों पर एक ही पैटर्न अपनाया जा रहा है,सड़क के बीचो-बीच मिट्टी की कटिंग कर गड्ढा बनाया जा रहा है, उस मिट्टी को किनारों पर डाल दिया जा रहा है,और फिर उसी गड्ढे में गिट्टी और डामर डालने की तैयारी की जा रही है,यह तरीका न केवल तकनीकी रूप से संदिग्ध है, बल्कि सड़क की दीर्घायु पर भी सवाल खड़ा करता है, ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ लागत बचाने का तरीका है,या फिर योजना के मूल उद्देश्य से समझौता किया जा रहा है? और उससे भी अहम क्या जिम्मेदार अधिकारी इन खामियों से अनजान हैं,या सब कुछ जानते हुए भी नजरअंदाज किया जा रहा है? कोरिया जिले की ये सड़कें अब सिर्फ निर्माण परियोजना नहीं,बल्कि सिस्टम की कार्यशैली का आईना बनती जा रही हैं।
समेकित सड़क सारणी (पीएमजीएसवाई Phase IV-4,कोरिया जिला)
पैकेज निर्माण की रणनीति : छोटे ठेकेदारों की भागीदारी खत्म?
पीएमजीएसवाई योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सड़क निर्माण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना था, इसके लिए सामान्यतः छोटे-छोटे पैकेज बनाए जाते थे ताकि अधिक ठेकेदार भाग ले सकें,लेकिन इस बार कोरिया जिले में स्थिति अलग दिखाई देती है, सड़कों को बड़े पैकेजों में क्लब किया गया, पैकेज इतने बड़े बनाए गए कि छोटे और मध्यम ठेकेदार भाग नहीं ले सके,परिणामस्वरूप, प्रतिस्पर्धा सीमित होकर कुछ बड़े ठेकेदारों तक सिमट गई,सूत्रों का कहना है कि यह रणनीति सुनियोजित तरीके से अपनाई गई ताकि कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को अधिकतम काम मिल सके।
एक ही ठेकेदार को 21 सड़कें,संयोग या सिस्टम?
जिले में स्वीकृत 50 सड़कों में से 21 सड़कों का काम मेसर्स श्री राम कंस्ट्रक्शन को मिला है, यह आवंटन चार अलग-अलग पैकेजों में हुआ, चार प्रमुख पैकेज सीजी-11-301,सीजी-11-303, सीजी-11-310, सीजी-11-311, यह तथ्य अपने आप में कई सवाल खड़े करता है,क्या टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी? क्या अन्य ठेकेदारों को समान अवसर मिला? क्या तकनीकी और वित्तीय योग्यता के आधार पर चयन हुआ?
जमीनी हकीकत. निर्माण में गंभीर अनियमितताएं
जब इन सड़कों के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया,तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड का अभाव, सड़क निर्माण से पहले आवश्यक लेवलिंग नहीं की गई, सड़क के बीचो-बीच कटिंग कर गड्ढा बनाया गया, निकाली गई मिट्टी को साइड में डाल दिया गया,गड्ढे में सीधे गिट्टी और डामर डालने की तैयारी, विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क निर्माण में सामान्य प्रक्रिया यह होती है कि पहले सड़क का स्तर बढ़ाया जाता है (एम्बैंकमेंट),फिर परत-दर-परत निर्माण किया जाता है, लेकिन यहां उल्टा किया जा रहा है पहले गड्ढा, फिर भराई,यह तरीका न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि सड़क की उम्र और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करता है।
हर जगह एक जैसा पैटर्न…संदेह और गहराया
कई अलग-अलग स्थानों पर निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि सभी सड़कों पर निर्माण का तरीका लगभग एक जैसा है, हर जगह सड़क काटी गई, मिट्टी साइड में डाली गई, बीच में गिट्टी डालने की तैयारी, यह संकेत देता है कि यह कोई एक स्थान की गलती नहीं, बल्कि एक सिस्टमेटिक पैटर्न हो सकता है।
