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एमसीबी@खनिज न्यास शासी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न, विकास कार्यों की गहन समीक्षा,नई योजनाओं को मिली दिशा

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स्वास्थ्य मंत्री का सख्त संदेश—जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे तभी होगा खनन,पेयजल और पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता
चिरमिरी व आसपास के क्षेत्रों में पेयजल सुदृढ़ीकरण पर जोर,अमृत जल मिशन को तीव्र गति देने के निर्देश


एमसीबी,15 जनवरी 2026 (घटती-घटना)।
जिला खनिज न्यास संस्थान (डीएमएफ) की अतिरिक्त कार्ययोजना को अंतिम रूप देने तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों के सतत, समग्र और संतुलित विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आज कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभाकक्ष में शासी परिषद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने की, जिले के विकास से जुड़े अनेक अहम मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श के चलते यह बैठक प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और जनहित के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक मानी जा रही है। बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, चिरमिरी नगर निगम के महापौर रामनरेश राय,जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह,नगर पालिका परिषद मनेंद्रगढ़ की अध्यक्ष प्रतिमा यादव,नई लेदरी नगर पंचायत के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह राणा,शासी परिषद के सदस्य, जनप्रतिनिधि,खनिज विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी की सक्रिय सहभागिता ने बैठक के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया।
विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा- बैठक में जिला खनिज न्यास संस्थान की अब तक की गतिविधियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इसमें पूर्व में स्वीकृत योजनाओं की प्रगति, पूर्ण एवं अपूर्ण कार्यों की स्थिति, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, क्षेत्रीय आवश्यकताओं, चुनौतियों और भावी योजनाओं का समग्र मूल्यांकन किया गया। परिषद ने एकमत से माना कि खनन से सबसे अधिक प्रभावित वही क्षेत्र और लोग हैं, जहां से खनिज संपदा निकाली जाती है, इसलिए विकास योजनाओं का पहला अधिकार भी उन्हीं क्षेत्रों और नागरिकों का होना चाहिए, इसी भावना के अनुरूप शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई, सड़क, बिजली, स्वच्छता, आजीविका संवर्धन, कौशल विकास और आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। यह भी स्पष्ट किया गया कि योजनाएं केवल कागजी न रहें, बल्कि उनका वास्तविक और प्रत्यक्ष लाभ गांव-गांव तथा बस्ती-बस्ती तक पहुंचे।
स्वास्थ्य मंत्री के सख्त निर्देश- बैठक का प्रमुख आकर्षण स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के स्पष्ट और सख्त निर्देश रहे। उन्होंने कहा कि खनन कार्य केवल उन्हीं क्षेत्रों में किया जाए, जहां पर्याप्त जलस्रोत उपलब्ध हों और वैज्ञानिक पद्धति से योजना बनाई जाए, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे और स्थानीय नागरिकों की पेयजल व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए कि चिरमिरी और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर सुदृढ़ किया जाए। अमृत जल मिशन के अंतर्गत चल रहे कार्यों को तेज गति से पूरा करने, जलापूर्ति पाइपलाइन, टंकियों, पंपों और जल संरचनाओं के नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुविधाओं पर जोर- शिक्षा विभाग से संबंधित चर्चा में जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत, नए कक्षों का निर्माण, शौचालय, पुस्तकालय, खेल परिसरों और स्मार्ट क्लास जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने पर बल दिया गया, खनन प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने को प्राथमिक लक्ष्य बताया गया, साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन, पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी संचालन तथा मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी गंभीरता से विचार किया गया।सड़क, पुल और परिवहन कनेक्टिविटी- बैठक में सड़क और पुल निर्माण को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया। दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों में कमजोर सड़क संपर्क के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच बाधित होने की बात स्वीकार करते हुए चुटकीपानी क्षेत्र में पुल निर्माण, पिपरिया हाई स्कूल से कुडाकू बस्ती तक सड़क निर्माण तथा आंतरिक ग्रामीण सड़कों के उन्नयन पर सकारात्मक निर्णय लिए गए, परिवहन और रेल संपर्क के क्षेत्र में मनेंद्रगढ़ रेलवे बाईपास मार्ग और चिरमिरी–नागपुर रेलवे लाइन से संबंधित प्रस्तावों को भी प्राथमिकता से आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई, जिससे औद्योगिक विकास के साथ-साथ आम नागरिकों के आवागमन में भी सुविधा मिल सके।
शहरी विकास और नागरिक सुविधाएं- शहरी निकायों से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में विस्तार से विमर्श हुआ। चिरमिरी नगर निगम, मनेंद्रगढ़ नगर पालिका और नगर पंचायतों में स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ करने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को आधुनिक रूप देने, फायर ब्रिगेड सेवाओं को उन्नत उपकरणों से लैस करने और अत्यधिक पुराने वाहनों को कंडम घोषित कर नए वाहनों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए, साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों की स्थापना, पुलिस विभाग के भवनों और संसाधनों को सुदृढ़ करने, स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने तथा नई लेदरी में पशु औषधालय के समीप पुस्तकालय निर्माण जैसे प्रस्तावों पर भी गंभीरता से विचार किया गया।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर- बैठक में पूर्व में स्वीकृत कार्यों की नियमित ऑडिट व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने पर सहमति बनी, कलेक्टर डी. राहुल वेंकट ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और जन अपेक्षाओं के अनुरूप हों। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना को केवल औपचारिकता बनाकर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उसकी उपयोगिता और दीर्घकालिक प्रभाव पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी, स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि खनिज संपदा प्रकृति की अमूल्य धरोहर है और इससे प्राप्त संसाधनों का पहला लाभ खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने युवाओं के लिए कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया।
अतिरिक्त कार्ययोजना को मिली सैद्धांतिक स्वीकृति- लंबी चर्चा, विभागीय प्रस्तुतियों और जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर जिला खनिज न्यास संस्थान की अतिरिक्त कार्ययोजना को सिद्धांततः स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक के समापन पर यह विश्वास व्यक्त किया गया कि प्रस्तावित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास की गति तेज होगी और खनन प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों के जीवन स्तर में ठोस सुधार आएगा, इस अवसर पर डीएमएफ सदस्य दुर्गेश पाण्डेय, सुरेश श्रीवास्तव, अशोक श्रीवास्तव, संत कुमार, नरेन्द्र सिंह, सुनिता सिंह, प्रेम नारायण सिंह, रामाशंकर सिंह, पुलिस अधीक्षक श्रीमती रत्ना सिंह, वनमंडल अधिकारी मनीष कश्यप, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती अंकिता सोम, अपर कलेक्टर श्रीमती नम्रता डोंगरे, जनपद सीईओ सुश्री वैशाली सिंह सहित सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे, बैठक सकारात्मक ऊर्जा, जनसेवा की प्रतिबद्धता और जिले के समग्र विकास के मजबूत संकल्प के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।


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