- 37 हजार क्विंटल धान गायब
- धान खरीदी में महाघोटाला: सूरजपुर के 10 से अधिक उपार्जन केंद्रों में भारी कमी
- 37,734 क्विंटल धान की कमी से हड़कंप, प्रशासन एक्शन मोड में
- धान खरीदी घोटाले पर प्रशासन सख्त, करोड़ों के गबन की जांच तेज
- धान खरीदी घोटाले में एफआईआर की तैयारी, 11.69 करोड़ की अनियमितता उजागर
- भौतिक सत्यापन में खुली पोल, सूरजपुर में हजारों मि्ंटल धान गायब
- कागजों में भरा गोदाम, हकीकत में खाली — सूरजपुर में धान घोटाले का खुलासा
- धान खरीदी में बड़ा खेल, नोटिस से आगे बढ़ी जांच
- किसानों के धान में घोटाला, 11 करोड़ का स्टॉक गायब
- सूरजपुर में धान खरीदी घोटाला, 37 हजार मि्ंटल धान कम
- दैनिक घटती-घटना की खबरों के बाद प्रशासन एक्शन मोड में, एफआईआर की तैयारी

ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,22 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। सूरजपुर जिले में धान खरीदी व्यवस्था से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है, जिले के विभिन्न धान उपार्जन केंद्रों में कराए गए भौतिक सत्यापन के दौरान 37,734 क्विंटल धान की भारी कमी पाई गई है,जिसकी अनुमानित कीमत 11 करोड़ 69 लाख 75 हजार 400 रुपये आंकी गई है। यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि व्यवस्थित भ्रष्टाचार और शासकीय राशि के दुरुपयोग की ओर सीधा संकेत करता है,दैनिक घटती-घटना में लगातार प्रकाशित खबरों के बाद प्रशासन हरकत में आया और जिले में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया गया।
कैसे खुला पूरा मामला- पिछले कई महीनों से सूरजपुर जिले के धान उपार्जन केंद्रों से रिकॉर्ड में खरीदी दिखना, भुगतान हो जाना, लेकिन गोदामों में धान नहीं मिलना जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं, दैनिक घटती-घटना द्वारा इन अनियमितताओं को प्रमुखता से उजागर किए जाने के बाद उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला सूरजपुर के निर्देश पर धान उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन कराया गया।
नोटिस काफी नहीं, अब कार्रवाई जरूरी- प्रशासन द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी करना आवश्यक कदम था, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. इससे पहले भी प्रदेश में कई बार ऐसे घोटाले सामने आए, जिनका अंत नोटिस और फाइलों तक सीमित रह गया. यदि 11 करोड़ रुपये की अनियमितता पर केवल स्पष्टीकरण लेकर मामला समाप्त कर दिया गया, तो यह न केवल किसानों बल्कि ईमानदार अधिकारियों के साथ भी अन्याय होगा, अब समय आ गया है कि दोषियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय हो, राशि की शत-प्रतिशत वसूली हो और आवश्यक होने पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
10 से अधिक केंद्रों में जांच, 8 केंद्रों के ठोस आंकड़े सामने- प्रशासन द्वारा अब तक 10 से अधिक धान उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है, इनमें से 8 केंद्रों में भारी मात्रा में धान की कमी के ठोस आंकड़े उपलब्ध हुए हैं, 2 केंद्रों के आंकड़े अभी प्राप्त नहीं हो सके हैं।
धान की कमी के चौंकाने वाले आंकड़े
उपार्जन केंद्र धान की कमी (क्विंटल)
चंदौरा 818
लटोरी 4,367.60
सोनपुर बंजा 4,350
शिवप्रसाद नगर 5,552
उमेश्वरपुर 7,036.40
सूरजपुर 6,610.40
टुकुडांड 6,412.80
सावरवां 2,588
कुल कमी – 37,734 मि्ंटल धान
अनुमानित मूल्य – ₹11.69 करोड़
सबसे बड़ा सवाल – धान गया कहां?- यह सवाल अब पूरे जिले में गूंज रहा है कि जब धान खरीदा गया, किसानों को भुगतान किया गया, शासन ने राशि जारी की, तो फिर इतना बड़ा स्टॉक आखिर गायब कैसे हो गया? रिकॉर्ड में मौजूद धान और गोदाम में मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच यह अंतर सीधे तौर पर घोटाले की पुष्टि करता है।
पांच समितियों को कारण बताओ नोटिस- भौतिक सत्यापन के बाद प्रशासन ने 5 समितियों के प्रबंधकों एवं धान खरीदी प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, शेष केंद्रों में जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद नोटिस जारी किए जाएंगे, कुछ नोटिसों की जवाब देने की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब तक उनकी आगे की कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई है।
नोटिस प्राप्त अधिकारी-
विकास जायसवाल — टुकुडांड
मोहम्मद रिजवान अंसारी — सावरवां
ठाकुर सिंह मरावी — उमेश्वरपुर
साधना कुशवाह — शिवप्रसाद नगर
मोहन राजवाड़े — सूरजपुर
प्रशासन की स्पष्ट चेतावनी- नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो, एफआईआर दर्ज की जाएगी, वित्तीय नुकसान की वसूली की जाएगी, निलंबन एवं सेवा समाप्ति की कार्रवाई संभव है, कार्रवाई निम्न कानूनों के अंतर्गत होगी छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960, नियम 1962 प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाएं सेवा नियम 2018
प्रशासन अब सख्त रुख में- सूत्रों के अनुसार प्रशासन यह मान रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में कमी, बिना संगठित नेटवर्क के संभव नहीं, इसमें खरीदी प्रभारी, समिति प्रबंधन, परिवहन व स्टोरेज स्तर तक की भूमिका की जांच की जा रही है, जल्द ही विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट, परिवहन चालान मिलान, टोकन व रिकॉर्ड सत्यापन, सीसीटीवी व लॉजिस्टिक डेटा के आधार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा सकते हैं।
किसानों में रोष, पारदर्शिता की मांग- स्थानीय किसानों और समाजिक संगठनों ने कहा कि धान खरीदी में भ्रष्टाचार का सीधा असर किसानों पर पड़ता है, भुगतान, वजन और रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी हों, दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो ताकि दोबारा ऐसी घटनाएं न हों।
पत्रकारिता का असर- यह पूरा मामला एक बार फिर साबित करता है कि जिम्मेदार पत्रकारिता ही भ्रष्टाचार को उजागर कर सकती है, दैनिक घटती-घटना में लगातार प्रकाशित खबरों के बाद ही प्रशासन सक्रिय हुआ, सत्यापन शुरू हुआ और करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश संभव हो पाया।
अब आगे क्या? अब जिले की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
क्या वास्तव में एफआईआर दर्ज होगी?
क्या दोषियों से 11 करोड़ से अधिक की वसूली होगी?
या मामला एक बार फिर कागजों में सिमट जाएगा?
धान खरीदी व्यवस्था किसानों की आय और राज्य की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी है। ऐसे में यह प्रकरण केवल आर्थिक नहीं बल्कि जनहित और विश्वास का मामला बन चुका है।
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