Breaking News

रायगढ़@तमनार की हिंसा: जब उद्योग के लिए ढाल बनी सरकार और भीड़ के आगे अकेली छोड़ दी गई वर्दी

Share

  • तमनार कोयला खदान: असंतोष पर थोपे गए फैसले का विस्फोट, वर्दी की गरिमा चकनाचूर
  • जनसुनवाई या जनदमन? तमनार में प्रशासन की ज़िद ने पैदा की हिंसा
  • उद्योग के लिए सरकार, भीड़ के सामने वर्दी: तमनार में प्रशासनिक विफलता का नंगा सच
  • तमनार हिंसा का सूत्रधार कौन? असंतोष बोने वाले प्रशासनिक फैसलों की पड़ताल
  • असंतोष की नींव पर खदान: रायगढ़ में गलत जनसुनवाई से भड़का जनआक्रोश
  • जनसुनवाई या जनदमन? तमनार में प्रशासन की जिद ने पैदा की हिंसा
  • जब प्रशासन ने संवाद छोड़ा,तब हिंसा ने जन्म लिया…
  • तमनार की हिंसा ने पूछा सवालः क्या पुलिस को बलि का बकरा बना दिया गया?
  • तमनार चेतावनी हैः असंतोष पर लिया गया हर फैसला अंततः हिंसा बनता है
  • वर्दी की इज्जत गिरवी रखकर विकास? तमनार सरकार के चेहरे पर तमाचा है

न्यूज डेस्क
रायगढ़,04 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के तमनार में हुई हिंसक घटना सिर्फ एक महिला आरक्षक के साथ बर्बरता का मामला नहीं है,बल्कि यह उस पूरी व्यवस्था का आईना है जिसमें उद्योग,पूंजी और सत्ता एक तरफ खड़े हैं और दूसरी तरफ ग्रामीण असंतोष,गुस्सा और टूटता विश्वास,कोयला खदान और सीमेंट फैक्ट्री के विस्तार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान जिस तरह महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ी गई,उसे अर्धनग्न कर भीड़ के बीच घसीटा गया,वह सवाल खड़ा करता है कि क्या सरकार अब उद्योगपतियों की सुरक्षा एजेंसी बनकर रह गई है? और इससे भी बड़ा सवाल,क्या वर्दीधारी अब सत्ता की नीतियों की कीमत अपनी इज्जत से चुका रहे हैं? बता दे की तमनार की हिंसा कोई ‘अचानक भड़की भीड़’ नहीं थी,यह उस लंबे सरकारी अन्याय की परिणति थी,जिसमें उद्योग को प्राथमिकता और जनता को बाधा मान लिया गया,जिस महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ी गई,वह सिर्फ एक पुलिसकर्मी नहीं थी, वह राज्य की प्रतिनिधि थी, और जब राज्य की प्रतिनिधि को भीड़ के सामने असहाय छोड़ दिया गया,तो सवाल यह नहीं कि भीड़ हिंसक क्यों हुई, सवाल यह है कि राज्य इतना निर्लज्ज कैसे हो गया? सरकार ने उद्योग को जमीन दी,पर लोगों को भरोसा नहीं दिया, सरकार ने खदान को मंजूरी दी,पर गांव को जवाब नहीं दिया, सरकार ने मुनाफ़े की फाइलें आगे बढ़ाईं,पर असंतोष की फाइलें दबा दीं, नतीजा गुस्सा उबल पड़ा,और उस गुस्से की ढाल बना दी गई वर्दी,आज सवाल यह नहीं कि ‘पुलिस पर हमला क्यों हुआ?असल सवाल है क्या सरकार ने जानबूझकर पुलिस को जनता और उद्योग के बीच बलि का बकरा बना दिया?अगर हां,तो यह प्रशासनिक विफलता नहीं यह संस्थागत कायरता है,तमनार की घटना एक चेतावनी है, यदि सरकार ने अब भी नहीं समझा कि विकास बिना विश्वास के नहीं होता,तो अगली बार सिर्फ वर्दी नहीं फटेगी लोकतंत्र की साख भी तार-तार होगी।

