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कोरिया/बैकुंठपुर@ 73 बनाम 25 हजार! साहू समाज चुनाव ने खोली संगठन की सच्चाई

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  • 73 नामों में कैद समाज का लोकतंत्र! कोरिया साहू समाज चुनाव पर सवालों की बौछार
  • संगठन बड़ा,मतदाता छोटे! साहू समाज का जिलाध्यक्ष चुनाव संदेहों में घिरा
  • कोरिया साहू समाज चुनाव विवाद: 25 हजार की आबादी,मतदाता सिर्फ 73
  • साहू समाज जिलाध्यक्ष चुनाव पर सवाल,क्या 73 लोग करेंगे पूरे समाज का प्रतिनिधित्व?

-रवि सिंह-
कोरिया/बैकुंठपुर,17 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
कोरिया जिले में जिला साहू समाज के जिलाध्यक्ष पद का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे समाज के भीतर असंतोष और विवाद गहराता जा रहा है, चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही जारी की गई निर्वाचक नामावली ने पूरे समाज को दो हिस्सों में बांट दिया है, कारण है इस सूची में मतदाताओं की कुल संख्या मात्र 73 होना,इस संख्या के सामने आते ही समाज के भीतर यह प्रश्न उठने लगा है कि जो साहू समाज स्वयं को बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बताता है, उसकी पूरी जिम्मेदारी क्या केवल 73 लोगों के हाथों में सौंपी जा रही है?
18 जनवरी को प्रस्तावित चुनाव पर संशय
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अचानक इस्तीफे के बाद अब 18 जनवरी को प्रस्तावित जिला अध्यक्ष चुनाव पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं, समाज के भीतर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि बिना मुख्य निर्वाचन अधिकारी के चुनाव कैसे होगा? क्या चुनाव तिथि आगे बढ़ाई जाएगी? क्या नई निर्वाचन समिति गठित की जाएगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है…
जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी ही पद छोड़ चुके हैं, तो 18 जनवरी को जिला साहू समाज कोरिया का चुनाव किस प्रक्रिया और किस नेतृत्व में होगा? समाज के सभी सदस्यों की निगाहें अब प्रदेश नेतृत्व और निर्वाचन समिति के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं, क्या 73 मतदाता 25 हजार की आबादी वाले समाज का सही प्रतिनिधित्व कर सकते हैं? या फिर यह चुनाव साहू समाज के इतिहास में एक और विवादित अध्याय बनकर रह जाएगा?
73 लोग तय करेंगे समाज का भविष्य?
निर्वाचन समिति द्वारा प्रकाशित मतदाता सूची के अनुसार समाज के जिलाध्यक्ष का चुनाव केवल 73 आजीवन सदस्यों द्वारा किया जाएगा, यही तथ्य अब सबसे बड़ा विवाद बन चुका है,समाज के असंतुष्ट सदस्यों का कहना है कि यह मतदाता सूची समाज की वास्तविक संख्या का प्रतिनिधित्व नहीं करती,चुनाव प्रक्रिया सीमित लोगों के इर्द-गिर्द केंद्रित कर दी गई है, व्यापक सदस्यता को जानबूझकर बाहर रखा गया है, समाज के ही कुछ लोगों ने दैनिक घटती-घटना को बताया कि यह सूची एक व्यक्ति विशेष को अध्यक्ष बनाने की मंशा से तैयार की गई है, ताकि मतदाता बढ़ने की स्थिति में उसका समीकरण न बिगड़े।
25 हजार की आबादी,लेकिन मतदाता सिर्फ 73
समाज के अंदर यह तथ्य लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है कि कोरिया जिले में साहू समाज की अनुमानित आबादी लगभग 25 हजार है,विभिन्न सामाजिक व्हाट्सएप समूहों में ही 350 से अधिक सक्रिय सदस्य जुड़े हैं,इसके बावजूद निर्वाचन नामावली में केवल 73 नाम होना, समाज की संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करता है, समाज के लोगों का कहना है कि इतनी कम संख्या में चुनाव कराना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप।
अंदरखाने उबाल, खुलकर विरोध नहीं-
