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दंतेवाड़ा@दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों का आत्मसमर्पण

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1.19 करोड़ के हैं इनामी,सालों तक फैलाई हिंसा अब डाल दिए हथियार
दंतेवाड़ा,09 जनवरी 2026I छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 63 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इनमें 18 महिला नक्सली भी शामिल है। कुल 36 नक्सलियों पर 1 करोड़ 19 लाख रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है। इनमें नक्सली दंपती 8-8 लाख रुपए के इनामी हैं। ये सारे नक्सली पिछले कई सालों से नक्सल संगठन के साथ जुड़कर काम कर रहे थे। वहीं अब इन्होंने नक्सल हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और दंतेवाड़ा पुलिस के सामने पहुंचकर हथियार डाल दिए हैं। सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों में 7 नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपए का इनाम घोषित है। जबकि, 7 नक्सलियों पर 5 लाख, 8 पर 2 लाख, 11 नक्सलियों पर 1 लाख और 50 हजार रुपए के 3 इनामी नक्सली शामिल हैं।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में कालाहांडी और पश्चिम
बस्तर के प्रमुख शामिल

सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों में कालाहांडी एरिया कमेटी सचिव, पश्चिव बस्तर डिवीजन ष्ठङ्कष्टरू,्रष्टरू जैसे बड़े कैडर्स के नक्सली शामिल हैं। ये सारे नक्सली पिछले कई सालों से माओवाद संगठन के साथ जुड़कर काम कर रहे थे। अब हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और सरेंडर कर दिए हैं। दंतेवाड़ा के स्क्क गौरव राय ने कहा कि, सरकार की पुनर्वास नीति के तहत इन सभी नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ा और मुख्य धारा में लौट आए हैं। नक्सल संगठन में पिछले कई सालों तक ये सक्रिय रहे हैं। एंबुश लगाना, रेकी करना, जवानों पर हमला जैसी कई वारदातों में ये शामिल रहे हैं।
31 मार्च 2026 है नक्सल मुक्त बस्तर बनाने की डेडलाइन : बस्तर में नक्सलवाद खत्म करने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर बनाने की डेडलाइन तय की है। अब इस तारीख तक सिर्फ 90 दिन बचे हैं। 2025 में नक्सलवाद पर बड़ा अभियान चलाया गया। पिछले 40 वर्षों से बस्तर में सक्रिय नक्सलियों का प्रभाव अब लगभग समाप्त हो गया है। डेढ़ साल में कुल 23 बड़े नक्सली मारे गए हैं। इनमें सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा,नक्सल संगठन सचिव बसवाराजू,गणेश उइके सहित 16 बड़े नक्सली शामिल हैं। भूपति,रूपेश और रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं।
शांति और विकास की ओर बस्तर का ऐतिहासिक मोड़ : सीएम साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की स्पष्ट,बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रमाण है कि ‘बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान हैं। ‘ मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का प्रभावी विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों में अब तेज़ी से सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था दी जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर अब भय नहीं, भविष्य की भूमि बन रहा है. जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक स्वर्णिम कल की नींव रख रहे हैं।


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