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रायपुर/रायगढ़@कंपनी ने कहा ‘स्प्यूरियस’, लैब ने कहा ‘सही’ किस पर भरोसा करें ?

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  • नकली दवा का खेलः कंपनी बोली फर्जी,सरकारी लैब ने कर दिया पास!
  • Ursocol घोटाला : Sun Pharma ने बताया नकली,सिस्टम ने बचाया असली!
  • नकली दवा,असली खेल : छत्तीसगढ़ के औषधि विभाग में बड़ा खुलासा…
  • दवा नकली या सिस्टम सेट? रायगढ़ से लखनऊ तक फैला खेल…
  • लैब में पास हुई ‘नकली दवा’? बेनीराम साहू की भूमिका पर उठे सवाल…
  • भाजपा पूर्व विधायक कनेक्शन और दवा जांच विवाद—सिस्टम पर बड़ा सवाल…
  • नकली दवा केस में बड़ा नाम चर्चा में : लैब रिपोर्ट क्यों बनी विवाद?
  • प्रभाव,प्रभार और पास रिपोर्ट-औषधि विभाग में क्या चल रहा है?
  • कागज पर सही,कंपनी के अनुसार नकली—कहां टूटा सिस्टम?
  • रायगढ़ से उठे ह्म्ह्यशष्शद्य 300 मामले में सुधीर केमिस्ट,हर्ष फार्मा,सप्लाई चेन और विभागीय लैब आमने-सामने,बेनीराम साहू और नीरज साहू की भूमिका जांच के घेरे में…

