- शिक्षा विभाग के एक ऐसे अधिकारी जिन्हें सरगुजा संभाग में ही मिलती है जिम्मेदारी?
- कोरिया जिले में ही बने रहे लगभग चार साल,सबसे लंबा रहा कार्यकाल
- कोरिया जिला शिक्षा अधिकारी को बनाया गया है अब संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा
- विभाग के सबसे जुगाड़ू अधिकारी कहे जा सकते हैं संजय गुप्ता, कांग्रेस शासनकाल में मिला इनाम
–रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 17 दिसम्बर 2022 (घटती-घटना)। कोरिया के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी को मिला संभाग का प्रभार तो उठे कई सवाल,जिला शिक्षा अधिकारी पर किसकी मेहरबानी कि एक ही संभाग में चल रहा है इनका सालों से कार्यकाल? शिक्षा विभाग के एक ऐसे अधिकारी जिन्हें सरगुजा संभाग में ही मिलती है जिम्मेदारी? लगातार संभाग में ही कई पदों पर कार्य करने उपरांत अब बने संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा संभाग, कोरिया जिले में ही बने रहे लगभग चार साल,सबसे लंबा रहा कार्यकाल, कोरिया जिला शिक्षा अधिकारी को बनाया गया है अब संयुक्त संचालक शिक्षा सरगुजा,विभाग के सबसे जुगाड़ू अधिकारी कहे जा सकते हैं संजय गुप्ता, कांग्रेस शासनकाल में मिला इनाम, भाई भी हैं कांग्रेस के बड़े नेता ऐसा भी सूत्रों का है कहना, भाई की बदौलत संभाग में ही मिलती है पदस्थापना,कांग्रेस शासनकाल में संजय गुप्ता पर बरसती रही है मेहरबानियां,जहां जहां खुद जाना चाहे पहुंचते रहे।
कोरिया जिले के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी की पदोन्नति हो गई है और वह सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक शिक्षा बनाये गए हैं लेकिन सवाल यह है कि यह ऐसे अधिकारी हैं जो कई सालों से सरगुजा संभाग के आसपास के जिलों में ही अपनी नौकरी करते आये हैं इन्हें प्रभार भी चाहिए और अपने मन से पदोन्नति भी और अपने मन मुताबिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी का ओहदा भी, साथ ही मन मुताबिक पदस्थापना भी, पर सवाल यहीं खत्म नहीं होता सवाल तो यह भी है कोरिया जिले में रहते हुए इनके समय में जितनी भी योजनाएं शुरू हुई वह बंद भी होते गई, चाहे वह स्मार्ट क्लास की बात हो या फिर पढ़ाई तुह्नर द्वार हो या फिर विद्यालयों में फर्नीचर खरीदी की बात सारे मामलों में इन्होंने सुर्खियां बटोरी अब जाते-जाते इनकी सुर्खी यह भी है कि पदोन्नति तो पा गए पर फिर से संभाग इनसे नहीं छूटा संभाग का मुंह ऐसा कि लगता है कि पूरी नौकरी वह इसी संभाग में करके सेवानिवृत्त होंगे।
संजय गुप्ता कोरिया जिले में लगभग चार साल तक टिके रहे इसके पहले संभाग में ही वह अन्य जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी भी रहे और उनके अब तक के कार्यकाल में उन्हें संभाग से बाहर भेज पाने में विभाग असफल रहा जो अभी हुई पदोन्नति से स्पष्ट हो गया जब उन्हें सरगुजा संभाग का संयुक्त संचालक शिक्षा बनाया गया। बताया जाता है कि अपने भाई के कांग्रेस पार्टी में नेता होने का इनको फायदा मिलता रहा है और इसी वहज से इन्हें उंगलियां रखकर पदस्थापना प्राप्त होती आई है और इसबार पदोन्नति भी और पदस्थापना भी। कोरिया जिले के कार्यकाल के दौरान इनकी उपलब्धियों में कोई विशेष उपलब्धि यदि ढूंढी जाए तो मुश्किल है क्योंकि अधिकांश समय मे इनकी कोई उपलब्धि शिक्षा क्षेत्र में नहीं रही जो देखने को भी मिली। कोरिया जिले में सहायक शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नति को भी इन्होंने अपनी पदोन्नति पश्चात महत्व नहीं दिया और जब सबकुछ पूर्ण हो चुका था पदोन्नति प्रक्रिया में इन्होंने अपनी पदोन्नति के कारण पूरे पदोन्नति प्रक्रिया को छोड़कर पलायन कर लिया और पदोन्नति अब कौन करेगा इसपर संशय खड़ा हो गया।
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