- नकली दवा कांड…बंद हुई प्रेम प्रकाश एजेंसी या बदला ठिकाना? लाइसेंस,निरीक्षण और नियमों पर उठे बड़े सवाल
- नकली दवा कांड : एजेंसी गायब,सिस्टम मौन—किसके संरक्षण में चल रहा कारोबार?
- नकली दवा पर कार्रवाई या खानापूर्ति? भाटापारा कांड में उठे तीखे सवाल
- नाम बदलो,लाइसेंस लो और फिर धंधा शुरू? दवा कारोबार में नया फार्मूला
- नकली दवा से ज्यादा मजबूत ‘सेटिंग’? एजेंसी गायब, कार्रवाई भी गायब
- निरीक्षण से पहले खाली दुकान—क्या पहले ही पहुंच गई थी खबर?
- नियमों की उल्टी गंगाः मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट जरूरी, एजेंसी में नहीं
- जनता की सेहत से खेल या सिस्टम की मेहरबानी? नकली दवा कांड में बड़ा सवाल
- कार्रवाई के बाद गायब हुई एजेंसी, दूसरे स्थान से
- कारोबार की चर्चा
- निरीक्षण, छुट्टी, सीमित कार्रवाई और नए लाइसेंस की तैयारी—पूरे घटनाक्रम ने खड़े किए कई सवाल

-न्यूज डेस्क-
रायपुर/भाटापारा/बलौदाबाजार,15 मार्च 2026 (घटती-घटना)। नकली दवाओं के मामले में नाम सामने आने के बाद भाटापारा की प्रेम प्रकाश एजेंसी अब कई गंभीर सवालों के केंद्र में आ गई है, औषधि विभाग की कार्रवाई के बाद एजेंसी का पुराना कार्यालय भले ही बंद दिखाई दे रहा हो, लेकिन सूत्रों का दावा है कि दवाओं का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और यह किसी अन्य स्थान से संचालित किया जा रहा है,यह मामला अब केवल नकली दवाओं की जांच तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि औषधि विभाग की कार्यप्रणाली,निरीक्षण प्रक्रिया,विभागीय कार्रवाई और दवा व्यापार से जुड़े नियमों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
संत कंवर राम चौक से अचानक बंद हुई एजेंसी
जानकारी के अनुसार प्रेम प्रकाश एजेंसी पहले संत कंवर राम चौक,भाटापारा (जिला बलौदाबाजार) में संचालित हो रही थी,लेकिन जैसे ही नकली दवाओं के मामले में इसका नाम सामने आया और विभागीय कार्रवाई शुरू हुई,एजेंसी का शटर बंद हो गया और संचालक कथित तौर पर गायब हो गया, स्थानीय लोगों का कहना है कि एजेंसी के बंद होने के बाद भी दवाओं का कारोबार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
निरीक्षण और विभागीय कार्रवाई पर सवाल
इस पूरे मामले में औषधि निरीक्षक नीरज साहू और औषधि नियंत्रक बेनी राम साहू की भूमिका भी चर्चा में है, बताया जा रहा है कि जब प्रेम प्रकाश एजेंसी की जांच की गई तब औषधि निरीक्षक नीरज साहू अवकाश पर थे, लेकिन इसके बावजूद वे निरीक्षण स्थल पर पहुंचे,इसके बाद भी उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई,बताया जाता है कि उनके खिलाफ केवल वेतन वृद्धि रोकने जैसी सीमित कार्रवाई की गई,अब सवाल यह उठ रहा है कि इतने गंभीर मामले में इतनी हल्की कार्रवाई क्यों की गई।
संध्या टिकरिया में नया ठिकाना?
