- ‘इलाज एक,रेट अनेक’ पर सरकार का एक्शन,निजी अस्पतालों की मनमानी पर लगेगी लगाम
- महंगी जांच से मिलेगी राहत,निजी अस्पतालों में सरकारी दर पर होगी सीटी-स्कैन व अन्य जांच
- दैनिक घटती-घटना की मुहिम रंग लाई,स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े बदलाव की तैयारी…
- स्वास्थ्य नहीं,मुनाफाखोरी पर लगेगी लगाम! निजी अस्पतालों पर सरकार का शिकंजा…
- रेट लिस्ट अनिवार्य 7 मनमानी वसूली पर कार्रवाई 7 गरीबों को राहत…


-न्यूज डेस्क-
रायपुर,15 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों से की जा रही मनमानी वसूली और निजी अस्पतालों में जांचों की बेतहाशा दरों को लेकर दैनिक घटती-घटना द्वारा प्रकाशित खोजी रिपोर्ट‘इलाज एक,रेट अनेक!’ने स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर कर रख दिया है, रिपोर्ट में सामने आया था कि एक ही मशीन, एक ही जांच और एक ही प्रक्रिया के बावजूद सरकारी और निजी अस्पतालों में जांच की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर है, जिसका सीधा बोझ गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों पर पड़ रहा है,रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है,छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े और निर्णायक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी गई है।
दैनिक घटती-घटना द्वारा प्रकाशित खोजी रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था का वह चेहरा उजागर किया,जिसमें इलाज से पहले मरीज की जेब का इलाज किया जाता है, अब सरकार ने निजी अस्पतालों में जांच दरें तय करने की बात कही है,लेकिन ज़मीनी हकीकत और नीति के बीच अब भी कई बड़े सवाल खड़े हैं,स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने निजी अस्पतालों में सरकारी दर लागू करने की मंशा जाहिर की है,सवाल यह है, क्या यह घोषणा कागजों से निकलकर जमीन पर उतरेगी? दैनिक घटती-घटना ने सवाल उठाए हैं, अब सरकार की बारी है जवाब देने की, घोषणा से आगे बढ़कर,ठोस नियम,सख्त निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था अगर लागू नहीं हुई, तो यह भी एक और अधूरी घोषणा बनकर रह जाएगी—और मरीज फिर हार जाएगा।
खबर का असरः सरकार ने मानी समस्या,समाधान की ओर कदम…
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस मुद्दे पर तत्परता दिखाते हुए स्पष्ट किया कि सरकार प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को बेहतर,सस्ती और पारदर्शी स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है,उन्होंने कहा हम सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ-साथ निजी अस्पतालों में होने वाली जांचों की दरें भी तय करने जा रहे हैं, हमारा प्रयास है कि किसी भी मरीज को इलाज या जांच के लिए आर्थिक शोषण का शिकार न होना पड़े।
निजी अस्पतालों में भी सरकारी दर लागू करने की तैयारी…
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों में सीटी-स्कैन, एक्स-रे,सोनोग्राफी,एमआरआई, ब्लड टेस्ट सहित प्रमुख जांचें सरकारी दरों के अनुरूप कराए जाने की दिशा में काम किया जा रहा है,इसके लिए सभी निजी अस्पतालों व लैबों को रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करनी होगी,तय दरों से अधिक शुल्क लेने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, स्वास्थ्य विभाग नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग करेगा।
जांच दरों में भारी अंतर बना था सवाल…
दैनिक घटती-घटना की रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकारी अस्पतालों में जहां सीटी-स्कैन,एमआरआई जैसी महंगी जांचें बेहद कम शुल्क या आयुष्मान/बीपीएल कार्ड पर मुफ्त होती हैं, वहीं निजी अस्पतालों में इन्हीं जांचों के लिए हजारों से लेकर पंद्रह-बीस हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। मजबूरी में मरीज निजी अस्पतालों का रुख करता है और इलाज से पहले ही कर्ज के बोझ तले दब जाता है।
आयुष्मान योजना के बावजूद लूट के आरोप…
रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ था कि आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज योग्य होने के बावजूद कई निजी अस्पताल मरीजों को बाहर की जांचें लिखते हैं,जिससे मरीज को दोहरी मार झेलनी पड़ती है,एक तरफ बीमारी,दूसरी तरफ आर्थिक संकट।
सवाल 1
जब मशीन एक,जांच एक…तो दरें अलग क्यों?
अगर सरकारी और निजी अस्पतालों में मशीन वही,तकनीक वही,प्रक्रिया वही तो फिर सरकारी अस्पताल में सीटी-स्कैन 500 और निजी में 10,000 तक क्यों? क्या यह सीधी-सीधी मरीज की मजबूरी का फायदा उठाना नहीं है?
सवाल 2
निजी अस्पतालों की जांच दरें अब तक अनियंत्रित क्यों रहीं?-
अब तक निजी अस्पतालों और लैबों की जांच दरों पर, कोई सख्त नियंत्रण नहीं,कोई प्रभावी निगरानी तंत्र नहीं,कोई पारदर्शी रेट सिस्टम नहीं क्या स्वास्थ्य विभाग इस लूट से अनजान था या जानकर नजरअंदाज करता रहा?
सवाल 3
आयुष्मान योजना के बावजूद बाहर की जांच क्यों?
आयुष्मान योजना के तहत इलाज मुफ्त है,फिर भी,मरीजों को बाहर की महंगी जांच लिखी जाती है,निजी लैबों से मिलीभगत के आरोप लगते हैं क्या आयुष्मान योजना का दुरुपयोग निजी अस्पताल कर रहे हैं? और यदि हाँ, तो अब तक कितनों पर कार्रवाई हुई?
सवाल 4
रेट लिस्ट अनिवार्य होगी—लेकिन लागू कैसे होगी?
सरकार कहती है कि निजी अस्पतालों को रेट लिस्ट लगानी होगी लेकिन सवाल है कौन जांचेगा? कितनी बार निरीक्षण होगा? शिकायत पर कितने दिन में कार्रवाई होगी? या यह भी सिर्फ एक निर्देश बनकर रह जाएगा?
सवाल 5
तय दर से ज्यादा वसूली पर सजा क्या होगी?
अगर कोई निजी अस्पताल तय दर से ज्यादा शुल्क वसूलता है तो क्या होगा? जुर्माना? लाइसेंस रद्द? आयुष्मान से बाहर? या फिर ‘चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा ‘?
सवाल 6
सरकारी अस्पतालों की हालत कब सुधरेगी?-
निजी अस्पतालों की दरें तय करना जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी है सरकारी अस्पतालों में मशीनें चालू रहें,डॉक्टर और तकनीशियन उपलब्ध हों,जांच के लिए हफ्तों इंतजार न करना पड़े क्या सरकार अपनी व्यवस्था सुधारने के लिए भी उतनी ही गंभीर है?
सवाल 7
यह फैसला कब से लागू होगा?
घोषणाएं पहले भी बहुत हुई हैं,अब जनता जानना चाहती है स्पष्ट तारीख क्या है? नियमावली कब जारी होगी? जिले स्तर पर कौन जिम्मेदार होगा? या यह भी ‘तैयारी में है’ कहकर टाल दिया जाएगा?
सवाल 8
क्या स्वास्थ्य सेवा अब भी मुनाफे का बाजार बनी रहेगी?
स्वास्थ्य सेवा व्यापार नहीं,विलासिता नहीं,बल्कि मूल अधिकार है तो सवाल सीधा है क्या सरकार निजी अस्पतालों को मरीज नहीं,इंसान समझने के लिए मजबूर करेगी?
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