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रायपुर@रुद्री थाना कांड : दैनिक ‘घटती-घटना’ की आशंका सही? रिहाई के बाद सामने आई वही कहानी

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  • रुद्री थाना कांड : 110 दिन बाद रिहाई,‘लूट-डकैती’ पर सवाल गहराए—आरोपियों ने बताया सुनियोजित षड्यंत्र
  • दैनिक ‘घटती-घटना’ की शुरुआती आशंका को मिला बल,नागेंद्र पटेल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप; पुलिस कार्रवाई, एफआईआर और पूरी कहानी पर उठे बड़े सवाल
  • रुद्री थाना कांड : 110 दिन बाद रिहाई, ‘लूट’ या ‘षड्यंत्र’—सवालों केघेरे में पूरा मामला
  • गिरफ्तारी पर उठे सवाल अब हुए मजबूत, रिहाई के बाद आरोपियों ने खोली ‘साजिश’की परतें
  • लूट-डकैती या सुनियोजित षड्यंत्र? रिहाई के बाद नागेंद्र पटेल का बड़ा खुलासा
  • रुद्री कांड में नया मोड़ : आरोपी बोले—मामला कुछ और था, कहानी कुछ और बनाई गई

-न्यूज डेस्क-
रायपुर,08 अप्रैल 2026(घटती-घटना)।
धमतरी जिले के रुद्री थाना में नवंबर 2025 में दर्ज कथित लूट और डकैती का मामला अब 110 दिनों बाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है,इस मामले में आरोपी बनाए गए कोरिया जिले के निवासी और हिंदू संगठन से जुड़े नागेंद्र पटेल को जमानत मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर कई नई बातें सामने आई हैं, जिन्होंने शुरुआत से ही उठ रहे संदेहों को और मजबूत कर दिया है।
गौरतलब है कि ग्राम सोरम निवासी कोनाल साहू द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर इस मामले को लूट और डकैती की गंभीर घटना के रूप में प्रस्तुत किया गया था,पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नागेंद्र पटेल सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कई ऐसे पहलू सामने आए थे, जिन पर दैनिक ‘घटती-घटना’ ने शुरू से ही सवाल उठाए थे,अब रिहाई के बाद नागेंद्र पटेल द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्हीं बिंदुओं को विस्तार से रखा गया है, जिन्हें पहले संदेह के रूप में देखा जा रहा था,नागेंद्र पटेल ने साफ शब्दों में कहा है कि यह मामला लूट या डकैती का नहीं,बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र है, जिसमें उन्हें और उनके साथियों को फंसाया गया है, इस पूरे प्रकरण में एक ओर शिकायतकर्ता कोनाल साहू का आरोप है कि उनके घर में लूट की घटना हुई,वहीं दूसरी ओर नागेंद्र पटेल,रामचंद्र देवांगन और हितेश प्रताप सिंह जैसे नामजद आरोपियों का कहना है कि वे केवल एक शिकायत के समाधान के लिए बातचीत करने पहुंचे थे,अब जब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और आरोपी जमानत पर रिहा हो चुके हैं,तो यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर सच्चाई क्या है? क्या यह वाकई एक आपराधिक घटना थी,या फिर एक विवाद को आपराधिक रूप देकर प्रस्तुत किया गया?
पॉलीग्राफी और नार्को टेस्ट की मांग
मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपियों ने शिकायत कर्ता कोनाल साहू का पॉलीग्राफी और नार्को टेस्ट कराने की मांग की है, उन्होंने कहा कि इससे सच्चाई स्पष्ट हो जाएगी।
अब आगे क्या?
मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है और आगे की जांच तथा सुनवाई के बाद ही सच्चाई सामने आएगी,यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या आरोप सिद्ध होते हैं या फिर षड्यंत्र की बात साबित होती है? रुद्री थाना कांड अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि एक जटिल और बहुस्तरीय विवाद बन चुका है,एक ओर शिकायतकर्ता के गंभीर आरोप हैं,तो दूसरी ओर आरोपियों के पास अपने बचाव में साक्ष्य और तर्क हैं,अब अंतिम सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही सामने आएगी,लेकिन फिलहाल यह मामला कई सवालों के साथ खड़ा है—और हर सवाल का जवाब अभी बाकी है।
