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खड़गवां,@बैगा जनजाति की बेटी से छिना हक

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  • महिला बाल विकास विभाग पर गंभीर आरोप
  • राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र समुदाय की बेटी न्याय को तरसी…भर्ती प्रक्रिया कटघरे में…
  • पात्रता के बावजूद बाहर,नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप—बैगा युवती भटकने को मजबूर
  • जनदर्शन में शिकायत,फिर भी कार्रवाई नहीं…आंगनबाड़ी भर्ती पर सवाल…
  • स्थानीय को दरकिनार,बाहरी को नियुक्ति? चेरवापारा भर्ती विवाद गहराया…
  • नियम ताक पर…नियुक्ति जारी…आंगनबाड़ी सहायिका चयन पर विवाद
  • तीन महीने बाद भी जांच नहीं,बैगा युवती न्याय के इंतजार में…
  • कागजों में न्याय,जमीनी हकीकत अलग…आंगनबाड़ी भर्ती पर उठे गंभीर प्रश्न…


-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,19 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)।
जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र चेरवापारा,शंकरगढ़ में सहायिका पद पर हुई नियुक्ति अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है,विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति (राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र समुदाय) की एक युवती ने आरोप लगाया है कि उसने सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ नियमानुसार आवेदन किया था,वह केंद्र क्षेत्र की मूल निवासी होने के साथ पात्रता सूची में प्राथमिकता की हकदार थी,इसके बावजूद उसे सूची से बाहर कर दिया गया। बता दे की जिले में आंगनबाड़ी सहायिका भर्ती को लेकर सामने आया यह मामला अब केवल एक नियुक्ति विवाद नहीं रह गया है,बल्कि यह प्रशासनिक संवेदनशीलता,नियमों की पारदर्शिता और विशेष रूप से संरक्षित जनजातीय अधिकारों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण बनता जा रहा है। विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति जिसे देश में‘राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र’ के रूप में विशेष संरक्षण प्राप्त है की एक पात्र युवती ने आरोप लगाया है कि सभी योग्यता और प्राथमिकता के बावजूद उसे चयन सूची से बाहर कर दिया गया,जबकि नियमों के विपरीत एक अन्य अभ्यर्थी को नियुक्ति दे दी गई,मामले की गंभीरता इस बात से भी बढ़ जाती है कि पीडि़त युवती ने 13 जनवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में लिखित शिकायत देकर पूरे चयन प्रक्रिया की पुनः जांच की मांग की थी,लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है,इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रशासनिक स्तर पर इस शिकायत को गंभीरता से लिया ही नहीं गया,या फिर मामला जानबूझकर लंबित रखा गया है,शिकायत में यह भी उल्लेख है कि चयनित अभ्यर्थी की निवास पात्रता ही संदिग्ध है,जबकि शिकायतकर्ता स्वयं संबंधित क्षेत्र की मूल निवासी है और नियमानुसार उसे प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी। यदि यह आरोप सही हैं,तो यह न केवल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल है,बल्कि यह विशेष संरक्षित जनजाति के अधिकारों की सीधी अनदेखी भी मानी जाएगी,इस पूरे घटनाक्रम ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। दस्तावेजों की जांच,पात्रता निर्धारण और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता—तीनों पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह मामला केवल एक युवती के रोजगार से जुड़ा मुद्दा नहीं,बल्कि उस व्यवस्था की विश्वसनीयता का परीक्षण बन गया है, जो समाज के सबसे कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देने का दावा करती है, अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या विशेष बैगा जनजाति की इस पात्र बेटी को उसका हक मिलेगा,या उसकी शिकायत भी फाइलों में दबकर रह जाएगी?
13 जनवरी को कलेक्टर जनदर्शन में दावा-आपत्ति की शिकायत फिर भी जांच ठंडे बस्ते में…
पीडि़त युवती ने दिनांक 13/01/2026 को कलेक्टर जनदर्शन,जिला एमसीबी में लिखित आवेदन देकर दावा-आपत्ति की पुनः जांच की मांग की थी,आवेदन में उल्लेख है कि उसने कक्षा 8वीं में 66.9 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं और विशेष बैगा जनजाति से होने के कारण उसे नियमानुसार प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, इसके बावजूद अब तक शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से युवती न्याय के लिए भटकने को मजबूर है।
नियुक्ति पाने वाली महिला की निवास पात्रता पर उठे सवाल
शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि जिस महिला सोनी पति स्व. सुनील की नियुक्ति की गई,वह विवाह के बाद अन्यत्र निवास कर रही है और संबंधित ग्राम क्षेत्र की मतदाता सूची में भी उसका नाम दर्ज नहीं है, और सोनी ग्राम शंकरगढ़ से विवाह होकर अन्यत्र गांव चली गई है यह प्रमाण पत्र सरपंच सचिव द्वारा प्रमाणित किया गया है, इसके बावजूद कथित रूप से नियमों और निवास पात्रता को दरकिनार कर नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और आवेदकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
महिला बाल विकास परियोजना कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल
मामले में परियोजना अधिकारी,महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है,आरोप है कि दस्तावेजों में कमियां होने के बावजूद चयनित अभ्यर्थी को लाभ पहुंचाया गया, जबकि विशेष बैगा जनजाति की पात्र युवती को सूची से बाहर कर दिया गया,इससे विभागीय चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग…
पीडि़त परिवार और ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे भर्ती प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा हो और यदि अनियमितता साबित हो तो नियुक्ति निरस्त कर पात्र विशेष बैगा जनजाति की बेटी को न्याय दिलाया जाए, क्या विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति की पात्र बेटी को उसका हक मिलेगा, या शिकायत फाइलों में दबकर रह जाएगी?


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