कोरबा,19 जनवरी 2026(घटती-घटना)। कोरबा की बेटी ईशानी कौर सहित चार छात्राओं ने विकसित एक नवीन तकनीकी समाधान नवाचार के क्षेत्र में अपनी सशक्त पहचान बनाई है। यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। छात्राओं ने इंफ्रारेड लेजर बेस्ड फेशियल रिकॉगनाइजेशन एटेंडेंट सिस्टम एंड मेथड थेयोफ में पेटेंट प्राप्त किया है। यह पेटेंट लगभग 20 वर्षांे के लिए स्वीकृत किया गया है। यह छात्राओं के लिए के लिए बड़ी सफलता है। इसी के साथ ईशनी ने कोरबा जिले का मान बढ़ाया है। शहीद भगत सिंह कॉलोनी एसईसीएल में रहने वाली ईशानी कौर पिता डॉली सिंह,शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी रायपुर में कम्प्युटर साइंस इंजीनियरिंग तीसरे सेमेस्टर की छात्रा है। ईशानी ने कॉलेज में अध्ययनरत एलिन मसिह, लता टेकाम एवं अंशिका कुमारी के साथ मिलकर यह उपलब्धि हासिल किया है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय को इन्फ्रारेड लेजर-आधारित फेशियल रिकग्निशन अटेंडेंस सिस्टम और उसकी विधि विषय पर 17 जून 2025 को आवेदन किया था। इसे 05 जनवरी को स्वीकृति प्रदान किया गया। यह नवाचार शिक्षा संस्थानों में उपस्थिति (अटेंडेंस) से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्याओं का आधुनिक, स्वचालित और संपर्क-रहित समाधान प्रस्तुत करता है। यह पेटेंट पेटेंट अधिनियम, 1970 के अंतर्गत 20 वर्षों की वैधता के लिए स्वीकृत किया गया है, जो किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने अपने अकादमिक ज्ञान और नवाचार सोच का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। ईशानी ने बताय कि यह शोध कार्य संस्थान के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. डीएस क्षत्री के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उनके नेतृत्व में आइडिया से लेकर पेटेंट ग्रांट तक की पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने बताया कि उनके कॉलेज में पेटेंट कल्चर और इनोवेशन को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाता है। प्रबंधन की ओर से बताया गया कि पहले वर्ष से ही आईपीआर (इंटेलेख्ुअल प्रॉपर्टी राईट्स) से जुड़े सत्र और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इससे छात्रों में पेटेंट फाइल करने का आत्मविश्वास विकसित होता है। इस संबंध में शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी रायपुर के अतुल चक्रवर्ती और डॉ. धीरेंद्र ङ्क्षसह ने प्रेसवार्ता की। इस दौरान डीएवी पब्लिक स्कूल कोरबा की शिक्षिका माधवी ढीमर सहित अन्य उपस्थित थे। छात्रा ने कहा कि इस पेटेंट का मूल विचार उन्हें फिजिक्स की कक्षा में लेजर और फाइबर ऑप्टिक्स का अध्ययन करते समय आया। कक्षा में पढ़ाए जा रहे सिद्धांतों को वास्तविक जीवन की समस्या से जोड़ते हुए उन्होंने उपस्थिति प्रणाली को अधिक सटीक और आधुनिक बनाने की दिशा में कार्य करना शुरू किया। इसके बाद डॉ. डीएस क्षत्री के मार्गदर्शन में छात्राओं ने पेटेंट ड्राफ्टिंग की पूरी प्रक्रिया को सीखा और क्लेम एक से लेकर एफईआर (फ्रर्स्ट एक्जामिनेशन रिपोर्ट), जवाब, संशोधन और पेटेंट प्रणाली तक की सभी औपचारिकताओं को समझते हुए पूरा किया। उन्होंने बताया कि यह पेटेंट आधारित प्रणाली इंफ्रारेड लेजर डॉट प्रोजेक्शन, इंफ्रारेड कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक पर कार्य करती है। यह प्रणाली बिना किसी स्पर्श के, कम रोशनी में भी सटीक रूप से उपस्थिति दर्ज करने में सक्षम है। इससे शिक्षकों का समय बचता है और प्रशासनिक कार्य अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनता है।
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