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गरियाबं@छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ में 10 नक्सली ढेर

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इनमें 1 करोड़ का इनामी बालकृष्ण भी शामिल
गरियाबंद,11 सितम्बर 2025। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में गुरुवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। एनकाउंटर में 1 करोड़ के इनामी मोडेम बालकृष्ण समेत 10 नक्सली मारे गए हैं। एसपी निखिल राखेचा ने इसकी पुष्टि की है। मैनपुर थाना क्षेत्र के पहाड़ी इलाके मटाल में ये मुठभेड़ हुई है। रायपुर रेंज के आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि मैनपुर थाना क्षेत्र के जंगल में सुरक्षाकर्मी नक्सल विरोधी अभियान पर थे, तभी उनका सामना नक्सलियों से हो गया और दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि एसटीएफ, कोबरा (सीआरपीएफ की कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन) और राज्य पुलिस के जवान इस अभियान में शामिल थे। आईजी अमरेश मिश्रा ने बताया कि जंगल में नक्सलियों के शव पड़े हुए हैं। आईईडी लगे होने का भी खतरा है। रात में सर्च ऑपरेशन नहीं किया जा सकता। फिलहाल, मुठभेड़ रुक गई है।
ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था बालकृष्ण
गरियाबंद पुलिस ने गुरुवार को मैनपुर के कुल्हाड़ी घाट से लगे पहाड़ी इलाके मटाल में संयुक्त ऑपरेशन चलाया था। सुबह से रुक-रुककर कई घंटे तक मुठभेड़ चली। एनकाउंटर में सेंट्रल कमेटी सदस्य मनोज उर्फ बालन्ना उर्फ मोडेम बालकृष्ण अपने अन्य 9 साथियों के साथ मारा गया। बालकृष्ण के पास ओडिशा राज्य कमेटी के सचिव की जिम्मेदारी थी।
चलपती के मारे जाने के बाद बालकृष्ण को जिम्मेदारी
14 जनवरी को चलपती समेत 16 नक्सलियों के ढेर होने के बाद धमतरी, गरियाबंद और नुआपड़ा डिवीजन कमेटी को विस्तार करने की जिम्मेदारी बालकृष्ण को दी गई थी। यह सूचना पुलिस तक आ चुकी थी। बालकृष्ण की मौजूदगी की पुख्ता सूचना के बाद एसपी निखिल राखेचा ने संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया था।
ओडिशा स्टेट कमेटी
का सचिव था बालकृष्ण

गरियाबंद पुलिस ने गुरुवार को मैनपुर के कुल्हाड़ी घाट से लगे पहाड़ी इलाके मटाल में संयुक्त ऑपरेशन चलाया था। सुबह से रुक-रुककर कई घंटे तक मुठभेड़ चली। एनकाउंटर में सेंट्रल कमेटी सदस्य मनोज उर्फ बालन्ना उर्फ मोडेम बालकृष्ण अपने अन्य 9 साथियों के साथ मारा गया। बालकृष्ण के पास ओडिशा राज्य कमेटी के सचिव की जिम्मेदारी थी।
चलपती के मारे जाने के बाद बालकृष्ण को जिम्मेदारी
14 जनवरी को चलपती समेत 16 नक्सलियों के ढेर होने के बाद धमतरी, गरियाबंद और नुआपड़ा डिवीजन कमेटी को विस्तार करने की जिम्मेदारी बालकृष्ण को दी गई थी। यह सूचना पुलिस तक आ चुकी थी। बालकृष्ण की मौजूदगी की पुख्ता सूचना के बाद एसपी निखिल राखेचा ने संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया था।
चलपती के मारे जाने के बाद बालकृष्ण को जिम्मेदारी
14 जनवरी को चलपती समेत 16 नक्सलियों के ढेर होने के बाद धमतरी, गरियाबंद और नुआपड़ा डिवीजन कमेटी को विस्तार करने की जिम्मेदारी बालकृष्ण को दी गई थी। यह सूचना पुलिस तक आ चुकी थी। बालकृष्ण की मौजूदगी की पुख्ता सूचना के बाद एसपी निखिल राखेचा ने संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया था।
सरेंडर नक्सली की मदद से बालकृष्ण तक पहुंची पुलिस
मोडेम 25 साल से सुरक्षा एजेंसियों के नजरों से बच रहा था। एजेंसियों के पास बालकृष्ण के जवानी की तस्वीर भर थी। 15 दिन पहले ही मनोज के गार्ड कैलाश नाम के नक्सली ने सरेंडर किया था। इसके बाद इस कुख्यात नक्सली के बारे में एजेंसी को कई पुख्ता जानकारी मिली। पुलिस के मुताबिक बालकृष्ण कई साल से शुगर की बीमारी से जूझ रहा था। उसके सर के बाल झड़ गए हैं। उसे चलने के लिए 2 लाठियों का सहारा लेना पड़ता था।
गरियाबंद में जनवरी में 16 नक्सली मारे गए थे
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में इसी साल 14 जनवरी को करीब 80 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें से 12 नक्सलियों पर कुल 3 करोड़ 16 लाख रुपए का इनाम घोषित था। मारे गए नक्सलियों में नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का मेंबर चलपति भी था। चलपति पर ही 90 लाख का इनाम था। वहीं नुआपड़ा-गरियाबंद-धमतरी डिवीजन कमेटी का प्रमुख सत्यम गावड़े भी एनकाउंटर में मारा गया था। यह पहला मौका था जब छत्तीसगढ़ में किसी मुठभेड़ में सेंट्रल कमेटी का सदस्य मारा गया। चलपति ऊर्फ अप्पा राव गरियाबंद के भालूडिग्गी इलाके से ही 3 राज्यों में नक्सल एक्टिविटी को कंट्रोल करता था।


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