- युवाओं को साजिशन कर्ज¸ के दलदल में धकेलने का दावा, खाते हो रहे एनपीए
- यूको बैंक बैकुंठपुर प्रकरण: पूर्व प्रकाशित खबरों के बाद नए दावे, कर्मचारियों पर दबाव और लोन अनियमितताओं के आरोप
- मुद्रा लोन विवाद गहराया, पूर्व खबरों के बाद अब कर्मचारी दबाव और खाते से कर्ज¸ भरवाने के दावे
- यूको बैंक बैकुंठपुर पर फिर सवाल, सूत्रों के नए खुलासे, कर्मचारी भी दबाव में होने का दावा
- पूर्व रिपोर्टों के बाद बढ़ी हलचल, यूको बैंक में कर्मचारियों पर दबाव के आरोप
- मुद्रा लोन मामला: पहले युवाओं पर बोझ, अब कर्मचारियों पर दबाव?
- यूको बैंक बैकुंठपुर: पुराने आरोपों के बाद नए दावे, जांच की मांग तेज
- कारपेंटर को जरूरत 3 लाख की, लोन 8 लाख का कर्मचारी के खाते से कर्ज¸ भरवाने के कथित प्रयास, सूत्रों के हवाले से दावा
- यूको बैंक बैकुंठपुर प्रकरण में सूत्रों के नए दावे, जांच के दायरे में मामला





-न्यूज डेस्क-
बैकुण्ठपुर,15 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। बैकुंठपुर स्थित यूको बैंक की शाखा से जुड़ा मुद्रा लोन प्रकरण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है, इस विषय पर दैनिक घटती-घटना द्वारा पूर्व में कई खबरें प्रकाशित की जा चुकी हैं,जिनमें युवाओं को कथित रूप से नियमों के विपरीत लोन दिए जाने, खातों के एनपीए होने और बैंक प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे,इन्हीं पूर्व प्रकाशित खबरों की कड़ी में अब कर्मचारियों पर दबाव बनाए जाने और कर्मचारी के खाते से बैंक का कजऱ् भरवाने के कथित प्रयास जैसे नए दावे सामने आ रहे हैं,स्पष्ट किया जाता है कि इस समाचार में उल्लिखित सभी तथ्य सूत्रों के हवाले से हैं, कोरिया जिले के बैकुंठपुर स्थित यूको बैंक इन दिनों मुद्रा लोन को लेकर गंभीर आरोपों और सनसनीखेज खुलासों के कारण चर्चा में है,सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारियों के अनुसार, बैंक प्रबंधन से जुड़े कुछ लोग कथित रूप से संगठित तरीके से युवाओं को क़र्ज़ के जाल में फंसा रहे हैं,जिसके चलते बड़ी संख्या में खाते एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट) बनते जा रहे हैं,महत्वपूर्ण नोट इस समाचार में लगाए गए सभी आरोप सूत्रों पर आधारित हैं, मामले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पूरा प्रकरण जांच के दायरे में है, बैकुंठपुर यूको बैंक से जुड़ा यह मामला केवल लोन अनियमितता का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, बैंकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता, और नियमों के खुले उल्लंघन से जुड़ा गंभीर सवाल बन गया है, अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वतंत्र जांच या ऑडिट कब बैठती है, और क्या सच में मुद्रा लोन के नाम पर रची गई इस कथित साजिश की परतें खुलती हैं या नहीं।
जांच के भरोसे पूरा मामला
इस पूरे प्रकरण को लेकर दैनिक घटती-घटना लगातार खबरें प्रकाशित कर रही है,अख़बार स्पष्ट करता है कि सारी जानकारियां सूत्रों के हवाले से हैं, अख़बार स्वयं किसी आरोप की पुष्टि नहीं करता,और मामला पूरी तरह जांच के अधीन है,लेकिन सूत्रों का दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई,तो मुद्रा लोन से जुड़ी कई अनियमितताएं उजागर होंगी।
18 साल पूरा होते ही लोन, पैन कार्ड भी नहीं था- सूत्रों के अनुसार, बैंक ने ऐसे युवक को भी मुद्रा लोन स्वीकृत कर दिया,जिसकी उम्र महज 18 वर्ष थी, जिसके पास पैन कार्ड तक नहीं था, और जिसकी मासिक आमदनी कथित तौर पर करीब 6,000 रुपये बताई जा रही है, बताया जा रहा है कि पैन कार्ड किसी अन्य व्यक्ति के मोबाइल नंबर से बनवाया गया और उसी आधार पर युवक के नाम पर 10 लाख रुपये तक का मुद्रा लोन स्वीकृत कर दिया गया। लोन की राशि का उपयोग युवक ने नहीं, बल्कि कथित रूप से एक गिरोह ने किया, जबकि कर्ज¸ युवक के सिर चढ़ गया और अब उसका खाता एनपीए बनने की कगार पर है।
