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मनेंद्रगढ़@ 15 अगस्त के दिन क्लब में कौन-कौन मौजूद था? सदस्यता रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और शराब स्टॉक की जांच से सामने आ सकता है सच

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-रवि सिंह-
मनेंद्रगढ़ ,31 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त 2026 के ड्राई डे के दौरान एनएच-43 स्थित क्लब ग्रीन पार्क में कथित रूप से शराब परोसे जाने और मध्यप्रदेश की शराब उपलब्ध होने के आरोपों ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं,सोशल मीडिया पर सामने आई एक स्थानीय पोस्ट में क्लब में ड्राई डे के बावजूद शराब की बिक्री अथवा परोसे जाने का आरोप लगाया गया है,मामला सामने आने के बाद अब शहरवासियों की मांग है कि इसे केवल सोशल मीडिया के आरोप तक सीमित न रखते हुए 15 अगस्त के दिन के सीसीटीवी फुटेज,क्लब के प्रवेश रजिस्टर, सदस्यता रिकॉर्ड और शराब से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है,ऐसे में पूरे मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ड्राई डे के दौरान वास्तव में शराब परोसी गई थी या नहीं, लेकिन आरोप गंभीर होने के कारण आबकारी विभाग की ओर से तथ्यात्मक जांच की मांग जरूर उठ रही है।
ड्राई डे पर शराब परोसने का आरोप- स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर प्रदेश में शराब की बिक्री और परोसने पर प्रतिबंध रहता है, ऐसे में यदि किसी क्लब या प्रतिष्ठान में प्रतिबंध के बावजूद शराब परोसे जाने की शिकायत सामने आती है तो संबंधित विभाग के लिए उसकी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है, क्लब ग्रीन पार्क को लेकर सामने आए आरोप में कहा गया है कि 15 अगस्त के ड्राई डे पर भी क्लब में शराब उपलब्ध कराई गई,यही आरोप अब पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है, यदि उस दिन क्लब में शराब परोसी गई थी तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि शराब कहां से आई,किसके माध्यम से पहुंची और किसके निर्देश पर उसे परोसा गया। वहीं यदि ऐसा नहीं हुआ था तो सीसीटीवी और अन्य रिकॉर्ड की जांच के बाद क्लब प्रबंधन भी अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
सिर्फ वीडियो नहीं,पूरा रिकॉर्ड जांचे विभाग-आबकारी विभाग के संबंधित अधिकारी नितिन कुमार शुक्ला से जानकारी लेने का प्रयास किया गया,उनके अनुसार मध्यप्रदेश की अवैध शराब की बिक्री से संबंधित वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की बात कही गई है और वीडियो उपलब्ध कराने पर उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी,लेकिन मामले में सवाल यह उठ रहा है कि जांच को केवल किसी एक वीडियो तक सीमित रखने के बजाय 15 अगस्त के पूरे घटनाक्रम की जांच क्यों न की जाए? क्योंकि यदि आरोप ड्राई डे पर शराब परोसे जाने का है तो सीसीटीवी फुटेज इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है, फुटेज से यह देखा जा सकता है कि उस दिन क्लब के भीतर गतिविधियां क्या थीं, इसके साथ प्रवेश रजिस्टर और सदस्यता रिकॉर्ड का मिलान करने पर यह भी पता लगाया जा सकता है कि क्लब में मौजूद लोग अधिकृत सदस्य थे या नहीं।
अधिकारी से कथित मुलाकातों पर भी उठे सवाल-मामले में एक सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि क्लब संचालित करने वाला व्यक्ति आबकारी विभाग के कार्यालय में नवीन कुमार शुक्ला से सप्ताह में दो से तीन बार मिलने क्यों आता है और कथित रूप से घंटों मुलाकात करता है,हालांकि किसी अधिकारी से किसी व्यक्ति की मुलाकात मात्र अपने आप में किसी अनियमितता अथवा संरक्षण का प्रमाण नहीं है,सरकारी कार्यालयों में व्यवसायिक और प्रशासनिक कारणों से मुलाकातें होना सामान्य बात हो सकती हैं,लेकिन यदि इन मुलाकातों को लेकर संरक्षण का आरोप लगाया जा रहा है तो इसकी पुष्टि केवल रिकॉर्ड,शिकायतों और संबंधित अधिकारियों के पक्ष से ही हो सकती है,इसलिए इस आरोप को भी तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि जांच की मांग के रूप में देखा जाना चाहिए।
संरक्षण के आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच-स्थानीय स्तर पर संबंधित जिला अधिकारी से कथित संरक्षण मिलने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, यह आरोप गंभीर है,लेकिन फिलहाल इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, यदि किसी अधिकारी पर संरक्षण देने का आरोप है तो जांच एजेंसी को यह देखना होगा कि संबंधित अधिकारी के कार्यकाल में क्लब के खिलाफ कोई शिकायत आई थी या नहीं,उस पर क्या कार्रवाई हुई,निरीक्षण कब-कब किया गया और क्या किसी उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई,इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि विभागीय निगरानी नियमित थी या नहीं।