न्यूज डेस्क
रायपुर/रायगढ़,05 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के औषधि विभाग में सामने आया उर्सोकोल 300 दवा का मामला अब केवल एक जांच का विषय नहीं रहा,बल्कि यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली,पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है, इस मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जिस दवा को निर्माता कंपनी सन फार्मा लैबोरेटरीज लिमिटेड ने स्प्यूरियस (नकली) बताया,उसी दवा को राज्य की सरकारी लैब ने ‘मानक गुणवत्ता’ का प्रमाण दे दिया, यह विरोधाभास अब एक संभावित बड़े घोटाले की ओर इशारा कर रहा है, जिसमें सप्लाई चेन,जांच प्रक्रिया और अधिकारियों की भूमिका तीनों ही सवालों के घेरे में हैं। बता दे की छत्तीसगढ़ के औषधि विभाग में बेनीराम साहू का नाम इन दिनों सिर्फ एक अधिकारी के तौर पर नहीं,बल्कि एक प्रभावशाली और चर्चित चेहरे के रूप में उभर कर सामने आया है,बेनीराम साहू भाजपा के पूर्व विधायक के बेटे बताए जाते हैं और विभागीय व प्रशासनिक गलियारों में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है,यही वजह है कि उन पर यह आरोप भी लगते रहे हैं कि उन्हें नियमों से परे काम करने की खुली छूट मिली हुई है,बेनीराम साहू के पास विभाग में कई महत्वपूर्ण प्रभार हैं, जिनमें से एक सबसे संवेदनशील प्रभार औषधि परीक्षण लैब का भी है,वही लैब जहां दवाइयों की गुणवत्ता तय होती है और जहां से जनता की सेहत का सीधा संबंध जुड़ा होता है, इसी लैब से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, रायगढ़ के बड़े दवा व्यापारी सुधीर केमिस्ट से उर्सोकोल 300 दवा का सैंपल उठाया गया, जांच के दौरान दवा निर्माता कंपनी सन फार्मा ने साफ तौर पर इसे नकली (स्प्यूरियस) बताया और कहा कि यह दवा उनकी नहीं है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस दवा को कंपनी ने खुद नकली घोषित किया, वही दवा बेनीराम साहू के नियंत्रण वाली लैब में ‘पास’ हो गई,अब सबसे बड़ा सवाल यही है जब कंपनी दवा को नकली बता रही है, तो सरकारी लैब ने उसे सही कैसे मान लिया? रायगढ़ का उर्सोकोल 300 मामला अब एक बड़े प्रशासनिक और स्वास्थ्य घोटाले का संकेत दे रहा है, इसमें सप्लाई नेटवर्क संदिग्ध, लैब रिपोर्ट विवादित, अधिकारियों की भूमिका सवालों में अब यह जरूरी हो गया है कि निष्पक्ष जांच हो, सच्चाई सामने आए, दोषियों पर कार्रवाई हो।
लैब जांच पर सवाल- दस्तावेज़ों के अनुसार सैंपल की जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही,कोलकाता से अंतिम रिपोर्ट लंबित बताई गई,फिर भी स्थानीय स्तर पर निष्कर्ष जारी कर दिया गया,इससे जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
बेनीराम साहू और नीरज साहू की भूमिका इस पूरे मामले में औषधि विभाग के अधिकारी बेनीराम साहू व नीरज साहू की भूमिका चर्चा में है,आरोपों के अनुसार लैब उनके नियंत्रण में कार्य करती है,इतने गंभीर मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, जांच को अपेक्षित गति नहीं दी गई,यह भी कहा जा रहा है कि विभाग में कई गड़बडि़यां लंबे समय से जारी हैं,लेकिन प्रभावी कार्रवाई का अभाव रहा है ।
अन्य राज्यों में भी मिला नकली माल- कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इसी बैच की नकली दवा बिहार और अन्य राज्यों में भी जब्त की गई,इससे यह मामला एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है,कानूनी पहलू है यदि दवा नकली साबित होती है,तो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम,1940 की धारा 17बी लागू होगी,दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई, लाइसेंस निरस्तीकरण,जेल और आर्थिक दंड पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सबसे बड़ा सवाल यही है कि कंपनी द्वारा नकली घोषित करने के बाद भी,संबंधित अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई? नियमों के अनुसार जिम्मेदार अधिकारियों को हटाया जाना चाहिए था, स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए थी लेकिन आरोप है कि मामला सामान्य तरीके से दबा दिया गया,जांच आगे नहीं बढ़ पाई।
मामले की शुरुआत : सुधीर केमिस्ट से सैंपल
अगस्त 2025 में खाद्य एवं औषधि प्रशासन,रायगढ़ द्वारा सुधीर केमिस्ट (राजीव गांधी नगर, रायगढ़) से उर्सोकोल 300 टैबलेट (बैच नंबर GTF3302A) का सैंपल लिया गया, सुधीर केमिस्ट को क्षेत्र का एक बड़ा दवा व्यापारी माना जाता है,जिसकी सप्लाई छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों तक फैली हुई बताई जाती है।
सप्लाई चेन : रायगढ़ से जबलपुर और लखनऊ तक कड़ी
जांच में सामने आया कि दवा हर्ष फार्मा,जबलपुर से खरीदी गई,हर्ष फार्मा ने जीएसटी बिल प्रस्तुत किया,लेकिन मूल निर्माता कंपनी (सन फार्मा) का बिल उपलब्ध नहीं कराया गया, आगे की जांच में संकेत मिले कि दवा की सप्लाई लखनऊ स्थित ए.ए. फार्मा से जुड़ी हो सकती है,यह दवा कई राज्यों से होकर रायगढ़ तक पहुंची,यह पूरा नेटवर्क एक संगठित सप्लाई चेन की ओर संकेत करता है।
कंपनी का दावा : दवा नकली
सन फार्मा लैबोरेटरीज लिमिटेड द्वारा विभाग को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया,सैंपल कंपनी के मूल उत्पाद से मेल नहीं खाता, पैकेजिंग,लेबलिंग और प्रिंटिंग में अंतर है,दवा स्प्यूरियस (नकली) है,यह उत्पाद कंपनी द्वारा निर्मित नहीं है यानी जिस कंपनी का नाम दवा पर था,उसी ने उसे नकली घोषित कर दिया।
सरकारी लैब का उल्टा निष्कर्ष
इसके विपरीत राज्य की सरकारी लैब (रायपुर) ने उसी सैंपल को ‘CBI / EOW बताया यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा विरोधाभास है।


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