सरकार की नीति,उद्योग का लाभ और ग्रामीणों का आक्रोश…
तमनार में जो कुछ हुआ,वह अचानक नहीं हुआ,सरकार वर्षों से निजी उद्योगों के लिए भूमि अधिग्रहण कर रही है कोयला खदानें हों या सीमेंट प्लांट,कागजों में यह ‘विकास’ है, लेकिन जमीन पर यह विस्थापन,असंतोष और असुरक्षा बनकर सामने आता है,सवाल साफ है,भूमि अधिग्रहण सहमति की शर्तों पर हो रहा है या मजबूरी की शर्तों पर? क्या ग्रामीणों की आपत्तियाँ सिर्फ फाइलों में दर्ज होकर दम तोड़ देती हैं? क्या चंदे और कॉर्पोरेट दबाव के दम पर असंतोष को जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है? भीड़ बनाम वर्दी : किसकी जिम्मेदारी?
घटना के वीडियो में महिला आरक्षक रो-रोकर ‘भाई छोड़ दो’ कहती दिखती है, यह सिर्फ एक व्यक्ति की बेबसी नहीं, यह पूरी व्यवस्था की बेबसी है, यदि सरकार को पता था कि क्षेत्र में गहरा असंतोष है,तो पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं थी? आंदोलन को संवाद से संभालने की जगह बल प्रयोग की स्थिति क्यों बनाई गई? और सबसे अहम क्या वर्दीधारियों को जानबूझकर आक्रोशित भीड़ के सामने छोड़ दिया गया? यदि ऐसा है, तो यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं,बल्कि नैतिक अपराध है।
जब ‘जनसुनवाई’ जनता की नहीं,फाइलों की हो जाए…
तमनार में जिस तथाकथित जनसुनवाई को आधार बनाकर परियोजना आगे बढ़ाई गई, उसका वीडियो पहले ही वायरल हो चुका है,वीडियो ने साफ दिखा दिया कि चंद चुनिंदा लोगों से बैठक कर, प्रस्ताव पारित कर, औपचारिक जनसुनवाई का तमगा लगा दिया गया,यह सवाल उठता है, क्या प्रशासन जानबूझकर ऐसी जनसुनवाई करता है, ताकि विरोध जिंदा रहे और टकराव बना रहे? क्योंकि यह सभी जानते हैं असंतोष पर लिया गया हर निर्णय अंततः गलत ही साबित होता है।
छत्तीसगढ़ में खदानें और असंतोषः संयोग नहीं,पैटर्न है
आज छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में खदानों को लेकर असंतोष है,सरगुजा, रायगढ़ अन्य खनन प्रभावित क्षेत्र हर जगह एक समान कहानी है सहमति नहीं, सिर्फ कागजी औपचारिकताएं, लेकिन फिलहाल बात रायगढ़ की है, क्योंकि तमनार में जो विस्फोट हुआ, उसकी मुख्य वजह जिला प्रशासन की।

यहीं से शुरू हुआ तमनार का असंतोष
जनसुनवाई के बाद सहमति देने वाली महिलाओं को चप्पलों की माला पहनाई गई, गांव में सामाजिक विभाजन पैदा हुआ, विरोध की चिंगारी भड़की और वही चिंगारी आज पुलिस पर हमले,महिला पुलिसकर्मी को घसीटे जाने, और महिला आरक्षक के साथ हुई शर्मनाक घटना तक पहुंच गई, यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं है, यह प्रशासनिक निर्णयों का प्रत्यक्ष परिणाम है। वर्दी की गरिमा किसने तार-तार की? आज सवाल यह नहीं है कि भीड़ ने हिंसा क्यों की? असल सवाल यह है क्या प्रशासन ने जानबूझकर वर्दी को असंतोष के सामने खड़ा कर दिया? जब हालात विस्फोटक थे,पर्याप्त सुरक्षा क्यों नहीं थी? महिला बल को क्यों असुरक्षित स्थिति में भेजा गया? संवाद की जगह बल की स्थिति क्यों बनाई गई? यदि इसका जवाब नहीं है, तो जिम्मेदारी तय होनी ही चाहिए।
क्या सरकार उद्योग की ‘गुलाम’ हो चुकी है?
आज छत्तीसगढ़ में यह सवाल गांव-गांव में गूंज रहा है,क्या सरकार का काम अब जनता को समझाना नहीं, बल्कि उद्योग के लिए रास्ता साफ करना रह गया है? जब कोई उद्योगपति अपने मुनाफे की सीढ़ी चढ़ता है,तो क्या उसकी हर सीढ़ी के नीचे ग्रामीणों का गुस्सा और वर्दीधारियों की इज्जत कुचली जा रही है?
हिंसा का दोषी कौन?
हिंसा गलत है इसमें कोई दो राय नहीं,लेकिन हिंसा किसने पैदा की, यह सवाल उससे भी ज्यादा जरूरी है,क्या वर्षों से दबा असंतोष विस्फोट नहीं करेगा? क्या संवाद के बजाय दमन हिंसा को जन्म नहीं देता? और क्या हर बार सारा दोष सिर्फ ‘भीड़’ पर डाल देना आसान रास्ता नहीं?
सबसे असहज सवाल…
क्या सरकार ने उद्योग और जनता के बीच जानबूझकर टकराव बनने दिया, ताकि असली सवाल…नीति और चंदे…से ध्यान हट जाए? अगर हां,तो तमनार की हिंसा साजिश नहीं, लेकिन सुविधाजनक चुप्पी का परिणाम जरूर है, विकास तब तक विकास नहीं होता,जब तक वह सम्मान,सुरक्षा और सहमति के साथ न आए, तमनार ने बता दिया,अगर सरकार नहीं सुधरी, तो अगली बार सिर्फ वर्दी नहीं फटेगी, राज्य और जनता के बीच आखिरी भरोसा भी टूट जाएगा।
तमनार कोयला खदानःअसंतोष बोने वाला प्रशासन…हिंसा काटता छत्तीसगढ़…
रायगढ़ जिले का तमनार आज पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय है,चर्चा इसलिए नहीं कि यहां कोई विकास मॉडल खड़ा हो रहा है,बल्कि इसलिए कि यहां असंतोष को जबरन स्वीकार्यता का नाम देकर हिंसा की जमीन तैयार की गई, तमनार कोयला खदान परियोजना का विरोध अचानक नहीं फूटा, यह उस प्रशासनिक हठधर्मिता का परिणाम है,जिसमें ग्रामीणों को संतोष नहीं दिया गया,बल्कि असंतोष के घेरे में खड़ा कर दिया गया।

5 आरोपी गिरफ्तार
महिला पुलिसकर्मी से मारपीट,बदसलूकी और अमानवीय व्यवहार के मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मंगल राठिया, चिनेश खमारी,प्रेमसिंह राठिया, कीर्ति श्रीवास (सभी निवासी ग्राम आमगांव) और वनमाली राठिया निवासी ग्राम झरना शामिल हैं,वहीं 2 फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है, मिली जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र के अंतर्गत सीएचपी चैक,लिबरा में धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सख्त रुख अपनाया लिया है,महिला पुलिसकर्मी के साथ मारपीट, बदसलूकी, अमानवीय, निंदनीय व्यवहार, कपड़ा फाड़ने और अभद्र व्यवहार एवं लूट की गंभीर घटना में शामिल 5 आरोपियों को रायगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है, दो अन्य फरार आरोपियों की पहचान कर ली गई है,जिनकी गिरफ्तारी के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं, अब तक गिरफ्तार हुए आरोपियों में मंगल राठिया,निवासी ग्राम आमगांव,चिनेश खमारी,निवासी-ग्राम आमगांव,प्रेमसिंह राठिया,निवासी ग्राम आमगांव,कीर्ति श्रीवास,निवासी ग्राम आमगांव तथा वनमाली राठिया,निवासी ग्राम झरना शामिल हैं, आरोपियों ने एक महिला आरक्षक पर जानलेवा हमला करते हुए लाठी-डंडों से मारपीट,आपत्तिजनक कृत्य,अमानवीय और निंदनीय व्यवहार,कपड़ा फाड़ने और अभद्र व्यवहार और लूटपाट की घटना को अंजाम दिया गया। जिसके बाद तमनार थाने में आरोपियों के खिलाफ धारा 109,74,76, 296,351(2),115 (2),221,132,309(4),309(6),3(5) भा.न्या.सं. तथा आईटी एक्ट की धारा 67(ए) के अंतर्गत अपराध दर्ज कर मामले की विवेचना की जा रही है।
महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ी,वीडियो भी बनाया
प्रदर्शनकारियों ने महिला आरक्षक के कपड़े फाड़ कर उसका वीडियो भी बनाया। 40 सेकेंड के इस वीडियो में महिला आरक्षक रो-रोकर प्रदर्शनकारियों को भाई बोलकर कहती है कि,मुझे माफ कर दो,छोड़ दो,प्रदर्शनकारी कहते हैं कि, क्या करने आई थी,चप्पल से मारूं अभी। चलो भाग जाओ यहां से,इसके बाद उसे छोड़कर लोग चले जाते हैं, इससे पहले महिला आईटी को लात मारने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
सरकार की मंशा पर सबसे बड़ा सवाल
सरकार ने अब परियोजना पर ‘वापसी’ का संकेत दिया है, फिर भी विरोध खत्म नहीं हो रहा, क्यों? क्योंकि लोगों को लग रहा है कि, यह वापसी असंतोष शांत करने की नहीं, बल्कि विरोध को थकाने की रणनीति है, तमनार सिर्फ रायगढ़ की घटना नहीं है, यह छत्तीसगढ़ के लिए चेतावनी है, अगर प्रशासन संतोष की जगह असंतोष चुनेगा, उद्योग के लिए जल्दबाजी करेगा, और जनता को विश्वास में नहीं लेगा, तो हर तमनार एक नया टकराव पैदा करेगा, और तब वर्दी फिर फटेगी, गरिमा फिर गिरेगी, और सरकार फिर सवालों के कटघरे में खड़ी होगी।