हर सप्ताह सीसीटीवी जांच का सुझाव-शहरवासियों की मांग है कि क्लब ग्रीन पार्क जैसे प्रतिष्ठानों की निगरानी केवल किसी विवाद के बाद न हो,बल्कि नियमित व्यवस्था बनाई जाए,इसके तहत आबकारी विभाग के अधिकारियों द्वारा क्लब के सीसीटीवी और संबंधित रिकॉर्ड की नियमित जांच एवं निरीक्षण रिपोर्ट तैयार किए जाने का सुझाव दिया जा रहा है,यदि प्रत्येक निरीक्षण का रिकॉर्ड मौजूद रहे तो भविष्य में किसी शिकायत के सामने आने पर विभाग के पास यह बताने के लिए तथ्य होंगे कि किस तारीख को क्या जांच की गई थी और क्या पाया गया था।
अब जांच से ही साफ होगी तस्वीर- क्लब ग्रीन पार्क को लेकर सामने आए आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। क्लब प्रबंधन का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा,यदि आरोप गलत हैं तो सीसीटीवी,सदस्यता रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज उनकी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं,वहीं यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सवाल उठेगा कि ड्राई डे के दिन शराब क्लब तक कैसे पहुंची और विभागीय निगरानी के बावजूद उसे कैसे परोसा गया? फिलहाल सबसे जरूरी कदम यही है कि 15 अगस्त 2026 के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर उनकी जांच कराई जाए,क्लब में मौजूद लोगों की सदस्यता सत्यापित की जाए और उस दिन के शराब संबंधी रिकॉर्ड का मिलान किया जाए,क्योंकि इस मामले में सोशल मीडिया की चर्चा से ज्यादा महत्वपूर्ण अब सीसीटीवी,रजिस्टर और सरकारी रिकॉर्ड हैं,यदि विभाग निष्पक्ष जांच करता है तो कुछ ही दस्तावेज यह तय कर सकते हैं कि मामला महज आरोप था या ड्राई डे के दिन नियमों को दरकिनार कर वास्तव में शराब परोसी गई थी।
क्लब में सिर्फ सदस्य आते हैं…तो 15 अगस्त की सूची सामने आए
प्राप्त जानकारी के अनुसार क्लब ग्रीन पार्क में केवल क्लब के सदस्यों को प्रवेश की अनुमति होने की बात सामने आ रही है, ऐसे में 15 अगस्त के दिन क्लब में मौजूद लोगों की सूची इस जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है,जांच में यह देखा जा सकता है कि उस दिन क्लब में कितने लोग पहुंचे,उनमें कितने अधिकृत सदस्य थे और क्या किसी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश दिया गया,इसके लिए गेट रजिस्टर,सदस्यता रिकॉर्ड,सीसीटीवी फुटेज और उस दिन की बुकिंग अथवा अन्य उपलब्ध प्रविष्टियों का मिलान किया जा सकता है,यदि क्लब में प्रवेश केवल सदस्यों के लिए है तो उस दिन मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और सदस्यता की जांच करना अपेक्षाकृत आसान होना चाहिए।
मध्यप्रदेश की शराब का भी आरोप…
मामले में एक और गंभीर आरोप मध्यप्रदेश की शराब से जुड़ा है,स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि कथित रूप से मध्यप्रदेश की शराब न केवल क्लब में परोसी जाती है,बल्कि उसकी सप्लाई भी की जाती है,यह आरोप फिलहाल स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है,लेकिन यदि विभाग के पास इस संबंध में कोई वीडियो,फोटो,बिल,बोतल,बैच नंबर अथवा अन्य साक्ष्य उपलब्ध होते हैं तो उनकी जांच के माध्यम से शराब के स्रोत का पता लगाया जा सकता है, विशेष रूप से शराब की बोतलों पर अंकित लेबल,बैच नंबर और निर्माता संबंधी जानकारी की जांच यह निर्धारित करने में मदद कर सकती है कि शराब किस राज्य अथवा लाइसेंस प्राप्त स्रोत से आई थी।
सीसीटीवी फुटेज सबसे अहम कड़ी…
इस पूरे मामले में सीसीटीवी जांच को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है,यदि क्लब परिसर में कैमरे लगे हैं तो 15 अगस्त के पूरे दिन और रात की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जानी चाहिए, जांच के दौरान प्रवेश और निकास द्वार के अलावा उन स्थानों की रिकॉर्डिंग भी देखी जा सकती है जहां कथित रूप से शराब परोसी जाती है,सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के साथ यदि उस दिन का बिलिंग रिकॉर्ड,स्टॉक रजिस्टर या अन्य उपलब्ध दस्तावेज मिलाए जाएं तो आरोपों की वास्तविकता जांचने में मदद मिल सकती है।


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