श्वास नली तक पहुंची चोटों में कान की उपास्थि से किया पुनर्निर्माण,सभी मरीज स्वस्थ
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,31 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। गले पर गंभीर और जानलेवा चोट के मामलों में लगातार बढ़ोतरी सामने आ रही है। राजमाता श्रीमती देवेंद्रकुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध चिकित्सालय में इस वर्ष अब तक गले की गंभीर चोट से पहुंचे 18 मरीजों का सफल उपचार किया गया है। समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा और जटिल सर्जरी के कारण सभी मरीजों की जान बचाई जा सकी है। मेडिकल कॉलेज के नाक-कान-गला (ईएनटी) विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में गले की गंभीर चोट के 10 मरीज उपचार के लिए पहुंचे थे,जबकि वर्ष 2026 में अब तक यह संख्या बढ़कर 18 हो चुकी है। इनमें कई मरीजों की श्वास नली तक गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई थी।
आधे मामले स्वयं को नुकसान पहुंचाने से जुड़े : ईएनटी विभाग के चिकित्सकों के अनुसार आपातकालीन कक्ष से पहुंचे लगभग आधे मामले स्वयं को नुकसान पहुंचाने से संबंधित रहे। वहीं अन्य मामले आपसी विवाद,रंजिश और हमले से जुड़े थे। अधिकतर मरीज 15 से 40 वर्ष आयु वर्ग के रहे हैं। हाल ही में गांधीनगर निवासी 21 वर्षीय छात्रा को गले में गंभीर चोट के बाद बेहद नाजुक हालत में अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू कर ऑपरेशन किया। विशेषज्ञों की निगरानी में छात्रा की जान बचाई जा सकी। वर्तमान में वह स्वस्थ है और उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग भी दी जा रही है।
कान की उपास्थि से बनाई क्षतिग्रस्त श्वास नली : चिकित्सकों के अनुसार कुछ मरीजों में चोट इतनी गहरी थी कि श्वास नली का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। ऐसे जटिल मामलों में ईएनटी विशेषज्ञों ने कान की उपास्थि का उपयोग कर श्वास नली का पुनर्निर्माण किया। सर्जरी के बाद मरीजों की श्वास प्रक्रिया सामान्य हुई और सभी स्वस्थ हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि गले की चोट में सबसे बड़ा खतरा अत्यधिक रक्तस्राव और श्वास मार्ग बंद होने का होता है। ऐसे मामलों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
आधुनिक सुविधाओं से मिला उपचार : मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में उपलब्ध ब्लड बैंक,24 घंटे एनेस्थीसिया सेवा,ऑपरेशन थिएटर,वेंटिलेटर और क्रिटिकल केयर सुविधाओं ने गंभीर मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शासन की व्यवस्था के तहत मरीजों को आवश्यक उपचार निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
तनाव के संकेतों को न करें नजरअंदाज : चिकित्सकों ने युवाओं में मानसिक तनाव,निराशा और पारिवारिक या शैक्षणिक दबाव को गंभीरता से लेने की अपील की है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को नुकसान पहुंचाने की बात करे,लोगों से दूरी बनाने लगे या असामान्य व्यवहार करे तो उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। समय पर काउंसलिंग और विशेषज्ञ उपचार से गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है।
विशेषज्ञ टीमः ईएनटी विभाग के प्रो. डॉ. बीआर सिंह,प्रो. डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता,डॉ. अनुपम मिंज,डॉ. जीके दामले,डॉ. ऊषा आर्मो,डॉ. नेहा स्वर्णकार और डॉ. अदिति गोयल सहित चिकित्सकों की टीम गंभीर मरीजों का उपचार कर रही है।
विशेषज्ञ संदेश
‘गले की गंभीर चोट में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। रक्तस्राव नियंत्रित करते हुए मरीज को जल्द से जल्द सक्षम अस्पताल पहुंचाना जीवन बचाने में सबसे अहम कदम है।’
प्रो. डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता,वरिष्ठ चिकित्सक, ईएनटी विभाग, मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर.
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur