रायपुर,25 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने 25 मार्च 2026 को जगदलपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता में ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि राज्य सरकार और सुरक्षा बलों के साझा प्रयासों से छत्तीसगढ़ 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। यह घोषणा बस्तर के आदिवासियों और स्थानीय निवासियों के लिए ‘भय मुक्त’ भविष्य की गारंटी है। नक्सलवाद के खात्मे से बस्तर के अंदरूनी इलाकों में सड़क, स्कूल, और अस्पतालों का जाल बिछेगा, जिससे जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय समुदाय का अधिकार सुरक्षित और मजबूत होगा। नक्सल लीडर गणपति अभी कहां है पता नहीं, मिशीर भी अभी बचा है। 31 मार्च की रात कोई हैप्पी न्यू ईयर नहीं है। 31 मार्च के बाद भी एहतियात तो बरतना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट के धर्मांतरण को लेकर दिए आदेश पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया मगर यह प्रक्रिया पुरानी है। अगर कोई व्यक्ति इस्लाम या ईसाई समाज में जाएगा तो उनको स्ष्ट समाज के मिलने वाले बेनिफिट नहीं मिलेंगे इसलिए संस्कृति बहुत ही महत्वपूर्ण है। गांव-गांव में विभेद उत्पन्न हो गए हैं। माओवाद पहले वर्ग संघर्ष प्रारंभ करना चाहता था, मगर नहीं कर पाया,वहीं धर्मांतरण ने यह वर्ग संघर्ष खड़ा कर दिया। वर्ग संघर्ष के चलते आदिवासी समाज के बड़े तपके की मांग है कि डीलिस्टिंग होनी चाहिए। अब निर्णय क्या होता है संविधान के आधार पर यह न्यायालय बताएगा।
कैंप अब बनेंगे विकास के केंद्र : शर्मा ने भविष्य की योजना साझा करते हुए कहा कि बस्तर के आंतरिक क्षेत्रों में स्थापित 400 सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से विकास केंद्रों में बदला जाएगा।
टूटी नक्सलवाद की कमर : 5000 कैडर हुए कम
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर राज्य सरकार ने प्रभावी रणनीति अपनाई है। पिछले दो वर्षों में 3 हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है,जबकि 500 से अधिक मुठभेड़ों में ढेर हुए हैं। वर्तमान में डीकेजेडसी स्तर का कोई भी सक्रिय माओवादी छत्तीसगढ़ में शेष नहीं है। हाल ही में बड़े नक्सली नेता पापा राव का अपने साथियों सहित मुख्यधारा में लौटना इस बात का प्रमाण है कि अब नक्सल संगठन का शीर्ष ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। अब केवल 30 से 40 की सीमित संख्या में नक्सली दूरस्थ क्षेत्रों में बचे हैं, जिनके जल्द सरेंडर करने की उम्मीद है।
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