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नई दिल्ली@गरीबों, कमजोर तबकों के हक पर हमला है ‘वीबी-जी राम जी : राहुल

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नई दिल्ली,22 जनवरी 2026। कांग्रेस ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह पर लाए गए विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी- जी राम जी अधिनियम को ग्रामीण भारत के गरीबों और कमजोर तबकों पर हमला करार दिया है। पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रचनात्मक कांग्रेस द्वारा गुरुवार को जवाहर भवन में आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा मजदूर सम्मेलन को संबोधित किया। कांग्रेस के मुताबिक सम्मेलन में देश के 25 राज्यों से 400 से अधिक मनरेगा श्रमिक और कार्यकर्ता शामिल हुए। सम्मेलन में भाग लेने वाले कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र की मिट्टी भी साथ लाए। इन मिट्टियों को मिलाकर जवाहर भवन परिसर में एक पौधा लगाया गया, जिसे मनरेगा और मजदूरों के संघर्ष का प्रतीक बताया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद रहे। राहुल ने कहा कि मनरेगा को किसी योजना की तरह नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकार के रूप में तैयार किया गया था। इसका मकसद था कि जिसे काम चाहिए, उसे सम्मानजनक काम मिले। पंचायत स्तर से योजना चलाई जाए और हर गरीब को रोजगार का अधिकार मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस अधिकार को खत्म करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘अधिकार’ शब्द से परेशान हैं और गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने की बजाय उन्हें आश्रित बनाना चाहते हैं। किसानों के खिलाफ लाए गए तीन काले कानूनों को किसानों ने मिलकर रद्द करवाया था, उसी तरह मजदूरों को भी एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध करना होगा। राहुल ने आरोप लगाया कि वीबी- जी राम-जी गरीबों और मजदूरों के अधिकारों पर हमला है। केंद्र सरकार तय करेगी कि किस राज्य को कितना पैसा मिलेगा। सरकार भाजपा शासित राज्यों को ज्यादा और विपक्ष शासित राज्यों को कम पैसा देगी। यह भी केंद्र ही तय करेगा कि कब और कहां काम होगा, किसे कितनी मजदूरी मिलेगी। मजदूरों के अधिकार अब ठेकेदारों को सौंपे जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा कि मनरेगा बचाने की लड़ाई लंबी है और इसे केवल नारे लगाकर नहीं जीता जा सकता। जब तक सरकार नया कानून वापस नहीं लेती और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं करती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। मनरेगा को खत्म कर सरकार ने ग्रामीण भारत के गरीबों और कमजोर तबकों पर हमला किया है। मोदी सरकार मनरेगा को खत्म कर दबे-कुचले लोगों को ‘बंधुआ मजदूर’ बनाना चाहती है।
खरगे ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने अनुच्छेद 41 के तहत जनता को काम का अधिकार, भोजन सुरक्षा का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और सूचना का अधिकार दिया था लेकिन आज सरकार इन अधिकारों को छीनने पर आमादा है। अगर जनता इस आंदोलन में योगदान नहीं देगी तो वह अपना हक खो बैठेगी। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने 10 जनवरी से 45 दिन का देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ शुरू किया है। पार्टी की मांग है कि वीबी- जी राम जी कानून वापस लिया जाए, मनरेगा को उसके अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जाए।
राहुल ने कहा…मनरेगा में गरीब लोगों को काम करने का अधिकार था
राहुल ने कहा कि मनरेगा गरीबों को अधिकार देने के लिए लाई गई योजना थी। इसका उद्देश्य जरूरतमंदों को काम देना था। यह योजना सरकार के तीसरे स्तर यानी पंचायती राज के माध्यम से चलाई जानी थी। अधिकार शब्द महत्वपूर्ण था। सभी गरीब लोगों को मनरेगा के तहत काम करने का अधिकार था। पीएम मोदी-भाजपा उस कन्सेप्ट को खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा, कुछ साल पहले सरकार 3 काले कृषि कानून लाई थी। लेकिन हम सभी के एकजुट होकर दबाव बनाया और कानूनों को रद्द करवा दिया। नए कानून में केंद्र सरकार काम और पैसा देने का फैसला करेगी और भाजपा शासित सरकारों को हमेशा प्राथमिकता मिलेगा। राहुल ने कहा, पहले जो मजदूरों को मिलता था, वह अब ठेकेदारों और अफसरों को दिया जाएगा। भाजपा चाहती है कि संपत्ति कुछ ही हाथों में रहे ताकि गरीब लोग अडानी-अंबानी पर निर्भर रहें, यही उनका भारत का आदर्श है। वे ऐसा भारत चाहते हैं, जहां राजा ही सब कुछ तय करे।
कांग्रेस देशभर में कर रही है बिल का विरोध
सम्मेलन में देश भर के श्रमिकों ने भाग लिया और अपने कार्यस्थलों से मुट्ठी भर मिट्टी लाकर खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में प्रतीकात्मक रूप से पौधों में डाली। कांग्रेस ने 10 जनवरी को यूपीए सरकार के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को निरस्त किए जाने के विरोध में 45 दिनी राष्ट्रव्यापी अभियान मनरेगा बचाओ संग्राम की शुरुआत की थी। विपक्षी दल ‘विकसित भारत – रोजगार आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम’ को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में, यानी काम करने के अधिकार और पंचायतों के अधिकार को बरकरार रखते हुए, एक अधिकार-आधारित कानून के रूप में बहाल करने की मांग कर रहा है।


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