- कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों की सूची से साफ हुआ पूर्व विधायक का दबदबा
- ब्लॉक अध्यक्ष या विधानसभा के दावेदार? कोरिया में कांग्रेस की नई रणनीति
- कांग्रेस संगठन में फेरबदल, टिकट की राजनीति में उलझी नियुक्तियां
- कोरिया कांग्रेस में नियुक्तियों से सियासी हलचल, जातिगत समीकरण साधने की कवायद
- यथावत और नए चेहरों का खेल, कोरिया में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति उजागर
- बैकुंठपुर ग्रामीण में बिहारी लाल राजवाड़े को बड़ी जिम्मेदारी
- सोनहत में यथावत सुरेश सिंह, विधानसभा दावेदारी की अटकलें तेज
- आशीष यादव और अजीत लकड़ा की नियुक्ति पर सवाल
- संगठन के नाम पर टिकट की तैयारी, कोरिया कांग्रेस की ब्लॉक राजनीति
- ब्लॉक अध्यक्षों की कुर्सी से विधानसभा की राह?
- चेहरा देखकर राजनीति या संगठन निर्माण? कांग्रेस की परीक्षा
- आगामी चुनावों का ट्रायल…क्या बढ़ेगी गुटबाजी या मिलेगी मजबूती?
- कोरिया जिले में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति से सियासी हलचल, संगठन से ज्यादा चुनावी गणित हावी होने की चर्चा

-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,17 जनवरी 2026(घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेशभर में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों की नई सूची जारी किए जाने के बाद कोरिया जिले में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नई नियुक्तियों को लेकर संगठन के भीतर ही नहीं,बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं,जिले में की गई नियुक्तियों को लेकर यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह फैसला संगठन को मजबूत करने के लिए है या फिर आगामी विधानसभा और नगरीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखकर की गई एक सोची-समझी रणनीति है। कोरिया जिले में घोषित ब्लॉक अध्यक्षों की सूची पर नजर डालें तो अधिकांश नियुक्तियां पूर्व विधायक खेमे के प्रभाव में तय हुई प्रतीत होती हैं, जानकारों का कहना है कि जिले में ब्लॉक अध्यक्षों के चयन में स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय से अधिक पूर्व विधायक की मंशा और भविष्य की राजनीतिक जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है, यही वजह है कि कुछ स्थानों पर नए चेहरों को मौका दिया गया है तो कुछ जगहों पर यथावत की स्थिति बनाए रखी गई है।
बैकुंठपुर ग्रामीण में बिहारी लाल राजवाड़े को बड़ी जिम्मेदारी
बैकुंठपुर ग्रामीण ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी बिहारी लाल राजवाड़े को सौंपे जाने को सबसे अहम नियुक्ति माना जा रहा है, राजवाड़े न केवल पूर्व विधायक के करीबी माने जाते हैं, बल्कि उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का संभावित दावेदार भी माना जा रहा है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति संगठनात्मक कम और चुनावी अधिक है, इसे एक ओर जातिगत समीकरण साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में टिकट वितरण के समय पूर्व विधायक की स्थिति मजबूत करने की रणनीति भी मानी जा रही है।
बैकुंठपुर शहर में आशीष यादव की नियुक्ति, कई संकेत
बैकुंठपुर शहर ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी नगर पालिका उपाध्यक्ष आशीष यादव को दी गई है, यह नियुक्ति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। भले ही आशीष यादव को पूरी तरह पूर्व विधायक खेमे का नेता नहीं माना जाता, लेकिन वे नगर पालिका अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार माने जाते हैं, ऐसे में ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी देकर एक ओर उन्हें संगठन से जोड़ने का संदेश दिया गया है, वहीं दूसरी ओर उनकी नगरीय राजनीति की दावेदारी को संतुलित करने की रणनीति भी इसमें देखी जा रही है।
शिवपुर-चरचा में अजीत लकड़ा की ताजपोशी
शिवपुर-चरचा ब्लॉक अध्यक्ष पद पर अजीत लकड़ा की नियुक्ति को भी अप्रत्याशित माना जा रहा है, अजीत लकड़ा कभी पूर्व विधायक से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन हाल के समय में उनकी वापसी उसी खेमे में मानी जा रही है, उनकी नियुक्ति को पुराने नेताओं को फिर से साधने और संगठन पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सोनहत में यथावत, सुरेश सिंह की भूमिका पर नजर
सोनहत ब्लॉक में सुरेश सिंह को यथावत ब्लॉक अध्यक्ष बनाए रखा गया है, वे पूर्व विधायक के करीबी माने जाते हैं और जिला पंचायत चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत भी दिखा चुके हैं, क्षेत्र में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है, जिससे यह अटकलें तेज हैं कि वे भी आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी हो सकते हैं। ऐसे में उनका यथावत बने रहना भी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पूर्व विधायक का प्रभाव, संगठन में असंतोष की सुगबुगाहट
कुल मिलाकर कोरिया जिले में कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्तियों में पूर्व विधायक का प्रभाव साफ नजर आ रहा है, पार्टी के भीतर कुछ कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि लगातार एक ही खेमे के नेताओं को जिम्मेदारी देने से जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष पनप सकता है, संगठनात्मक संतुलन और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की जरूरत पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आगे की राह: संगठन मजबूत या गुटबाजी तेज?
अब बड़ा सवाल यह है कि इन नियुक्तियों से कांग्रेस संगठन को वास्तविक मजबूती मिलेगी या फिर पहले की तरह गुटबाजी और चेहरा देखकर राजनीति हावी रहेगी, आने वाले महीनों में नगरीय निकाय और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह ब्लॉक अध्यक्ष संगठन को किस दिशा में ले जाएंगे, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं, कोरिया जिले की राजनीति में यह नियुक्तियां आने वाले चुनावी समीकरणों का संकेतक मानी जा रही हैं।
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