जरूरत 2 लाख की, लोन 10 लाख का- सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि जिन युवाओं को 2–3 लाख रुपये की जरूरत थी, उन्हें 8–10 लाख रुपये तक का मुद्रा लोन दिलाया गया, जब किश्तें नहीं पटीं, तो कथित तौर पर बैंक की ओर से दबाव बनाया गया, आरोप है कि व्यापार की समझ न रखने वाले 18–20 वर्ष के युवाओं को ही इस तरह निशाना बनाया गया।
‘पीयूष’ नाम के व्यक्ति के जरिए फंसाने का आरोप- सूत्रों के अनुसार, बैकुंठपुर के एक पीयूष नामक व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जो युवाओं को लोन के लिए तैयार करता था, दस्तावेजों की व्यवस्था कराता था, और लोन की राशि का कथित उपयोग तीसरे पक्ष द्वारा कराया जाता था, आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में बैंक मैनेजर और उनके भाई की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
कर्मचारियों पर दबाव और कर्ज¸ भरवाने के कथित प्रयास? सूत्रों के दावे, पूरा मामला जांच के दायरे में- बैकुंठपुर स्थित यूको बैंक से जुड़े मुद्रा लोन प्रकरण में अब बैंक कर्मचारियों पर दबाव और कर्मचारी के खाते से कर्ज¸ भरवाए जाने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आ रहे हैं, ये जानकारियां सूत्रों के हवाले से सामने आई हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पूरा मामला फिलहाल जांच के अधीन बताया जा रहा है, सूत्रों के अनुसार, बैंक के एक कर्मचारी के परिचित कारपेंटर को लगभग 3 लाख रुपये की आवश्यकता थी, लेकिन कथित तौर पर उसके नाम पर 8 लाख रुपये का मुद्रा लोन स्वीकृत कर दिया गया, बाद में जब लोन की किश्तें समय पर नहीं चुकाई जा सकीं, तो दावा किया जा रहा है कि बैंक का कर्ज¸ कर्मचारी के खाते से भरवाने का दबाव बनाया गया, कर्मचारी को बैंक आने से रोका गया सूत्रों का यह भी कहना है कि उक्त कर्मचारी को पहले बैंक आने से मना किया गया, लगभग एक महीने तक वह कर्मचारी काम पर नहीं आ सका, और जब इस प्रकरण से जुड़ी खबरें प्रकाशित होने लगीं, तब उसे दोबारा बैंक बुलाया गया, सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी को दोबारा बुलाकर कथित तौर पर यह कहा गया कि मेडिकल लगा दो, सब कुछ क्लियर कर दिया जाएगा, आरोप है कि यह सब इसलिए किया गया ताकि कर्मचारी बैंक के अंदर हुई कथित अनियमितताओं के बारे में पत्रकारों या बाहरी लोगों को जानकारी न दे, और मामला सार्वजनिक रूप से आगे न बढ़े।
खबरों के बाद दस्तावेज ‘दुरुस्त’ करने की कोशिश?– सूत्रों का दावा है कि जैसे ही इस मामले में खबरें प्रकाशित होनी शुरू हुईं, बैंक मैनेजर लगातार बैंक में बैठकर दस्तावेज सुधारने में जुट गए, हालांकि सूत्र यह भी कह रहे हैं कि दस्तावेज बदले जा सकते हैं, लेकिन ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, खुले हुए लोन खाते, और एनपीए की एंट्री को मिटाना आसान नहीं है।
स्वतंत्र ऑडिट की मांग- सूत्रों का दावा है कि यदि इस बैंक में स्वतंत्र ऑडिट बैठा दी जाए, और वर्तमान प्रबंधक के कार्यकाल में स्वीकृत सभी मुद्रा लोन फाइलें खोली जाएं, तो कई बड़े राज सामने आ सकते हैं और अनेक लोग खुलकर सामने आने को तैयार हैं।
रसूख का सवाल: काली फिल्म और सायरन वाली स्कॉर्पियो- एक और चौंकाने वाला आरोप यह भी है कि बैंक मैनेजर के भाई काली फिल्म लगी स्कॉर्पियो में सायरन बजाते हुए शहर में घूमते देखे गए, जबकि निजी वाहन में काली फिल्म और बिना अधिकार सायरन का उपयोग कानूनी अपराध है, ऐसे में सवाल उठता है कि यह रसूख आखिर आया कहां से?
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