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बलौदाबाजार@छत्तीसगढि़या क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल गिरफ्तार,कोर्ट ने दो दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

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बलौदाबाजार,14 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार में हुई भीषण हिंसा और आगजनी के मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढि़या क्रांति सेना के अध्यक्ष और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के संस्थापक अमित बघेल को गिरफ्तार कर लिया है। बघेल पर आरोप है कि 10 जून 2024 को कलेक्ट्रेट परिसर में जो उपद्रव और आगजनी हुई थी,उसमें उन्होंने मुख्य साजिशकर्ता या महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
गिरफ्तारी के बाद
राजनीतिक साजिश का आरोप

बुधवार को पुलिस अमित बघेल को रायपुर जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लेकर बलौदाबाजार कोर्ट पहुंची। अदालत में पेशी के बाद उन्हें दो दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। अपनी गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित बघेल ने इसे सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस की मिलीभगत करार दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह सरकार छत्तीसगढि़या अस्मिता के लिए लड़ने वालों को कुचलना चाहती है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने आंदोलन का समर्थन किया था,लेकिन हिंसा और आगजनी से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
जैतखाम के अपमान से भड़का था जन-आक्रोश
इस पूरे विवाद की जड़ 15 मई 2024 की रात से जुड़ी है। सतनामी समुदाय के परम पूज्य धार्मिक स्थल गिरौदपुरी धाम के पास स्थित मानाकोनी की बाघिन गुफा में स्थापित जैतखाम (धार्मिक प्रतीक) को कुछ शरारती तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। इस घटना ने पूरे समाज को उद्वेलित कर दिया। समाज के हजारों लोग कलेक्ट्रेट के पास दशहरा मैदान में एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। उनकी मांग थी कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
पुलिस की कार्रवाई और जनता का अविश्वास
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, प्रदर्शनकारी इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं थे। समाज का आरोप था कि पुलिस असली अपराधियों को बचा रही है और निर्दोषों को बलि का बकरा बना रही है। लगातार बढ़ते दबाव के बाद, 9 जून 2024 को छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन से कलेक्ट्रेट में मचे तांडव तक
10 जून को सतनामी समाज ने जिला प्रशासन की अनुमति से एक बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया था। शुरुआत में आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन देखते ही देखते भीड़ बेकाबू हो गई। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई और स्थिति नियंत्रण से बाहर निकल गई। उग्र भीड़ ने कलेक्ट्रेट और एसपी दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ की और वहां खड़ी दर्जनों गाडि़यों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचाया गया।
भारी आगजनी और सरकारी दस्तावेजों का नुकसान
उपद्रवियों ने इस हिंसा में 75 बाइक, 20 कारें और 2 दमकल वाहनों को जला दिया। कलेक्ट्रेट परिसर धुएं के गुबार से भर गया और कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज जलकर खाक हो गए। एक चौंकाने वाली घटना में,कलेक्ट्रेट के ध्वजारोहण पोल पर सफेद रंग का ध्वज लगा दिया गया। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी और आम नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कड़े निर्देश के बाद अब तक कई नेताओं और उपद्रवियों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।


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