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रायपुर@छत्तीसगढ़ में पत्रकारों को कानूनी कवच ‘मीडिया कर्मी सुरक्षा अधिनियम, 2023’ लागू

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पत्रकारों की सुरक्षा,पंजीयन,त्वरित जांच और दंडात्मक कार्रवाई का कानूनी ढांचा तैयार


न्यूज डेस्क
रायपुर,25 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू ‘छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी सुरक्षा अधिनियम, 2023’ को 2 जून 2023 को राजपत्र में प्रकाशित कर प्रभावी किया गया, यह अधिनियम मीडिया कर्मियों को उनके पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के दौरान होने वाले हमले, धमकी,उत्पीड़न और अवरोध से कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
अधिनियम का उद्देश्य
अधिनियम का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पत्रकार और मीडिया संस्थान बिना भय और दबाव के स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें, कानून में स्पष्ट किया गया है कि मीडिया कर्मियों की सुरक्षा, संरक्षण और शिकायतों के निवारण के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित की जाएगी।
प्रमुख प्रावधान

  1. मीडिया कर्मियों का पंजीयन
    अधिनियम के तहत मीडिया कर्मियों के पंजीयन की व्यवस्था की गई है। पंजीकृत पत्रकारों को अधिनियम के तहत कानूनी सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार मिलेगा, पंजीयन प्रक्रिया को विनियमित और पारदर्शी बनाने के लिए सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
  2. राज्य स्तरीय सुरक्षा एवं शिकायत निवारण समिति
    पत्रकारों से संबंधित मामलों की सुनवाई और त्वरित कार्रवाई के लिए एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, यह समिति—शिकायतों की जांच करेगी, सुरक्षा उपलब्ध कराने की अनुशंसा करेगी, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की सिफारिश करेगी, समिति में प्रशासनिक, पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
  3. सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार
    यदि किसी पत्रकार को उनके कार्य के कारण धमकी,हमला या उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है,तो प्रशासन को तत्काल सुरक्षा प्रदान करनी होगी,अधिनियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पत्रकारों को किसी भी प्रकार की हिंसा या दबाव का सामना न करना पड़े।
  4. दंडात्मक प्रावधान
    मीडिया कर्मियों के कार्य में बाधा उत्पन्न करने, हमला करने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध दंड का प्रावधान किया गया है, दोष सिद्ध होने पर सजा और जुर्माने का प्रावधान अधिनियम में शामिल है, जिससे निवारक प्रभाव उत्पन्न हो सके।
  5. शासन की जवाबदेही
    सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर यह जिम्मेदारी डाली गई है कि वे अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें, सुरक्षा योजनाओं,त्वरित जांच और कार्रवाई की व्यवस्था के माध्यम से पत्रकारों के हितों की रक्षा की जाएगी।
  6. क्यों जरूरी था यह कानून?
    पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारों पर हमले, धमकी और दबाव की घटनाएं बढ़ी हैं, ऐसी परिस्थितियों में यह अधिनियम पत्रकारों के लिए कानूनी कवच के रूप में देखा जा रहा है, यह कानून—प्रेस की स्वतंत्रता को सुदृढ़ करेगा, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगा, पत्रकारों में सुरक्षा की भावना पैदा करेगा।
  7. चुनौतियां और अपेक्षाएं…
    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि…पंजीयन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रहती है, शिकायतों का निपटारा कितनी शीघ्रता से होता है, दोषियों पर कितनी कठोर कार्रवाई की जाती है, छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी सुरक्षा अधिनियम,2023 को राज्य में पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह न केवल पत्रकारों को सुरक्षा देगा, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को भी और मजबूत बनाएगा।

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