जगदलपुर,10 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने जगदलपुर में कहा कि,मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का मजदूर विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदर्शों पर कुठाराघात है। मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है। केंद्र सरकार ने सुधार के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है। अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाले अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। नया फ्रेमवर्क ने इसे एक कंडीशनल,केंद्र कंट्रोल की जाने वाली स्कीम में बदल दिया है। मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज,काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था।
12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को किया खत्म
लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को भी खत्म कर दिया। दो दशकों से मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफलाइन रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक सुरक्षा के तौर पर जरूरी साबित हुआ है। अब तक मनरेगा मजदूरों को काम देने का कानून था,श्रमिक अधिकार पूर्वक मांग करते जिसे योजना में परिवर्तित कर दिया गया। अब इसे चलाना नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा। मनरेगा के तहत,सरकारी ऑर्डर से कभी काम नहीं रोका गया। नया सिस्टम हर साल तय टाइम के लिए जबरदस्ती रोजगार बंद करने की इजाजत देता है, जिससे राज्य यह तय कर सकता है कि गरीब कब कमा सकते हैं और कब उन्हें भूखा रहना होगा। एक बार फंड खत्म हो जाने पर, या फसल के मौसम में, मजदूरों को महीनों तक रोजगार से दूर रखा जा सकता।
अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60-40 का हो जाएगा…
दीपक बैज ने कहा कि, मनरेगा केंद्रीय कानून था। 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार भेजती थी। अब केंद्र और राज्य का हिस्सा 60 – 40 का हो जाएगा। पहले मैचिंग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य जमा करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगी। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा,वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी। अब राज्यों पर जी राम जी का लगभग 50 हजार करोड़ का बोझ डालना चाहती है, उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसी मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी। इसलिए ये बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है। कांग्रेस ने कहा कि, 100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नहीं दिया जा रहा है। पिछले 11 सालों से भाजपा सरकार है, मनरेगा में काम देने का राष्ट्रीय औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 साल में मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन काम नहीं दे पाई।
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