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एमसीबी/खड़गवां@ मनरेगा मजदूरी भुगतान में बड़ा फर्जीवाड़ा या तकनीकी खेल?

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खड़गवां जनपद में उठा गंभीर सवाल, ₹261 की जगह ₹130.76 प्रतिदिन भुगतान से श्रमिकों में आक्रोश
मनरेगा मजदूरी भुगतान में बड़ा फर्जीवाड़ा या तकनीकी खेल?
खड़गवां जनपद में उठा गंभीर सवाल, ₹261 की जगह ₹130.76 प्रतिदिन भुगतान से श्रमिकों में आक्रोश
एमसीबी/खड़गवां 18 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत मजदूरों को 100 दिन का रोजगार और निर्धारित मजदूरी देने का दावा किया जाता है, लेकिन एमसीबी जिले के जनपद पंचायत खड़गवां क्षेत्र से सामने आया मामला इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, पोड़ी बचरा क्षेत्र के ग्राम पंचायत कौड़ीमार में मनरेगा अंतर्गत कराए जा रहे डबरी (गोदी) निर्माण कार्य में श्रमिकों को शासन द्वारा निर्धारित मजदूरी दर से आधा भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे ग्रामीण मजदूरों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
एक सप्ताह काम, लेकिन भुगतान आधी मजदूरी का- ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कौड़ीमार में हितग्राही पंचम सिंह सहित अन्य पंजीकृत मनरेगा श्रमिकों से एक सप्ताह तक कार्य कराया गया, मजदूरों का कहना है कि उनसे पूरे दिन नियमानुसार कार्य कराया गया, लेकिन जब भुगतान आया तो मजदूरी आधी से भी कम मिली।
श्रमिकों में गहरा आक्रोश- मजदूरों का कहना है कि जब सरकार मजदूरी ₹261 तय करती है, तो फिर हमें ₹130 क्यों मिले? हमने काम पूरा किया, फिर पैसा आधा क्यों? ग्रामीण मजदूरों ने आरोप लगाया कि मनरेगा में अब काम कराने के बाद तकनीकी प्रक्रिया के नाम पर मजदूरी काटी जा रही है, जिसकी जानकारी श्रमिकों को न तो पहले दी जाती है और न ही कार्य के दौरान।
कांग्रेस का भाजपा सरकार पर सीधा हमला- मामले को लेकर एमसीबी जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने कहा अब तो ऐसा लगने लगा है कि मनरेगा की मजदूरी दर भी घटा दी गई है, केंद्र की भाजपा सरकार ने मनरेगा कानून में बदलाव कर गरीबों का हक छीना है, उन्होंने आरोप लगाया कि कौड़ीमार पंचायत में ₹130.76 प्रतिदिन खड़गवां की अन्य पंचायतों में ₹51.30 प्रतिदिन जैसी बेहद कम मजदूरी दर से भुगतान किया गया है, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा भाजपा सरकार मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश कर रही है, ताकि बड़े उद्योगपतियों विशेषकर अडानी-अंबानी को सस्ते दामों पर मजदूर उपलब्ध कराए जा सकें, यह नीति पूरी तरह गरीब विरोधी और मजदूर विरोधी है, उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा मजदूरों को उनका पूरा भुगतान दिलाने के लिए आंदोलन और कानूनी लड़ाई दोनों लड़ेगी।
मनरेगा मजदूरी दर पर उठे सवाल छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान मनरेगा मजदूरी दर ₹261 प्रतिदिन अधिसूचित है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अलग-अलग पंचायतों में अलग-अलग दर से भुगतान होने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या मजदूरी दर अब केवल कागजों तक सीमित रह गई है? क्या मेजरमेंट सिस्टम मजदूर विरोधी बनता जा रहा है? क्या पंचायत-पंचायत में अलग नियम लागू हो रहे हैं?
प्रशासन का पक्ष: “मेजरमेंट के आधार पर भुगतान”- मामले में जनपद पंचायत खड़गवां की ओर से आधिकारिक वर्जन भी सामने आया है, कृष्ण प्रताप सिंह प्रोग्रामर, जनपद पंचायत खड़गवां ने बताया मजदूरी की दर ₹261 प्रतिदिन ही है, लेकिन जो भुगतान ₹130.76 की दर से किया गया है, वह कार्य की मेजरमेंट के आधार पर भुगतान है, उन्होंने कहा डबरी निर्माण की गहराई, लंबाई, चौड़ाई इस्टीमेट के अनुसार पूर्ण नहीं पाई गई, इंजीनियर द्वारा की गई नपाई में कार्य की मात्रा कम निकलने के कारण मजदूरी अनुपात में घटाई गई है और उसी आधार पर भुगतान किया गया है, प्रोग्रामर ने स्पष्ट किया कि भुगतान पूरी तरह नियमों के अनुसार और सत्यापन उपरांत किया गया है।
लेकिन मजदूरों के सवाल बरकरार- हालांकि प्रशासनिक जवाब के बाद भी मजदूर असंतुष्ट हैं, उनका कहना है कि कार्य शुरू करते समय उन्हें कोई तकनीकी मानक नहीं समझाया गया, काम के दौरान कभी कमी नहीं बताई गई, भुगतान के समय सीधे मजदूरी काट दी गई, मजदूरों ने मांग की है कि मेजरमेंट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, मजदूरी कटौती का लिखित कारण दिया जाए, पूरा भुगतान ₹261 प्रतिदिन के हिसाब से किया जाए।
जांच की मांग तेज– मामले के उजागर होने के बाद कांग्रेस पार्टी, ग्रामीण जनप्रतिनिधि, श्रमिक संगठन मनरेगा कार्यों की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह मामला नहीं सुलझा तो आने वाले दिनों में जनपद कार्यालय के समक्ष आंदोलन किया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल इस पूरे प्रकरण ने प्रशासन और सरकार के सामने गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
क्या मनरेगा मजदूरी अब पूर्ण दिवस के बजाय “नपाई आधारित” हो चुकी है?
क्या मजदूरों को तकनीकी खामियों की सजा दी जा रही है?
क्या गरीबों की गारंटी योजना अब केवल कागजों में सिमट रही है?

मनरेगा: रोजगार की गारंटी या मजदूरी की अनिश्चितता?- जिस योजना को ग्रामीण गरीबों के लिए जीवनरेखा माना जाता था, वही मनरेगा अब मजदूरी भुगतान को लेकर विवादों में घिरती नजर आ रही है, अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में पारदर्शिता दिखाकर श्रमिकों को उनका पूरा हक दिलाता है या यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।
कार्य विवरण
कार्य का नाम: डबरी निर्माण
कार्य अवधि: 7 जनवरी 2026 से 12 जनवरी 2026
कुल कार्य दिवस: 6 दिन
घोषित मजदूरी दर: ₹261 प्रतिदिन
भुगतान की गई मजदूरी: ₹130.76 प्रतिदिन
कुल भुगतान: ₹784.56


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