सूत्रों के अनुसार अब यह एजेंसी संध्या टिकरिया क्षेत्र में एक दवा दुकान के पीछे से होलसेल दवाओं का कारोबार कर रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि एजेंसी का नेटवर्क अब भी सक्रिय है,अब सवाल उठता है की क्या औषधि विभाग को इस नए स्थान की जानकारी है? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं है तो विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
रायगढ़ मामले से तुलना
स्थानीय दवा व्यापारियों का कहना है कि इसी तरह का मामला रायगढ़ के सरस्वती मेडिकोज में सामने आया था,वहां जब कार्रवाई पर संदेह हुआ तो विभाग ने दोबारा जांच टीम भेजी और दूसरी जांच में बड़ी मात्रा में दवाएं बरामद हुईं,इसके बाद संबंधित औषधि निरीक्षक और औषधि नियंत्रक को निलंबित कर दिया गया,अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि रायगढ़ में इतनी सख्त कार्रवाई हो सकती है तो भाटापारा के मामले में वैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
संरक्षण के आरोप
सूत्रों का दावा है कि औषधि विभाग के कुछ अधिकारियों के संरक्षण के कारण ही यह एजेंसी अब तक बड़ी कार्रवाई से बची हुई है,कुछ लोगों का आरोप है कि औषधि नियंत्रक बेनी राम साहू के संरक्षण में औषधि निरीक्षक नीरज साहू पर भी कठोर कार्रवाई नहीं की गई,हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
लाइसेंस बदलने की तैयारी?
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है,सूत्रों के अनुसार पहले इस एजेंसी का लाइसेंस कीर्ति देव सिंधी के नाम पर था,लेकिन अब एजेंसी के लिए किसी नए व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस बनवाने की तैयारी की जा रही है,बताया जा रहा है कि यदि नया नाम मिल जाता है तो उसी के नाम पर एजेंसी को फिर से लाइसेंस दिलाने की कोशिश की जा सकती है,यदि ऐसा होता है तो यह सवाल और गंभीर हो जाएगा कि जिस एजेंसी का नाम नकली दवाओं के मामले में सामने आया,वह केवल नाम बदलकर फिर से कारोबार कैसे शुरू कर सकती है।
होलसेल दवा व्यापार के नियमों पर भी सवाल
इस मामले ने दवा व्यापार से जुड़े नियमों पर भी बहस छेड़ दी है,जानकारी के अनुसार होलसेल दवा एजेंसी चलाने के लिए फार्मासिस्ट की डिग्री अनिवार्य नहीं है,कोई भी सामान्य स्नातक (ग्रेजुएट) व्यक्ति होलसेल दवा एजेंसी का लाइसेंस ले सकता है,यहीं से सवाल शुरू होते हैं,क्योंकि यदि कोई व्यक्ति खुदरा मेडिकल स्टोर खोलना चाहता है तो वहां फार्मासिस्ट की डिग्री या योग्य फार्मासिस्ट की नियुक्ति अनिवार्य होती है,लेकिन बड़ी मात्रा में दवाओं की आपूर्ति करने वाली होलसेल एजेंसी के लिए ऐसी शर्त अनिवार्य नहीं है।
क्या नियमों में उल्टी गंगा बह रही है?
दवा व्यापार से जुड़े कुछ जानकारों का कहना है कि यह व्यवस्था अपने आप में विरोधाभासी है, जब छोटी दवा दुकान चलाने के लिए तकनीकी योग्यता जरूरी है, तो फिर हजारों-लाखों रुपये की दवाओं का वितरण करने वाली एजेंसी के लिए ऐसी योग्यता अनिवार्य क्यों नहीं है? कुछ लोग व्यंग्य में यह भी कह रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में दवा व्यापार के नियमों में शायद उल्टी गंगा बह रही है।
जनता की सेहत का सवाल
दवा कारोबार सीधे तौर पर जनता की सेहत से जुड़ा हुआ है, ऐसे में यदि नकली दवाओं का मामला सामने आता है तो उस पर सख्त और पारदर्शी कार्रवाई होना बेहद जरूरी है, लेकिन यदि एजेंसी गायब हो जाए, निरीक्षण सवालों में आ जाए और कार्रवाई सीमित रह जाए,तो स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा होता है।
अब निगाहें औषधि विभाग पर
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि औषधि विभाग इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है,क्या विभाग प्रेम प्रकाश एजेंसी की वास्तविक स्थिति का पता लगाकर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी धीरे-धीरे फाइलों में दब जाएगा? क्योंकि यह मामला केवल एक एजेंसी का नहीं बल्कि जनता की सेहत, दवा व्यापार की पारदर्शिता और विभागीय विश्वसनीयता का भी है।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur