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संपादकीय@क्या चैतन्य बघेल की राजनीति में एंट्री तय?

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जमानत के बाद बढ़ी लोकप्रियता, सोशल मीडिया से सड़कों तक गूंजते नारे
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया सवाल तेज़ी से उभर रहा है…क्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल अब सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं?

लेख: चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद जिस तरह से वे सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने हैं, उसने इस कयास को और बल दिया है, फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम से लेकर व्हाट्सऐप ग्रुपों तक “चैतन्य बघेल जिंदाबाद” के नारे अब केवल डिजिटल स्पेस तक सीमित नहीं दिख रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर भी सुनाई देने लगे हैं, फिलहाल यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि चैतन्य बघेल की राजनीति में एंट्री तय है, लेकिन इतना साफ है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति ने उन्हें नजरअंदाज करना बंद कर दिया है, जमानत के बाद मिली लोकप्रियता, समर्थकों की भावनात्मक प्रतिक्रिया और जमीनी नारों ने यह संकेत दे दिया है कि यदि चैतन्य बघेल राजनीति में उतरते हैं, तो यह केवल पारिवारिक फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होगा, अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में “कका” के साथ “पुत्र” भी राजनीतिक मैदान में अपना जोहार कहता है या नहीं।
जमानत नहीं, समर्थकों की नजर में “न्याय की जीत”
कांग्रेस समर्थकों और बघेल परिवार के करीबियों का मानना है कि केंद्रीय एजेंसियों के तमाम दबावों और कठोर कार्रवाई के बावजूद चैतन्य बघेल को जमानत मिलना न्याय और सत्य की जीत है, उनका तर्क है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति या परिवार का नहीं, बल्कि उस राजनीति का प्रतीक है जिसमें सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने की कीमत चुकानी पड़ती है, इस पूरे दौर को समर्थक “कका के लिए सबसे पीड़ादायक समय” बता रहे हैं, जहां एक पिता के रूप में भूपेश बघेल को मानसिक संघर्ष से गुजरना पड़ा, लेकिन उन्होंने न तो लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता किया और न ही दबाव के आगे झुके।
संघर्ष से सहानुभूति, सहानुभूति से राजनीति?
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह कोई नया फार्मूला नहीं है कि संघर्ष → सहानुभूति → राजनीतिक स्वीकार्यता में बदल जाए, विशेषज्ञ मानते हैं कि चैतन्य बघेल के मामले में भी यही प्रक्रिया दिखाई दे रही है जेल और जांच की प्रक्रिया ने उन्हें पहचान दी, जमानत ने उन्हें नैरेटिव दिया, सोशल मीडिया ने उन्हें मंच दिया यही कारण है कि अब सवाल उठने लगा है, क्या आने वाले समय में भूपेश बघेल के साथ-साथ उनका पुत्र भी मंच साझा करते नजर आएगा?
पिता के साथ पुत्र का जोहार?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि यदि चैतन्य बघेल राजनीति में आते हैं, तो वे केवल “मुख्यमंत्री के बेटे” के रूप में नहीं, बल्कि संघर्ष से निकले चेहरे के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश करेंगे, युवाओं के बीच उनकी बढ़ती लोकप्रियता कांग्रेस के लिए एक नया चेहरा और नया ऊर्जा स्रोत बन सकती है, खासकर तब जब पार्टी नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर सवालों से जूझ रही है, हालांकि, अभी तक न तो चैतन्य बघेल और न ही भूपेश बघेल की ओर से राजनीति में औपचारिक एंट्री को लेकर कोई स्पष्ट बयान आया है।
राजनीतिक विश्लेषण: अवसर भी, जोखिम भी- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चैतन्य बघेल की एंट्री—

अवसर

  • सहानुभूति और युवा समर्थन का लाभ
  • बघेल परिवार की मजबूत राजनीतिक विरासत
  • कांग्रेस को एक नया चेहरा

जोखिम

  • अपेक्षाओं का अत्यधिक दबाव
  • विपक्ष द्वारा “वंशवाद” का हमला
  • कानूनी प्रक्रिया का राजनीतिक इस्तेमाल

रवि सिंह
कोरिया छत्तीसगढ़


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