- खबर के बाद हिला प्रशासन, धान खरीदी में हजारों मि्ंटल कमी पर नोटिस
- धान खरीदी घोटाला उजागर, सहकारिता विभाग सख्त
- पत्रकारिता का असर: धान खरीदी अनियमितताओं पर कारण बताओ नोटिस, एफआईआर की चेतावनी
- धान खरीदी में बड़ा खेल, खबर के बाद जिम्मेदारों पर शिकंजा
- कई उपार्जन केंद्रों में हजारों मि्ंटल धान कम मिलने से मचा हड़कंप
- स्पष्टीकरण नहीं देने पर एफआईआर और वैधानिक कार्रवाई तय
- 19 जनवरी तक जवाब देने का अंतिम अवसर
- खबर का असर: फाइलों से बाहर आया धान खरीदी घोटाला
- घटती-घटना ने खोली पोल, धान खरीदी में भारी गड़बड़ी उजागर
- सवालों के घेरे में धान खरीदी व्यवस्था, प्रशासन को करनी पड़ी कार्रवाई

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,17 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। दैनिक घटती-घटना में लगातार प्रकाशित धान खरीदी में अनियमितताओं और संभावित घोटालों से जुड़ी खबरों का बड़ा असर अब प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में सामने आया है,खबरों के प्रकाशन के बाद उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं,जिला-सूरजपुर ने जिले के कई धान उपार्जन केंद्रों में भौतिक सत्यापन के दौरान भारी मात्रा में धान की कमी पाए जाने पर संबंधित समिति प्रबंधकों एवं धान खरीदी प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं,जारी नोटिसों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि औचक निरीक्षण एवं भौतिक सत्यापन के दौरान हजारों क्विंटल धान कम पाया गया है,जिसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और शासकीय राशि के संभावित दुरुपयोग की श्रेणी में रखा गया है प्रशासन ने इसे हल्के में न लेते हुए सख्त रुख अपनाया है,दैनिक घटती-घटना की खबरों ने एक बार फिर साबित किया है कि सशक्त और जिम्मेदार पत्रकारिता न केवल भ्रष्टाचार को उजागर करती है,बल्कि प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर भी करती है,अब जिले की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोषियों पर वास्तव में सख्त कानूनी कार्रवाई होगी या मामला एक बार फिर फाइलों में दबा दिया जाएगा।
कौन-कौन से प्रभारी अधिकारी निशाने पर हैं-
विकास जायसवाल — सहायक समिति प्रबंधक, धान खरीदी केंद्र प्रभारी, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, टुकुडांड
मोहम्मद रिजवान अंसारी — धान खरीदी केंद्र प्रभारी, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, सावारावां
ठाकुर सिंह मरावी — सहायक समिति प्रबंधक व प्रभारी, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, उमेश्वरपुर
साधना कुशवाह — सहायक समिति प्रबंधक, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, शिवप्रसाद नगर
मोहन राजवाड़े — सहायक समिति प्रबंधक व प्रभारी, आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, सूरजपुर
भौतिक सत्यापन में चौंकाने वाले आंकड़े कारण बताओ नोटिसों के अनुसार जिले के विभिन्न धान उपार्जन केंद्रों में निम्नानुसार भारी कमी सामने आई है—
शिवप्रसादनगर उपार्जन केंद्र – 5552 मि्ंटल धान कम
उमेश्वरपुर उपार्जन केंद्र – 7036.40 मि्ंटल धान कम
सूरजपुर उपार्जन केंद्र – 6610.40 मि्ंटल धान कम
टुड़ूखांड उपार्जन केंद्र – 6412.8 मि्ंटल धान कम
सावरवां उपार्जन केंद्र – 6470 बोरी (2588 मि्ंटल) धान कम इन आंकड़ों ने धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्पष्टीकरण के लिए अंतिम अवसर- प्रशासन द्वारा जारी नोटिसों में संबंधित सहायक समिति प्रबंधकों और धान खरीदी प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि वे 19 जनवरी 2026 को कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें, नोटिस में यह भी साफ किया गया है कि यदि प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
एफआईआर और वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी– नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में शासकीय राशि के दुरुपयोग के आधार पर नजदीकी पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी, छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 एवं नियम 1962, तथा प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं के सेवायुक्तों के लिए जारी सेवा नियम 2018 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी, इस पूरी कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और प्रभारियों की व्यक्तिगत होगी।