समाज के भीतर इस विषय को लेकर गहरा आक्रोश है, सूत्रों के अनुसार बड़ी संख्या में सदस्य नाराज हैं,चुनाव प्रक्रिया को दोषपूर्ण मान रहे हैं, लेकिन संगठनात्मक दबाव और सामाजिक समीकरणों के कारण खुलकर सामने नहीं आ रहे,दबी जुबान में कई सदस्य यह स्वीकार कर रहे हैं कि यह चुनाव पहले से तय दिशा में मोड़ा जा चुका है।
आरोप: सीमित सूची केवल पद हथियाने के लिए…असंतुष्ट सदस्यों का आरोप है कि…यह निर्वाचक सूची केवल पदाधिकारी चयन तक सीमित रखी गई, वर्षों तक आजीवन सदस्यता अभियान नहीं चलाया गया,जानबूझकर मतदाताओं की संख्या सीमित रखी गई,उनका कहना है कि यदि सदस्यता विस्तार पर गंभीरता से कार्य हुआ होता तो आज समाज के मतदाता सैकड़ों या हजारों की संख्या में होते,न कि केवल 73।
राजनीतिक भविष्य पर भी संकट की आशंका
समाज के वरिष्ठ और जागरूक सदस्यों का मानना है कि यह स्थिति भविष्य में समाज को राजनीतिक रूप से कमजोर कर सकती है, उनका कहना है इतनी कम मतदाता संख्या समाज की शक्ति को कम दर्शाती है, राजनीतिक दल समाज की वास्तविक जनसंख्या को गंभीरता से नहीं लेंगे,भविष्य में साहू समाज से प्रत्याशी बनाए जाने की संभावनाएं और कमजोर होंगी, एक सदस्य के शब्दों में जब समाज खुद अपनी संख्या छिपा देगा, तो राजनीति क्यों उस समाज को प्रभावशाली मानेगी?
एक लाख रुपये अमानत राशि की मांग
चुनाव प्रक्रिया को लेकर समाज के भीतर एक और मांग उठ रही है, वर्तमान में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी के लिए 11,000 की अमानत राशि निर्धारित है, समाज के कुछ सदस्यों का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर 1,00,000 किया जाए,ताकि चुनाव और बैठकों के दौरान, बार-बार चंदा लेने की नौबत न आए,समाज की गतिविधियां आर्थिक रूप से सशक्त बनें।
पूर्व नेतृत्व की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न
समाज के लोग इस पूरे विवाद के लिए पूर्व और वर्तमान नेतृत्व दोनों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, आरोप है कि वर्षों तक सदस्यता विस्तार पर ध्यान नहीं दिया गया,आजीवन सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ाई गई,संगठन को मजबूत करने के बजाय सत्ता संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया, इसी का परिणाम है कि आज समाज का चुनाव 73 लोगों की सूची तक सिमट गया है।
एकजुटता की जगह विखंडन की आशंका
चुनाव से ठीक पहले जिस तरह के हालात बन रहे हैं,उससे यह स्पष्ट होता जा रहा है कि साहू समाज इस समय अंदरूनी विभाजन के दौर से गुजर रहा है, कुछ लोगों के फैसले पूरे समाज पर भारी पड़ रहे हैं,यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ,तो इसका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई देगा।
जिला साहू समाज कोरिया चुनाव में बड़ा मोड़,मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तम साहू ने व्हाट्सऐप पर दिया इस्तीफा
जिला साहू समाज कोरिया के अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव से ठीक पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, चुनाव संपन्न कराने हेतु नियुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. उत्तम साहू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जानकारी के अनुसार डॉ. उत्तम साहू ने यह इस्तीफा व्हाट्सएप माध्यम से सार्वजनिक किया,जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई थी,उसे वे ठीक से निभा नहीं पा रहे हैं, डॉ. उत्तम साहू ने अपने संदेश में कहा मुझे समाज द्वारा निर्वाचन हेतु जो जिम्मेदारी दी गई थी,उसे मैं पूरा नहीं कर पाया, आज मैं अपने कार्य से मुक्त होना चाहता हूँ क्योंकि निर्वाचन समिति के सदस्यों के साथ समन्वय बनाने में असमर्थ रहा।


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