मंडल अध्यक्ष सूची ने कोरिया कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति उघाड़ी

-रवि सिंह-
कोरिया,22 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। कांग्रेस पार्टी ने मंडल अध्यक्षों की सूची जारी कर भले ही संगठन विस्तार का दावा किया हो, लेकिन कोरिया जिले में यह सूची संगठन को मजबूत करने के बजाय भीतर से झकझोरती नजर आ रही है। जिस संगठन सृजन अभियान को कार्यकर्ताओं से संवाद और लोकतांत्रिक भागीदारी का माध्यम बताया गया था, वही अभियान अब कार्यकर्ताओं की नजर में एक औपचारिक रस्म बनकर रह गया है, सूची जारी होते ही जो असंतोष सामने आया, वह अचानक पैदा हुआ विरोध नहीं है। यह वही दबा हुआ आक्रोश है जो जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष नियुक्तियों के समय जन्मा था, लेकिन संगठन के डर और नेतृत्व के दबाव में तब सतह पर नहीं आ पाया,अब वही असंतोष नए रूप में फूट पड़ा है।
कोरिया कांग्रेस का मौजूदा संकट किसी एक सूची का विवाद नहीं,बल्कि यह तय करेगा कि पार्टी वास्तव में कार्यकर्ताओं की है या फिर कुछ चेहरों की परिधि में सिमटती जा रही है, संगठन सृजन यदि केवल मंचीय नारा बनकर रह गया,तो कार्यकर्ता केवल भीड़ बनकर रह जाएंगे और बिना कार्यकर्ता कोई भी पार्टी केवल नाम मात्र का संगठन रह जाती है,अब सवाल यह नहीं है कि मंडल अध्यक्ष कौन बना, सवाल यह है कि कांग्रेस का संगठन किसके हाथ में है?
घोषणाएं कार्यकर्ताओं की, निर्णय नेताओं के- कांग्रेस नेतृत्व ने संगठन सृजन अभियान के दौरान स्पष्ट कहा था कि नियुक्तियां कार्यकर्ताओं की मंशा से होंगी, जमीनी राय को प्राथमिकता दी जाएगी, बंद कमरे की राजनीति समाप्त होगी, लेकिन जब मंडल अध्यक्षों की सूची सामने आई, तो कार्यकर्ताओं को लगा कि निर्णय प्रक्रिया में उनका स्थान कहीं था ही नहीं, कार्यकर्ताओं का आरोप सीधा है नाम उन्होंने सुझाए, लेकिन चयन किसी और ने तय किया, यही कारण है कि अब सवाल केवल सूची का नहीं, बल्कि नियुक्ति की विश्वसनीयता का बन गया है।
भाजपा मॉडल की नकल, लेकिन अनुशासन गायब- मंडल अध्यक्ष पद की अवधारणा भाजपा संगठनात्मक ढांचे से प्रेरित मानी जा रही है, लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि कांग्रेस ने केवल संरचना अपनाई, उसकी आत्मा नहीं, भाजपा में मंडल प्रणाली संगठनात्मक अनुशासन, स्पष्ट जिम्मेदारी और सामूहिक निर्णय पर टिकी होती है। वहीं कांग्रेस में यह पद अब गुट संतुलन, व्यक्ति विशेष की पसंद, और शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बनता दिख रहा है, यही अंतर दोनों दलों की कार्यसंस्कृति को उजागर करता है।
पूर्व विधायक बनाम संगठन — असली टकराव– कोरिया कांग्रेस में उभरता असंतोष किसी सामान्य नियुक्ति विवाद का परिणाम नहीं है। इसके केंद्र में है संगठन की सामूहिक सोच बनाम एक प्रभावशाली चेहरे की व्यक्तिगत मंशा, कार्यकर्ताओं के आरोपों में बार-बार एक ही नाम सामने आना यह दर्शाता है कि जिले की राजनीति अब विचारधारा से ज्यादा व्यक्ति-केन्दि्रत सत्ता संरचना में सिमटती जा रही है, यदि जिलाध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष और अब मंडल अध्यक्ष तीनों स्तरों पर एक ही प्रभाव दिखाई दे, तो यह स्वाभाविक है कि कार्यकर्ता स्वयं को हाशिए पर महसूस करें।
कार्यकर्ता की सबसे बड़ी पीड़ा: सम्मान का अभाव- कांग्रेस का पारंपरिक आधार हमेशा उसका कार्यकर्ता रहा है, लेकिन कोरिया में आज वही कार्यकर्ता कह रहा है हमसे राय ली गई, लेकिन हमें सुना नहीं गया, राजनीति में पद से ज्यादा महत्वपूर्ण सम्मान होता है। जब सम्मान खत्म होता है, तब संगठनात्मक निष्ठा भी कमजोर पड़ती है, यही कारण है कि अब इस्तीफे की बातें केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि लंबे समय की उपेक्षा का परिणाम हैं।
नेतृत्व की चुप्पी और बढ़ता अविश्वास- नाराज कार्यकर्ताओं द्वारा वरिष्ठ नेताओं से संपर्क किए जाने के बावजूद ठोस हस्तक्षेप न होना स्थिति को और गंभीर बना रहा है, राजनीतिक इतिहास गवाह है जब संगठन में असंतोष को “समय के साथ शांत हो जाएगा” मान लिया जाता है, तब वही असंतोष चुनावी समय में विस्फोट बन जाता है, फिलहाल कोरिया कांग्रेस उसी मोड़ पर खड़ी दिखाई देती है।
चुनावी दृष्टि से क्यों खतरनाक है यह असंतोष?- कोरिया जिला पहले से ही कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में कार्यकर्ताओं का मोहभंग, गुटबाजी का विस्तार, संगठनात्मक दूरी पार्टी को जमीनी स्तर पर और कमजोर कर सकती है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंडल स्तर का ढांचा ही असंतोष से ग्रस्त रहा, तो बूथ प्रबंधन और जनसंपर्क अभियान पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
कांग्रेस के सामने अब तीन स्पष्ट विकल्प
सूची की पुनर्समीक्षा और संवाद
कार्यकर्ताओं की नाराजगी को नजरअंदाज कर आगे बढ़ना
व्यक्ति केंद्रित राजनीति को संगठन पर हावी रहने देना
पहला रास्ता कठिन जरूर है, लेकिन संगठन को बचा सकता है।
दूसरा और तीसरा रास्ता फिलहाल आसान लग सकता है, लेकिन भविष्य में भारी राजनीतिक कीमत चुका सकता है।
नवनियुक्त कांग्रेस मंडल अध्यक्ष
नगर मंडल अध्यक्ष – श्री राजेश सिंह पैकरा
पटना मंडल अध्यक्ष – श्री परेश सिंह
बंजारी डांड मंडल अध्यक्ष – श्री बसंत सिंह पोया
पोंड़ी मंडल अध्यक्ष – श्री राहुल जायसवाल
मनसुख मंडल अध्यक्ष – श्री विनोद जायसवाल
बुडा¸र मंडल अध्यक्ष – श्री देवनारायण कुशवाहा
बड़गांव मंडल अध्यक्ष – श्री राम साय सोरी
महोरा मंडल अध्यक्ष – श्री संतोष सूर्यवंशी
भांडी मंडल अध्यक्ष – श्री राजू भगत
रनई मंडल अध्यक्ष – श्री आस्तिक शुक्ला
ओड़गी मंडल अध्यक्ष – श्री दीपक साहू
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