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अंबिकापुर@ वसुंधरा सिटी मॉल निर्माण स्थल पर मजदूर की करंट से मौत

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मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में करंट आने से अशोक श्याम ने अस्पताल में तोड़ा दम,अब जांच का सवाल…सुरक्षा मानकों, अर्थिंग और श्रमिक पंजीयन की जांच करेगा कौन?
-संवाददाता-
अंबिकापुर,31 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
प्रतीक्षा बस स्टैंड के समीप निर्माणाधीन वसुंधरा सिटी मॉल में सोमवार को हुए दर्दनाक हादसे ने शहर में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निर्माण स्थल पर मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में अचानक करंट प्रवाहित होने से बेलखेरिखा निवासी अशोक कुमार श्याम इसकी चपेट में आ गए। गंभीर हालत में उन्हें संजीवनी अस्पताल ले जाया गया,जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह महज दुर्घटना थी या सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा? यदि निर्माण स्थल पर विद्युत सुरक्षा,अर्थिंग और श्रमिकों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था थी,तो लोहे की ट्रॉली में करंट कैसे दौड़ा?
सामान लोड करते समय ट्रॉली में दौड़ा करंट
जानकारी के अनुसार अशोक कुमार श्याम निर्माणाधीन मॉल में मजदूरी करते थे। सोमवार को वह अन्य दिनों की तरह निर्माण कार्य में लगे थे। बताया जा रहा है कि वह मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में निर्माण सामग्री लोड कर रहे थे। इसी दौरान ट्रॉली में अचानक विद्युत करंट प्रवाहित हो गया और अशोक उसकी चपेट में आ गए। करंट लगने के बाद वह गंभीर रूप से झुलस गए। सहकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया,लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
एक मजदूर की मौत,लेकिन जवाबदेही किसकी?
हादसे के बाद अब केवल मुआवजे की बात पर्याप्त नहीं होगी। यह जांच भी जरूरी है कि निर्माण स्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
सवाल कई है…

मटेरियल लिफ्ट ट्रॉली में उचित अर्थिंग और विद्युत सुरक्षा व्यवस्था थी या नहीं?
विद्युत वायरिंग और उपकरणों का नियमित निरीक्षण किया गया था या नहीं?
मजदूरों को सेफ्टी शूज, इंसुलेटेड दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे?
निर्माण स्थल पर जिम्मेदार सेफ्टी अधिकारी/सुपरवाइजर मौजूद था या नहीं?
क्या श्रमिक अशोक कुमार श्याम का संबंधित विभाग में पंजीयन था?
निर्माण स्थल का श्रम एवं विद्युत सुरक्षा विभाग द्वारा आखिरी बार निरीक्षण कब किया गया था?
क्या निर्माण एजेंसी द्वारा सुरक्षा मानकों का प्रमाणित ऑडिट कराया गया था?

श्रम विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
शहर में लगातार बड़े व्यावसायिक और बहुमंजिला निर्माण कार्य चल रहे हैं। ऐसे स्थानों पर बड़ी संख्या में मजदूर काम करते हैं। निर्माण कार्य की रफ्तार के साथ यदि श्रमिक सुरक्षा पीछे छूट जाए तो ऐसी घटनाएं किसी भी परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ सकती हैं।
अशोक की मौत के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संबंधित विभाग केवल कागजों में निरीक्षण करता
है या वास्तव में निर्माण स्थलों पर जाकर सुरक्षा व्यवस्था की जांच भी करता है?
यदि नियमित निरीक्षण हुआ था तो मटेरियल लिफ्ट जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में विद्युत सुरक्षा की कमी पकड़ में क्यों नहीं आई? और यदि निरीक्षण नहीं हुआ था तो इतने बड़े निर्माण स्थल को किस आधार पर काम करने दिया जा रहा था?
मुआवजे से आगे जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
परिजनों को नियमानुसार सहायता और मुआवजा मिलना जरूरी है, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है कि हादसे की तकनीकी और प्रशासनिक जांच हो। विद्युत विभाग, श्रम विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दुर्घटना का वास्तविक कारण क्या था।
सिर्फ पंचनामा और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी कर मामले को बंद कर देना जनहित में पर्याप्त नहीं होगा। यदि जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार व्यक्ति, निर्माण एजेंसी अथवा संबंधित प्रबंधन पर नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए।
आज अशोक गया, कल किसी और परिवार की बारी न हो अशोक कुमार श्याम की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि शहर में चल रहे निर्माण कार्यों में श्रमिक सुरक्षा को लेकर चेतावनी भी है। बड़े-बड़े मॉल और इमारतें विकास की पहचान हो सकती हैं, लेकिन उनके निर्माण में लगे मजदूरों की जिंदगी की कीमत पर विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता। अब प्रशासन से अपेक्षा है कि वह वसुंधरा सिटी मॉल निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था, विद्युत वायरिंग, अर्थिंग, लिफ्ट ट्रॉली, श्रमिक पंजीयन, सुरक्षा उपकरण और पूर्व निरीक्षण रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराए और रिपोर्ट सार्वजनिक करे।


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