दैनिक ‘घटती-घटना’ की भूमिका
इस पूरे मामले में दैनिक ‘घटती-घटना’ की भूमिका भी चर्चा में रही है,अखबार ने शुरुआत में ही इस मामले को लेकर संदेह व्यक्त किया था और कई सवाल उठाए थे,अब आरोपियों के बयान उन सवालों से मेल खाते नजर आ रहे हैं।
एफआईआर और घटनाक्रम : कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
नवंबर 2025 में धमतरी जिले के रुद्री थाना में ग्राम सोरम निवासी कोनाल साहू द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी, शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनके घर में घुसकर लूट और डकैती की घटना को अंजाम दिया गया, इस एफआईआर में कोरिया जिले के नागेंद्र पटेल, रामचंद्र देवांगन (विश्व हिंदू परिषद के जिला मंत्री एवं पूर्व सैनिक) और हितेश प्रताप सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया,पुलिस ने शिकायत के आधार पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करते हुए तत्काल कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
गिरफ्तारी पर शुरुआती सवाल और मीडिया रिपोर्ट
घटना के सामने आते ही दैनिक ‘घटती-घटना’ ने इस मामले को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए थे,रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई थी कि घटना का वास्तविक स्वरूप कुछ और हो सकता है, आरोपों और घटनाक्रम में कई विसंगतियां हैं,पूरे मामले में कुछ तथ्य छिपाए जा रहे हैं,यह सवाल उस समय केवल संदेह के रूप में थे,लेकिन अब रिहाई के बाद सामने आए बयानों ने इन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागेंद्र पटेल का बड़ा खुलासा
110 दिन बाद जमानत पर रिहा होने के बाद नागेंद्र पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले को षड्यंत्र बताया,उन्होंने कहा कि यह मामला लूट-डकैती का नहीं था वे एक संगठन कार्यकर्ता उमेश साहू की शिकायत पर बातचीत के लिए गए थे,कोनाल साहू के साथ शांतिपूर्ण चर्चा हुई और वे वापस लौट आए,उन्होंने आरोप लगाया कि इस सामान्य बातचीत को जानबूझकर आपराधिक रूप दिया गया।
प्रेस विज्ञप्ति में विस्तृत आरोप और साक्ष्य
जारी प्रेस विज्ञप्ति में नागेंद्र पटेल और रामचंद्र देवांगन ने संयुक्त रूप से कहा है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण है,उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उनकी छवि धूमिल करने और उन्हें फंसाने के उद्देश्य से की गई है।
सीसीटीवी और ऑडियो साक्ष्य का दावा
आरोपियों ने अपने पक्ष में कई साक्ष्य होने का दावा किया है, जिनमें घर में प्रवेश और बाहर निकलने का सीसीटीवी फुटेज,ऑडियो रिकॉर्डिंग, मोबाइल वीडियो,प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार,सीसीटीवी फुटेज में कहीं भी लूट,मारपीट या हिंसा जैसी स्थिति दिखाई नहीं देती।
पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप
नागेंद्र पटेल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना प्रारंभिक जांच के एफआईआर दर्ज की गई,गिरफ्तारी पहले और एफआईआर बाद में दर्ज हुई,आरोपियों से पर्याप्त पूछताछ नहीं की गई, उन्होंने इसे न्याय प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
षड्यंत्र और पुरानी दुश्मनी का एंगल
आरोपियों ने यह भी संकेत दिया कि पूरे मामले के पीछे पुरानी दुश्मनी या व्यक्तिगत विवाद हो सकता है,उनका कहना है कि इसी दुश्मनी को आधार बनाकर उन्हें फंसाने की साजिश रची गई और उसे कानूनी रूप दिया गया।


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