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नई दिल्ली@ भारत-पाक के सीजफायर में अमेरिका का रोल नहीं

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ट्रंप के दावे को विदेश मंत्रालय ने फिर किया खारिज…
नई दिल्ली,29 मई 2025(ए)।
भारत ने एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया है,जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बिजनेस के जरिये सीजफायर कराने की बात कही थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिकी अदालत में ट्रम्प प्रशासन द्वारा हाल ही में किए गए एक फाइलिंग के जवाब में यह बात कही। भारत सरकार का कहना है कि ट्रंप ने जो दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति करवाई,वो सच नहीं है। भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत से ही शांति हुई थी, और इसमें अमेरिका का कोई रोल नहीं था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी साफ़-साफ़ कह दिया है कि इस मामले में भारत का रुख पहले से ही स्पष्ट है और उसमें कोई बदलाव नहीं है।
अमेरिका से बात हुई लेकिन सीजफायर पर नहीं
रणधीर जायसवाल ने कहा, अमेरिका में की गई कोर्ट फाइलिंग के बारे में,मुझे उम्मीद है कि आपने कोर्ट का आदेश भी देखा होगा। इस विशेष मुद्दे पर हमारी राय स्पष्ट है। मैं आपको 13 मई को दिए गए हमारे बयान को देखने के लिए कहूंगा। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि भारत और अमेरिका के नेताओं के बीच 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से लेकर 10 मई को युद्धविराम होने तक सैन्य स्थिति पर चर्चा हुई थी,लेकिन इन चर्चाओं में व्यापार या टैरिफ का मुद्दा नहीं उठा।
जायसवाल ने आगे कहा, विदेश मंत्री (एस जयशंकर) ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि गोलीबारी को रोकने का फैसला भारत और पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशन्स के बीच सीधी बातचीत के ज़रिये हुआ था।
ट्रंप का दावा,दोनों देशों को व्यापार का प्रस्ताव दिया
यह बयान अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लुट्निक द्वारा अमरीकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दिए गए एक बयान के बाद आया है। लुट्निक ने दावा किया था, भारत और पाकिस्तान – दो परमाणु शक्ति वाले देश जो 13 दिन पहले ही युद्ध में शामिल थे – 10 मई, 2025 को एक अस्थायी युद्धविराम पर पहुंचे। यह युद्धविराम तभी संभव हो पाया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने हस्तक्षेप किया और दोनों देशों को युद्ध को टालने के लिए अमेरिका के साथ व्यापार करने का प्रस्ताव दिया। लुट्निक ने तर्क दिया कि ट्रंप द्वारा आपातकालीन आर्थिक शक्तियों के उपयोग को अमान्य करने से कूटनीति कमजोर होगी। उन्होंने कहा,एक प्रतिकूल फैसला जो इस मामले में राष्ट्रपति की शक्ति को सीमित करता है, भारत और पाकिस्तान को राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्ताव की वैधता पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और लाखों लोगों के जीवन को खतरा हो सकता है।
युद्धविराम के फैसले में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं
भारत लगातार यह कहता रहा है कि युद्धविराम के फैसले में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले भी अमेरिकी मध्यस्थता की बात को खारिज कर दिया था। फ्रांकफुर्टर ऑलगेमाइन जç¸टुंग के साथ एक इंटरव्यू में जयशंकर ने कहा,गोलीबारी रोकने पर सहमति दोनों पक्षों के सैन्य कमांडरों के बीच सीधी बातचीत से बनी थी। उन्होंने आगे कहा, उससे एक दिन पहले, हमने पाकिस्तान के मुख्य हवाई अड्डों और हवाई रक्षा प्रणाली को प्रभावी ढंग से निशाना बनाया और उन्हें निष्कि्रय कर दिया। तो मुझे शत्रुता समाप्त करने के लिए किसे धन्यवाद देना चाहिए? मैं भारतीय सेना को धन्यवाद देता हूं क्योंकि यह भारतीय सेना की कार्रवाई थी जिसके कारण पाकिस्तान ने कहा: हम रोकने के लिए तैयार हैं।


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