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अम्बिकापुर,@ नए जिला न्यायालय भवन के साथ अधिवक्ताओं के लिए 300 कक्ष और विश्राम गृह की मांग

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करीब 1500 अधिवक्ताओं की जरूरतों को लेकर मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन,पार्किंग से इंटरनेट तक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,31 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
सरगुजा में नवीन जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के निर्माण के साथ अब अधिवक्ताओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को लेकर भी मांग उठी है। करीब 1500 अधिवक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अधिवक्ताओं के लिए पर्याप्त कार्यस्थल, आधुनिक पैरवी हॉल और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस संबंध में कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता ने मुख्य न्यायाधीश,छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन क्रमांक 19/2026, दिनांक 28 अगस्त 2026 में नवीन न्यायालय भवन के साथ अधिवक्ताओं के लिए सुविधाओं को भी प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है।
300 कक्ष और आधुनिक पैरवी हॉल की मांग : ज्ञापन में लगभग 1500 अधिवक्ताओं की आवश्यकताओं को देखते हुए पर्याप्त एवं आधुनिक पैरवी हॉल बनाने तथा अधिवक्ताओं के लिए अलग भवन में 300 कक्षों के निर्माण की मांग की गई है। तर्क दिया गया है कि अधिवक्ताओं को न्यायालयीन कार्य के दौरान बैठने और पैरवी की तैयारी के लिए व्यवस्थित स्थान मिलना जरूरी है।
बाहर से आने वाले वकीलों के लिए विश्राम गृह : सरगुजा जिले का न्यायिक क्षेत्र विस्तृत होने के कारण दूर-दराज से अधिवक्ताओं का अम्बिकापुर आना-जाना होता है। ऐसे में ज्ञापन में बाहर से आने वाले अधिवक्ताओं के लिए अधिवक्ता विश्राम गृह बनाने की मांग भी रखी गई है।
पार्किंग,पानी,शौचालय और इंटरनेट की सुविधा : ज्ञापन में न्यायालय परिसर में पर्याप्त बैठने की व्यवस्था के साथ पार्किंग, पेयजल, शौचालय,कैंटीन एवं इंटरनेट जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। अधिवक्ताओं का कहना है कि आधुनिक न्यायालय भवन के साथ सुविधाजनक कार्य वातावरण भी जरूरी है।
50 से 100 किमी तक आने वालों के लिए टोल में राहत : अम्बिकापुर एवं आसपास के क्षेत्रों से प्रतिदिन 50 से 100 किलोमीटर तक आवागमन करने वाले अधिवक्ताओं एवं नागरिकों की समस्या को भी ज्ञापन में उठाया गया है। इनके लिए टोल टैक्स में स्थानीय राहत दिलाने के लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह किया गया है। ज्ञापन में अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता ने कहा कि नवीन न्यायालय भवन तभी पूर्ण अर्थों में सफल होगा,जब न्यायिक कार्य से जुड़े अधिवक्ताओं के लिए भी पर्याप्त और सम्मानजनक कार्य-सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि मजबूत बार और बेहतर सुविधाएं मजबूत न्याय व्यवस्था की आधारशिला हैं।


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