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सुकमा@सुकमा में 26 नक्सलियों का बड़ा आत्मसमर्पण

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65 लाख के इनामी माओवादियों ने छोड़ी हिंसा


सुकमा,07 जनवरी 2026। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में लाल आतंक के खिलाफ सुरक्षाबलों को एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। मंगलवार को नक्सलवाद का दामन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लेते हुए 26 माओवादियों ने पुलिस और सुरक्षाबलों के आला अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर करने वालों में 7 महिला नक्सली भी शामिल हैं। प्रशासन के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में से 13 बेहद खूंखार थे, जिन पर कुल मिलाकर 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
‘पूना मार्गेम’ अभियान और पुनर्वास नीति का दिख रहा व्यापक असर
सुकमा पुलिस के अधिकारियों ने इस बड़ी कामयाबी का श्रेय छत्तीसगढ़ शासन की नई ‘नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025’ को दिया है। इसके साथ ही सुकमा पुलिस द्वारा संचालित ‘पूना मार्गेम’ (नई सुबह) अभियान ने भी नक्सलियों के मन को बदलने में अहम भूमिका निभाई है। अति संवेदनशील अंदरूनी क्षेत्रों में पुलिस शिविरों की लगातार स्थापना और विकास कार्यों की पहुँच से नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहे हैं। सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और पुनर्वास नीति के फायदों से प्रभावित होकर इन माओवादियों ने पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण के सामने अपने हथियार डाले।
इनामी नक्सलियों की लंबी फेहरिस्त महिला कैडरों ने भी छोड़ा साथ
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में डिवीजनल कमेटी सदस्य हेमला लखमा (41), कंपनी नंबर सात की सदस्य आसमिता उर्फ कमलू सन्नी (20), रामबत्ती उर्फ संध्या (21) और बटालियन नंबर एक का सदस्य सुंडाम पाले (20) प्रमुख हैं। इन चारों खूंखार नक्सलियों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा, तीन नक्सली ऐसे हैं जिन पर 5-5 लाख रुपये का इनाम है, जबकि अन्य पर 1 लाख से 3 लाख रुपये तक के इनाम घोषित थे। इन सात महिला नक्सलियों के सरेंडर से स्पष्ट है कि अब संगठन के भीतर महिलाओं का भी मोहभंग हो रहा है।
नक्सलवाद के खात्मे की ओर बढ़ते कदमः पुलिस अधीक्षक का बयान
सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने इस मौके पर अन्य सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि अंदरूनी इलाकों में लगातार खुल रहे सुरक्षा कैंपों ने नक्सलियों की सप्लाई लाइन और संचार को ध्वस्त कर दिया है। ग्रामीण अब विकास के साथ जुड़ रहे हैं और नक्सलियों को अब स्थानीय समर्थन मिलना बंद हो गया है।
10 लाख का इनामी डिप्टी कमांडर लाली भी हुआ मुख्यधारा में शामिल
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में सबसे महत्वपूर्ण नाम मुचाकी आयते उर्फ लाली (35 वर्ष) का है। लाली,नक्सलियों की सीआरसी कंपनी नंबर 1 के प्लाटून नंबर दो का डिप्टी कमांडर था, जिस पर शासन ने 10 लाख रुपये का इनाम रखा था। लाली का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद हिंसक रहा है,उस पर 2017 में सोनाबेड़ा-कोरापुट मार्ग पर सुरक्षाबलों के वाहन को आईईडी ब्लास्ट से उड़ाने का आरोप है। इस दर्दनाक हमले में 14 बहादुर जवान शहीद हुए थे। लाली के आत्मसमर्पण को नक्सली संगठन के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी वित्तीय सहायता और सुरक्षा
राज्य सरकार की ‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीडि़त राहत पुनर्वास नीति-2025’ के तहत इन सभी पूर्व माओवादियों को नई जिंदगी शुरू करने के लिए तत्काल सहायता प्रदान की गई है। अधिकारियों ने बताया कि सभी 26 सदस्यों को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, उनके ऊपर घोषित इनाम की राशि और पुनर्वास योजना के अन्य लाभ जैसे घर,शिक्षा और स्वरोजगार की सुविधा भी नियमनुसार दी जाएगी। शासन का लक्ष्य है कि ये लोग समाज का हिस्सा बनकर सम्मानजनक जीवन जी सकें।


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