पत्रकारिता के दबाव में हरकत में प्रशासन- लगातार खबरों के जरिए धान खरीदी में हो रही गड़बडç¸यों को उजागर किए जाने के बाद प्रशासन की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि अब मामले को दबाने की बजाय जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं, जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता था।
अभी जांच और कार्रवाई का रास्ता बाकी- सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई केवल प्रारंभिक कदम है। स्पष्टीकरण के बाद दोषियों की पहचान, वित्तीय नुकसान का आकलन, और घोटाले में शामिल अन्य जिम्मेदारों की भूमिका की भी गहन जांच की जाएगी, संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी नोटिस, निलंबन अथवा एफआईआर दर्ज हो सकती हैं।
निरीक्षण में क्या मिला- प्रशासन ने बताया कि हालिया निरीक्षण और अभिलेखीय जांच में खरीदी रिकॉर्ड तथा गोदामों में मौजूदा स्टॉक के बीच सुस्पष्ट कमी पाई गई है, निरीक्षण टीम ने टोकन, रिकॉर्ड बुक्स, वाहन चालान और गोदाम इन्वेंट्री का मिलान किया तो कई स्थानों पर परिमाणिक विसंगतियाँ उभरीं जो प्रथम दृष्टि में लापरवाही या अनियमितता का संकेत देती हैं।
प्रशासन की चेतावनी, क्या-क्या हो सकता है- आयुक्त सहकारिता के निर्देशानुसार सभी संबंधित अधिकारियों को औपचारिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित स्पष्टीकरण संतोषजनक न होने पर निम्नलिखित कार्रवाई सम्भव है, अनुशासनात्मक कार्रवाई (रिक्ति/निलंबन/शासनादेश के अनुरूप), वित्तीय वसूली / नुकसान का हिसाब-किताब कर वसूली की कार्यवाही, आवश्यक होने पर आपराधिक प्रवर्तन एजेंसियों को मामले के संबंध में रिपोर्ट कर एफआईआर/अन्य कानूनी कार्रवाई की सिफारिश, प्रशासन ने इस उत्सर्जन में अभी तक किसी पर आरोप पत्र या गिरफ्तारी की सूचना जारी नहीं की है, आगे की कार्रवाई स्पष्टीकरण और जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी।
किसानों व स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया- किसान और स्थानीय समाज के प्रतिनिधियों ने घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है, उनका कहना है कि खरीदी के समय पारदर्शिता सुनिश्चित न होने से किसानों को सीधे नुकसान उठाना पड़ता है खासकर जब धान का भुगतान और प्रमाणिकता रिकॉर्डों पर निर्भर हो, कई किसान प्रतिनिधियों ने निर्देशदाताओं से शीघ्र और पारदर्शी जांच की माँग की है ताकि दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो और पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
जिले में पहले से समस्याएँ- सूरजपुर जिले में पिछले कुछ महीनों से धान खरीदी और स्टॉक संबंधित अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, उन मामलों के प्रकरण अभी किसी न किसी स्तर पर चल रहे हैं या जांच के दायरे में रहे हैं यही कारण है कि प्रशासन ने इस बार कड़ा रुख अपनाया है और त्वरित स्पष्टीकरण माँगा है।
अगला कदम, क्या देखना चाहिए- प्रशासन द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण की समय-सीमा के भीतर आने वाले जवाब और उनकी सत्यता, यदि जांच टीम विस्तृत ऑडिट/ग्रोथ–टोकन मिलान कर रही है तो उसकी रिपोर्ट और उसमें सुझाई गई कार्रवाई, जिले के अन्य खरीदी केंद्रों में भी समान रूप से सत्यापन कराया जाना चाहिए ताकि समस्या सीमित केंद्रों तक ही न रहे, किसानों को भुगतान तथा गोदाम स्टेग की वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता बने, धान खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता किसानों की आय और जिले की खाद्य सुरक्षा दोनों से जुड़ी है, ऐसे मामलों की समय पर, पारदर्शी और प्रभावी जांच न केवल दोषियों को सज़ा दिला सकेगी बल्कि आगे ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए नीतिगत बदलावों की राह भी खोल सकती है, फिलहाल प्रशासन की अगली गतिविधियों और नोटिस का उत्तर मिलने पर ही घटनाक्रम की दिशा स्पष्ट होगी।
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