बैकु΄ठपुर@संपादक बैठे भूख हडताल पर,कांग्रेस नेता के चाचा से हैं परेशान

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48 घण्टे बाद भी किसी ने नहीं ली सुध,प्रशासन मौन धारण कर है बैठा हुआ

  • रवि सिंह-

बैकु΄ठपुर 03 अक्टूबर 2021 (घटती-घटना)। अपनी पत्नी के स्वामित्व की जमीन जिसका भुअभिलेखों में भी अखबार के संपादक की पत्नी के नाम से ही स्वामित्व दर्ज है पर बैकुंठपुर जिला मुख्यालय के कांग्रेस नेता के चाचा द्वारा कब्जा किये जाने की शिकायत पर कार्यवाही नहीं होने के मामले को लेकर अखबार के संपादक बैकुंठपुर निवासी वैद्य रमेशचंद्र पिछले 48 घण्टे से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं और जिसकी पूर्व में ही सूचना भी वह प्रशासन को दे चुके हैं,बताया जा रहा है 48 घण्टे बाद भी प्रशासन ने संपादक के भूख हड़ताल मामले में कोई सुध संपादक की नहीं ली वहीं संपादक अपनी पत्नी के स्वामित्व की भूमि को कब्जे से मुक्त कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।
पूरे मामले में जो जानकारी मिल रही है कि कांग्रेस नेता आशीष डबरे के चाचा प्रभाकर डबरे की जमीन वैद्य रमेशचंद्र संपादक की पत्नी के स्वामित्व की जमीन से लगी हुई है वहीं संपादक की पत्नी के स्वामित्व की भूमि के बगल की अपनी ही भूमि में कांग्रेस नेता के चाचा प्रभाकर डबरे अपना घर बना रहें और प्रभाकर डबरे द्वारा अपनी जमीन सहित संपादक की पत्नी के स्वामित्व की भूमि के भी कुछ हिस्से में कब्जा कर निर्माण कराया जा रहा है यह संपादक का आरोप है वहीं पूरे मामले में पूर्व में संपादक की पत्नी द्वारा तहसील कार्यालय बैकुंठपुर व अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय में भी अपनी जमीन पर गलत तरीके से कब्जा करने के प्रयास से मकान निर्माण करने की शिकायत की जा चुकी है और उस मामले में निर्माण पर रोक लगाए जाने का भी आदेश अनुविभागीय अधिकारी द्वारा एकबार दिया जा चुका था। संपादक की पत्नी के स्वामित्व की भूमि पर गलत तरीके से कब्जे के उद्देश्य से निर्माण कराये जाने के मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय बैकुंठपुर द्वारा निर्माण पर रोक लगाने के आदेश के बावजूद भी कांग्रेस नेता के चाचा राजनीतिक संरक्षण लेकर निर्माण जारी रखे हुए हैं और उसके बाद उनके द्वारा लगातार धमकी और मारपीट किये जाने का प्रयास किया जा रहा है यह भी संपादक का आरोप है। संपादक का यह भी आरोप है कि कांग्रेस नेता के चाचा अपने यहां काम करने आने वाले मजदूरों से भी मारपीट कराये जाने की धमकी देते हैं और इस मामले में वह पीçड़त हैं। पूरे मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए प्रशासन को पूर्व सूचना देकर संपादक भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं और प्रशासन 48 घण्टे बाद भी उनकी सुध लेने नहीं पहुंच सका है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रशासन कांग्रेस नेता के चाचा के कब्जे से संपादक की पत्नी के स्वामित्व की भूमि को कब्जे से मुक्त कराकर संपादक को न्याय दिला पाता है या सत्ता से जुड़े होने के नाते कांग्रेस नेता के चाचा के पक्ष में रहकर संपादक को न्याय से वंचित रखता है।


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