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खैरागढ़@17 लाख की इनामी महिला नक्सली का सरेंडर

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14 साल सक्रिय रही,पुलिस बलों पर हमले की प्लानिंग में शामिल होती थी…


खैरागढ़,06 नवम्बर2025। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में 17 लाख की इनामी महिला नक्सली ने सरेंडर किया है। कमला सोड़ी उर्फ उंगी उर्फ तरूणा (30 साल) पिछले 14 साल से नक्सली संगठन से जुड़ी थी। वह हार्डकोर नक्सली थी। जिसने 6 नवंबर को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। कमला 3 राज्यों में सक्रिय थी। वह माड़ डिवीजन,बस्तर एमएमसी (मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़) जोन की सक्रिय सदस्य थी और एमएमसी जोन प्रभारी रामदर की टीम में प्रमुख भूमिका निभाती थी। इस दौरान वह कई हिंसक वारदातों और पुलिस बलों पर हमले की योजनाओं में शामिल रही।
साल 2011 में नक्सली संगठन से जुड़ी
कमला सोड़ी मूल रूप से सुकमा जिले के अरलमपल्ली गांव की रहने वाली थी। साल 2011 से प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़ी थी। महाराष्ट्र (गोंदिया जिला) और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय थी। तीनों राज्यों की पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर कुल 17 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।
नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए कर रहे प्रेरित : पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शासन की विकासोन्मुखी नीतियों, ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों, सड़क और संचार सुविधाओं के विस्तार तथा सिविक एक्शन कार्यक्रमों के कारण नक्सल प्रभावित इलाकों में विश्वास का माहौल बन रहा है। सुरक्षा बलों द्वारा निरंतर संवाद और जनसंपर्क से नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी मुहिम से प्रभावित होकर कमला सोड़ी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
सरेंडर करने पर मिला 50 हजार
आत्मसमर्पण के बाद कमला सोड़ी को छत्तीसगढ़ शासन की नीति के तहत तत्काल 50,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। साथ ही, पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। राजनांदगांव आईजी अभिषेक शांडिल्य ने कहा कि यह आत्मसमर्पण शासन की नीतियों और सुरक्षा बलों की निरंतर कोशिशों का नतीजा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कमला सोड़ी का यह कदम अन्य सक्रिय नक्सलियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। यह आत्मसमर्पण शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत हुआ है, जिसे नक्सल उन्मूलन अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।


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