तमनार हिंसा का प्रशासनिक सूत्रधार कौन?
सूत्रों के अनुसार, तमनार जनसुनवाई के दौरान अपुर्ण टोपो, जो वर्तमान में रायगढ़ में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं, इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में रहे, बताया जाता है कि वे एम्बुलेंस में बैठकर जनसुनवाई स्थल पहुंचे, कुछ चुनिंदा लोगों से बैठक कर, सहमति की औपचारिकता पूरी कर और लौट गए, जनता को न सुना गया, न समझाया गया, न भरोसे में लिया गया।
जिम्मेदारी तय करने वाला विश्लेषण
तमनार हिंसा में कौन-कौन जवाबदेह?- यह घटना ‘भीड़ बनाम पुलिस’ नहीं है, यह नीति, प्रशासन और राजनीतिक प्राथमिकताओं की असफलता है।
राज्य सरकार-नीति स्तर की जिम्मेदारी
– क्या भूमि अधिग्रहण से पहले सार्थक ग्राम सभा हुई?
– क्या ग्रामीणों की आपत्तियों को केवल ‘औपचारिक सहमति’ मानकर निपटा दिया गया?
– क्या उद्योग हितों के सामने सामाजिक प्रभाव आकलन को कमजोर किया गया?
जवाबदेही : यदि असंतोष वर्षों से था, तो सरकार ने उसे समय रहते क्यों नहीं सुलझाया?
जिला प्रशासन-फील्ड स्तर की विफलता
– क्या प्रशासन को आंदोलन की तीव्रता का अंदाजा नहीं था?
– क्या पर्याप्त महिला बल, बैरिकेडिंग और संवाद टीम मौजूद थी?
– क्या भीड़ नियंत्रण की योजना सिर्फ कागजों में थी?
जवाबदेही : स्थिति विस्फोटक थी, फिर भी कमजोर सुरक्षा इंतजाम क्यों?
पुलिस नेतृत्व-ऑपरेशनल चूक
– महिला आरक्षक को उचित सुरक्षा घेरे में क्यों नहीं रखा गया?
– क्या उसे फ्रंटलाइन में भेजना आवश्यक था?
– क्या आदेश दबाव में दिए गए?
जवाबदेहीः यदि पुलिस को राजनीतिक निर्णयों का परिणाम झेलना पड़ा, तो यह गंभीर सवाल है।
उद्योग प्रबंधन-नैतिक जिम्मेदारी
– क्या उद्योग ने स्थानीय असंतोष को गंभीरता से लिया?
– क्या सीएसआर और पुनर्वास केवल कागजी थे?
– क्या ‘क्लियरेंस मिल गई’ का मतलब ‘अब जनता अप्रासंगिक’ मान लिया गया?
जवाबदेही : जिस जमीन पर मुनाफ़ा खड़ा हो, वहां के लोगों को दुश्मन मानना अंततः हिंसा को जन्म देता है।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण एक बार फिर ठंड की वापसी

Share -संवाददाता-अम्बिकापुर,22 जनवरी 2026 (घटती-घटना)। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण उत्तर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर …

Leave a Reply