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सूरजपुर@ कायाकल्प-स्वच्छ अस्पताल योजना 2024-25 में सूरजपुर जिला अस्पताल प्रदेश में अव्वल

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  • स्वच्छता में मिसाल बना सूरजपुर जिला अस्पताल, कायाकल्प योजना में छत्तीसगढ़ में पहला स्थान
  • 94.9 प्रतिशत अंकों के साथ सूरजपुर जिला अस्पताल ने रचा इतिहास, प्रदेश में बना नंबर-1
  • कायाकल्प योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन, सूरजपुर जिला अस्पताल को प्रदेश में सर्वोच्च स्थान
  • प्रदेश का सबसे स्वच्छ जिला अस्पताल बना सूरजपुर, कायाकल्प योजना में प्रथम स्थान


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,17 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
कायाकल्प-स्वच्छ अस्पताल योजना 2024-25 के तहत घोषित राज्य स्तरीय परिणामों में सूरजपुर जिला अस्पताल ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पूरे छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों के बीच हुए इस कठोर और बहुआयामी मूल्यांकन में सूरजपुर जिला अस्पताल ने 94.9 प्रतिशत अंक अर्जित कर शीर्ष स्थान पर कब्जा जमाया है। इस उपलब्धि ने न केवल जिले को गौरवान्वित किया है, बल्कि यह साबित किया है कि सुनियोजित प्रबंधन,सतत निगरानी और समर्पित टीमवर्क से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को भी उत्कृष्टता के शिखर तक पहुंचाया जा सकता है, उल्लेखनीय है कि इस क्रम में बलौदा बाजार जिला अस्पताल ने 94 प्रतिशत अंक प्राप्त कर दूसरा स्थान हासिल किया है, जबकि अन्य जिला अस्पताल सूरजपुर से पीछे रह गए।
प्रदेश का सबसे स्वच्छ और सुव्यवस्थित जिला अस्पताल : कायाकल्प योजना के अंतर्गत सूरजपुर जिला अस्पताल को प्रदेश के सबसे स्वच्छ, सुव्यवस्थित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले जिला अस्पताल के रूप में मान्यता मिली है, मूल्यांकन के दौरान अस्पताल की साफ-सफाई,संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था,जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, रोगी-मित्र सेवाएं,आधारभूत संरचना और रख-रखाव जैसे सभी प्रमुख मानकों पर अस्पताल का प्रदर्शन उत्कृष्ट पाया गया, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह उपलब्धि किसी एक दिन या एक निरीक्षण का परिणाम नहीं है, बल्कि महीनों की निरंतर मेहनत, अनुशासन और सुधारात्मक प्रयासों की देन है।
कायाकल्प योजनाः उद्देश्य और महत्व : भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित कायाकल्प योजना का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा देना है, इस योजना के तहत अस्पतालों का मूल्यांकन निम्न बिंदुओं पर किया जाता है अस्पताल परिसर की स्वच्छता और साफ-सफाई,संक्रमण नियंत्रण की प्रभावी प्रणाली,भवन, वार्ड और उपकरणों का रख-रखाव,जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन की वैज्ञानिक व्यवस्था, रोगी-मित्र सेवाएं,जैसे व्यवहार, सूचना, प्रतीक्षालय और शौचालय सुविधाएं इन सभी मापदंडों पर सूरजपुर जिला अस्पताल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया।
प्रशासनिक मार्गदर्शन और टीमवर्क की बड़ी जीत : सूरजपुर जिला अस्पताल की इस सफलता के पीछे मजबूत प्रशासनिक सहयोग और अस्पताल प्रबंधन की अहम भूमिका रही है। इस उपलब्धि पर एस. जयवर्धन, जिला कलेक्टर, ने अस्पताल प्रबंधन और समस्त स्वास्थ्य कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि कायाकल्प योजना में प्रथम स्थान प्राप्त करना जिले के लिए गर्व की बात है,यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और निरंतर सुधार के प्रयासों को दर्शाती है, वहीं डॉ. कपिल देव पैकरा (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी),डॉ. अजय मरकाम (सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक) तथा अस्पताल सलाहकार निलेश गुप्ता के नेतृत्व में अस्पताल में स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और सेवा गुणवत्ता को लेकर लगातार सुधारात्मक कदम उठाए गए,नियमित निरीक्षण, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और जवाबदेही तय करने जैसी व्यवस्थाओं ने इस सफलता में निर्णायक भूमिका निभाई।
आगे भी गुणवत्ता बनाए रखने का संकल्प…
अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह उपलब्धि अंतिम पड़ाव नहीं है,भविष्य में भी कायाकल्प योजना के सभी मानकों को बनाए रखते हुए और अधिक बेहतर करने की दिशा में काम किया जाएगा,मरीजों को स्वच्छ, सुरक्षित,सुलभ और मानवीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना अस्पताल की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।
पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत…
कायाकल्प-स्वच्छ अस्पताल योजना 2024-25 में प्रथम स्थान प्राप्त कर सूरजपुर जिला अस्पताल ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान भी यदि इच्छाशक्ति और समर्पण के साथ काम करें, तो वे निजी संस्थानों से बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। यह उपलब्धि न केवल सूरजपुर जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में देखी जा रही है।
मरीजों को मिल रही
बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं…
कायाकल्प मानकों के अनुरूप अस्पताल में साफ-सुथरे वार्ड,व्यवस्थित ओपीडी,स्वच्छ शौचालय,सुरक्षित अपशिष्ट निपटान व्यवस्था और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्राथमिकता दी गई। इससे न केवल संक्रमण का खतरा कम हुआ है,बल्कि मरीजों और उनके परिजनों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा भी मजबूत हुआ है,कई मरीजों ने बताया कि पहले की तुलना में अब अस्पताल का वातावरण अधिक स्वच्छ,सुव्यवस्थित और सहयोगात्मक हो गया है,जिससे उपचार के दौरान मानसिक संतोष भी मिलता है।


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