- यूको बैंक बैकुंठपुर में बड़ा लोन घोटाला
- 18–21 साल के युवा बने कर्जदार, पैसा उठा ले गए दूसरे
- नाम युवाओं का, कर्ज बैंक का, इस्तेमाल किया किसी और ने
- पढ़ने की उम्र में कर्ज का बोझ, नोटिस ने खोली लोन की परत
- यूको बैंक मुद्रा लोन में बड़ा खेल, कई युवक फंसे करोड़ों के कर्ज में
- मुद्रा लोन के नाम पर युवाओं को फंसाया, बैकुंठपुर यूको बैंक पर गंभीर आरोप
- यूको बैंक बैकुंठपुर में मुद्रा लोन को लेकर अनियमितताओं के आरोप
- यूको बैंक बैकुंठपुर में मुद्रा लोन घोटाले के गंभीर आरोप, कई युवाओं का भविष्य अधर में




-न्यूज डेस्क-
कोरिया,28 जनवरी 2026(घटती-घटना)। बैकुंठपुर स्थित यूको बैंक शाखा इस समय जिले के सबसे बड़े मुद्रा लोन विवाद को लेकर चर्चा के केंद्र में है,बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक आनंद पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आय का कोई साधन न रखने वाले युवाओं को मोहरा बनाकर उनके नाम पर लाखों रुपये का कर्ज स्वीकृत कराया, जबकि कर्ज की राशि का उपयोग स्वयं,उनके कथित एजेंटों और करीबी लोगों द्वारा किया गया,अब जब लोन की वसूली शुरू हुई है,तो सच्चाई सामने आने लगी है और कई पीडि़त युवक मानसिक तनाव,कानूनी नोटिस और बैंक रिकवरी के भय से जूझ रहे हैं, यह समाचार पीडि़तों की शिकायत,उपलब्ध दस्तावेजों एवं सूत्रों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि जांच के उपरांत ही होगी,संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर समाचार में प्रकाशित किया जाएगा।
18 से 21 वर्ष के युवाओं को बनाया गया कर्जदार– शिकायतकर्ताओं के अनुसार जिन युवाओं की उम्र मात्र 18 से 21 वर्ष थी,जिनके पास न कोई स्थायी रोजगार था, न आय का प्रमाण,न व्यवसायिक अनुभव उनके नाम पर 10–10 लाख रुपये तक के मुद्रा लोन स्वीकृत कर दिए गए, इनमें कई युवक छात्र थे,कुछ निजी ड्राइवर कुछ दैनिक मजदूरी या 5–6 हजार रुपये मासिक वेतन पर कार्यरत, इसके बावजूद उन्हें बैंक रिकॉर्ड में “व्यवसायी” दिखाकर भारी-भरकम कर्ज दे दिया गया।
एजेंट पीयूष और भाई विशाल की भूमिका पर सवाल- पूरे मामले में पीयूष नामक व्यक्ति की भूमिका को अहम बताया जा रहा है, जिसे बैंक मैनेजर आनंद का करीबी और एजेंट बताया जाता है, आरोप है कि पीयूष युवाओं को बहला-फुसलाकर बैंक लाता था उनसे दस्तावेज तैयार कराता था, कर्ज स्वीकृति के बाद उन्हें थोड़ी रकम देकर शेष राशि अपने व अन्य लोगों के उपयोग में ले ली जाती थी, जानकारी के अनुसार पीयूष के भाई के नाम पर लगभग 10 लाख रुपये, स्वयं पीयूष के नेटवर्क से 30 लाख रुपये से अधिक के लोन, अन्य युवाओं के नाम पर कई लाख रुपये के कर्ज स्वीकृत कराए गए।
अथर्व प्रकरण से खुली पूरी परत- इस पूरे मामले की परत तब खुली जब अथर्व श्रीवास्तव (उम्र लगभग 20 वर्ष) के नाम पर लिए गए लोन का विवाद सामने आया, पीड़ित के अनुसार उसे कुत्ता पालन व्यवसाय के नाम पर 10 लाख रुपये का मुद्रा लोन दिलाया गया, कुछ पैसे उसे दिए गए, अधिकांश रकम अन्य लोगों द्वारा उपयोग कर ली गई, जब उसने पैसों की मांग की तो बैंक मैनेजर आनंद के भाई विशाल ने उस पर 18 लाख रुपये का कानूनी नोटिस भेज दिया, नोटिस में यह दावा किया गया कि यह राशि “फ्रेंडली लोन” के रूप में दी गई थी, जब यह नोटिस अथर्व के परिवार के संज्ञान में आया, तब पूरे कथित षड्यंत्र की जानकारी सामने आई।
शिकायत बैंक मुख्यालय तक, कार्रवाई शून्य- अथर्व सहित अन्य पीड़ित युवाओं ने बैंक दस्तावेज, खाता विवरण, लोन स्वीकृति फाइल के साथ यूको बैंक के उच्च अधिकारियों और मुख्यालय में लिखित शिकायत दी, परंतु आरोप है कि रायपुर में पदस्थ एक वरिष्ठ अधिकारी के संरक्षण में शिकायतों को दबा दिया गया, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मैनेजर को समय दिया गया ताकि वह बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों में सुधार कर सके।
युवाओं ने पैसा नहीं लिया, फिर वसूली उनसे क्यों?- सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि जिन युवाओं के नाम पर कर्ज है, उन्होंने उस राशि का उपयोग नहीं किया, फिर भी बैंक वसूली उन्हीं से कर रहा है, आज स्थिति यह है कि कई युवाओं का सिबिल स्कोर खराब हो चुका है, भविष्य में उन्हें न नौकरी मिलेगी न किसी बैंक से लोन मिल सकेगा।
रायपुर में क्लब खोलने के नाम पर जुटाई गई राशि?- विशेष सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आई है कि शाखा प्रबंधक आनंद रायपुर में एक क्लब खोलने की योजना बना रहे थे, इसके लिए बड़ी पूंजी की आवश्यकता थी, उसी पूंजी व्यवस्था के लिए युवाओं के नाम पर कर्ज लिया गया, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायतकर्ताओं ने यही आरोप लगाए हैं।
जरूरतमंद व्यवसायियों से रिश्वत के आरोप– मामले में यह भी आरोप है कि जिन व्यापारियों के पास सभी वैध दस्तावेज थे, उन्हें भी बिना रिश्वत के लोन नहीं दिया जाता था, एक स्थानीय व्यवसायी प्रगेश ने आरोप लगाया कि उससे 70 हजार रुपये की राशि ली गई, बाद में मामला उजागर होने पर रकम लौटाई गई इस प्रकरण में भी एजेंट पीयूष की भूमिका बताई जा रही है।
बड़े सवाल जिनके जवाब अब बाकी-
क्या युवाओं को कर्ज के दलदल में धकेल दिया जाएगा?
जिन पैसों का उपयोग उन्होंने किया ही नहीं, क्या उसकी वसूली उनसे होगी?
क्या यूको बैंक निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराएगा?
या फिर मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?
युवाओं का भविष्य संकट में- आज कई युवा बैंक नोटिस, रिकवरी कॉल, कानूनी कार्रवाई के भय में जी रहे हैं, परिवारों की चिंता बढ़ चुकी है और प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस पूरे प्रकरण की सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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