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बैकुंठपुर@ चुनाव या चयन? कोरिया साहू समाज में पहले तय कर लिया गया अध्यक्ष

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  • लोकतंत्र की जगह तानाशाही? साहू समाज जिलाध्यक्ष चुनाव पर गंभीर सवाल
  • निर्वाचक नामावली में खेल, साहू समाज में फूट के हालात
  • कोरिया जिला साहू समाज चुनाव में मनमानी के आरोप, व्यक्ति विशेष को अध्यक्ष बनाने का षड्यंत्र उजागर
  • साहू समाज जिलाध्यक्ष निर्वाचन पर विवाद, मनचाही निर्वाचक नामावली से तय किया जा रहा परिणाम
  • कोरिया में साहू समाज चुनाव पर सवाल, पारदर्शिता के बजाय सेटिंग का आरोप
  • जिलाध्यक्ष चुनाव से पहले साहू समाज में उबाल, निर्वाचक सूची को लेकर गंभीर आरोप
  • योग्य सदस्यों को मताधिकार से वंचित करने और समर्थकों के नाम जोड़ने का दावा
  • शासकीय पद पर आसीन व्यक्ति को अध्यक्ष बनाने पर समाज में नाराजगी
  • विरोध करने वालों को व्हाट्सऐप ग्रुप से बाहर करने का भी आरोप


-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,16 जनवरी 2026(घटती-घटना)।
कोरिया जिला साहू समाज के जिलाध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित निर्वाचन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही विवादों में घिरती नजर आ रही है,समाज के भीतर से लगातार विरोध के स्वर उठ रहे हैं और गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि एक व्यक्ति विशेष को जिलाध्यक्ष बनाने के उद्देश्य से पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को मनमाने और सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा है, आरोप है कि निर्वाचक नामावली भी उसी हिसाब से तैयार की गई है,ताकि उक्त व्यक्ति के निर्वाचन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो,समाज के जागरूक सदस्यों का कहना है कि साहू समाज जैसे बड़े और संगठित सामाजिक संगठन में इस प्रकार की एकतरफा और पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाती है,बल्कि समाज को भीतर से कमजोर करने का काम भी करती है। इसी कारण समाज के भीतर असंतोष,आक्रोश और विभाजन की स्थिति बनती जा रही है।
व्यक्ति विशेष के अनुरूप बनाई गई निर्वाचक नामावली का आरोप
समाज के लोगों का आरोप है कि जिलाध्यक्ष पद के निर्वाचन हेतु जारी निर्वाचक नामावली में केवल उन्हीं लोगों को मतदाता बनाया गया है, जो एक खास व्यक्ति के समर्थन में मतदान करने के लिए सहमत हैं, इसके विपरीत,ऐसे कई योग्य और सक्रिय समाजजनों को सूची से बाहर कर दिया गया है, जिनके मतदान से परिणाम प्रभावित हो सकता था, इतना ही नहीं,आरोप है कि मूल निर्वाचक सूची के साथ एक पूरक सूची भी जोड़ी गई है,जिसका उद्देश्य भी केवल उसी व्यक्ति के पक्ष में मतों की संख्या बढ़ाना है,समाज के लोगों का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया पहले से तय रणनीति के तहत की गई है,जिससे अध्यक्ष पद का परिणाम पहले ही सुनिश्चित किया जा सके।
शासकीय पद पर आसीन व्यक्ति की दावेदारी पर आपत्ति
समाज के भीतर यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जा रहा है कि जिस व्यक्ति को जिलाध्यक्ष बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है, वह वर्तमान में एक शासकीय एवं अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर आसीन हैं, समाज के लोगों का कहना है कि ऐसे में उन्हें स्वयं ही सामाजिक पद की दावेदारी से पीछे हट जाना चाहिए था, ताकि कोई ऐसा व्यक्ति नेतृत्व संभाल सके, जो समाज के लिए पर्याप्त समय और ऊर्जा दे सके, समाजजनों का मानना है कि शासकीय जिम्मेदारियों के चलते सामाजिक कार्यों और संगठनात्मक दायित्वों का निर्वहन प्रभावी ढंग से कर पाना कठिन होगा, जिससे अंततः समाज को ही नुकसान उठाना पड़ सकता है।
योग्य, निष्पक्ष और समय देने वाले अध्यक्ष की मांग…
विरोध कर रहे समाज के लोगों का स्पष्ट कहना है कि साहू समाज में नेतृत्व क्षमता किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है,समाज में अनेक ऐसे योग्य, अनुभवी और समर्पित लोग मौजूद हैं,जो समाज को नई दिशा दे सकते हैं,समाज का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति को मिलना चाहिए,जो न केवल योग्य हो बल्कि समाज के कार्यक्रमों,समस्याओं और विकास कार्यों के लिए पर्याप्त समय भी दे सके,इसी क्रम में समाज के कुछ वर्गों द्वारा सुभाष साहू जैसे व्यक्तियों को नेतृत्व सौंपने की मांग भी उठ रही है, समाज का मानना है कि नए और सक्रिय नेतृत्व से संगठन को मजबूती मिलेगी और समाज हित में बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे।
वाट्सएप समूह से निष्कासन और एकतरफा कार्रवाई का आरोप
समाज के कुछ सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि जो लोग इस कथित मनमानी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं,उन्हें समाज के आधिकारिक या अनौपचारिक व्हाट्सऐप समूहों से बाहर किया जा रहा है,विरोध करने वालों पर एकतरफा कार्रवाई की जा रही है,जिससे असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, समाज के लोगों का कहना है कि यह रवैया संगठनात्मक अनुशासन नहीं,बल्कि तानाशाही प्रवृत्ति को दर्शाता है।
पारदर्शी और निष्पक्ष निर्वाचन की मांग ने पकड़ा जोर
इन तमाम आरोपों के बीच समाज में पारदर्शी और निष्पक्ष निर्वाचन की मांग तेज होती जा रही है। समाज के लोगों का कहना है कि निर्वाचक नामावली को निरस्त कर नए सिरे से तैयार किया जाए और समाज के प्रत्येक पात्र सदस्य को मतदाता बनने का अवसर दिया जाए, लोगों का साफ कहना है कि अध्यक्ष कोई भी बने,लेकिन प्रक्रिया निष्पक्ष,पारदर्शी और लोकतांत्रिक होनी चाहिए,तभी समाज में विश्वास और एकता बनी रह सकती है,अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदेश स्तर पर समाज की इकाई इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या कोरिया जिला साहू समाज को एक निष्पक्ष,विवादमुक्त और सर्वमान्य नेतृत्व मिल पाता है या नहीं।
समन्वय समिति को लेकर भी विवाद
समाज के लोगों का यह भी कहना है कि इससे पूर्व समन्वय समिति के माध्यम से अध्यक्ष पद पर कब्जा करने का प्रयास किया गया था,आरोप है कि 27 दिसंबर को गठित समन्वय समिति का उद्देश्य भी एक ही व्यक्ति को अध्यक्ष बनाना था और उसी समिति के जरिए उन्हें अध्यक्ष घोषित कर दिया गया। विरोध के बाद मामला प्रदेश स्तर तक पहुंचा,जिसके बाद निर्वाचन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए,अब समाज के लोगों का आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया में भी वही पुराना तरीका अपनाया जा रहा है और अपने समर्थकों को निर्वाचक नामावली में शामिल कर एक बार फिर अध्यक्ष बनना तय किया जा रहा है।


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