सेटिंग के आरोप,टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में सेटिंग की भी चर्चा है,बड़े पैकेज बनाकर छोटे ठेकेदारों को बाहर किया गया, कुछ बड़े ठेकेदारों के बीच समझौते की बात सामने आ रही है,एक विशेष मामले में, ठेकेदार सतीश अग्रवाल के साथ जुड़े कार्य में लगभग 10प्रतिशत कम दर पर ठेका लिया गया,जबकि अन्य कार्यों में 19प्रतिशत से अधिक की कटौती देखी गई,यह अंतर यह संकेत देता है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह प्रतिस्पर्धात्मक नहीं थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया,पूर्व मंत्री ने लगाए आरोप
इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है, पूर्व मंत्री ननकी राम कंवर ने इस योजना में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया चुके है,क्योकि ऐसा पुरे छत्तीसगढ़ में हुआ है,उनका कहना है कि, योजना का उद्देश्य ग्रामीण विकास था, लेकिन इसे बड़े ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया गया,छोटे ठेकेदारों से उनका अधिकार छीन लिया गया।
जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर उठ रहा है, क्या इंजीनियरों ने साइट निरीक्षण किया? क्या गुणवत्ता की जांच की गई? क्या किसी स्तर पर अनियमितताओं को नोटिस किया गया? यदि निरीक्षण हुआ,तो खामियां क्यों बनी रहीं? और यदि निरीक्षण नहीं हुआ,तो यह और भी गंभीर मामला है।
ग्रामीणों पर असर,सड़क का इंतजार जारी
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सिर्फ एक सुविधा नहीं,बल्कि जीवनरेखा होती है,शिक्षा,स्वास्थ्य,बाजार तक पहुंच सब कुछ सड़क पर निर्भर करता है, ऐसे में यदि सड़क निर्माण में ही गड़बड़ी हो,तो इसका सीधा असर ग्रामीण जीवन पर पड़ता है।
गुणवत्ता पर खतरा, टिकाऊपन पर सवाल
तकनीकी मानकों की अनदेखी से सड़क जल्दी खराब हो सकती है,बरसात में टूटने की संभावना बढ़ जाती है, रखरखाव लागत बढ़ती है, इसका मतलब है कि आज की बचत,कल का बड़ा नुकसान बन सकती है।
विकास की मंशा पर सवाल
कोरिया जिले में पीएमजीएसवाई- Phase IV के तहत हो रहे कार्य कई गंभीर सवाल छोड़ते हैं, पैकेज निर्माण में पारदर्शिता, ठेके की दरों में असामान्य कमी,निर्माण गुणवत्ता में गिरावट,यदि इन मुद्दों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया,तो यह योजना अपने उद्देश्य से भटक सकती है।
कम दर पर ठेका…बचत या गुणवत्ता पर समझौता?
इन पैकेजों में सबसे बड़ा मुद्दा है अनुमानित लागत से बहुत कम दर पर ठेका लेना।
प्रमुख आंकड़ेः
पैकेज सीजी-11-301
स्वीकृत राशिः ?2663.68 लाख
ठेका राशिः ?1881.52 लाख
अंतरः ?882.16 लाख
पैकेज सीजी-11-303
स्वीकृत राशिः 2814.48 लाख
ठेका राशिः 1863.40 लाख
अंतरः 951.01 लाख
पैकेज सीजी-11-310
स्वीकृत राशिः 2216.37 लाख
ठेका राशिः 1517.31 लाख
अंतरः 699.66 लाख
पैकेज सीजी-11-311
स्वीकृत राशिः 1813.80 लाख
ठेका राशिः 1378.02 लाख
अंतरः 435.78 लाख
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ठेकेदारों ने कई कार्य 19प्रतिशत से 23प्रतिशत तक कम दर पर लिए, जबकि एक पैकेज में लगभग 11प्रतिशत कम दर भी देखी गई, यह स्थिति स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठाती है कि इतनी कम लागत में सड़क निर्माण की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
आगे की जरूरत,पारदर्शिता और जांच
स्थिति को देखते हुए आवश्यक है स्वतंत्र तकनीकी जांच,सभी पैकेजों का ऑडिट,निर्माण कार्यों की फील्ड वेरिफिकेशन,जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना।
अंतिम सवाल
क्या यह योजना वास्तव में ग्रामीण विकास के लिए है,या फिर यह बड़े ठेकेदारों के लिए सुनहरा अवसर बनती जा रही है? यह सवाल सिर्फ कोरिया जिले का नहीं,बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता का है।

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