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संवाददाता-
कोरिया,16 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना) ।सेवा संकल्प अभियान के तहत शुक्रवार को मानस भवन, बैकुंठपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगन मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नौवें राष्ट्रीय पोषण माह एवं ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ कार्यक्रम के साथ आयोजित इस आयोजन में विधायक श्री भईयालाल राजवाड़े, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री मोहित पैकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती वन्दना राजवाड़े सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।
यह आयोजन बच्चों के बेहतर पोषण,महिलाओं के स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी सेवाओं के प्रति सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता को रेखांकित करता है। गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर नवजात शिशुओं के पोषण, बालिकाओं की शिक्षा और महिलाओं की आत्मनिर्भरता तक, परिवार एवं समाज की सक्रिय भूमिका इन प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है।
विधायक भईयालाल राजवाड़े ने कहा…स्वस्थ बच्चे और सशक्त महिलाएं समृद्ध समाज का आधार हैं। प्रत्येक परिवार को गर्भवती महिलाओं, माताओं और बच्चों के पोषण तथा स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। आंगनबाड़ी केंद्र हमारे गांव और मोहल्ले के बच्चों के विकास के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इन्हें बेहतर बनाने में जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के संदेश को अपनाते हुए बेटियों को शिक्षा, सुरक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर देना हम सभी की जिम्मेदारी है
स्थानीय पौष्टिक आहार से मजबूत होगा पोषण
बेहतर पोषण के लिए दैनिक भोजन में विविधता और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों को स्थान देना महत्वपूर्ण है। दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल और मोटे अनाज जैसे खाद्य पदार्थ संतुलित आहार को समृद्ध बनाते हैं। बच्चों और महिलाओं की आयु तथा जरूरत के अनुरूप पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल और साफ-सफाई की आदतें भी पोषण से जुड़ी आवश्यक कडि़यां हैं।सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 जैसे प्रयासों की सफलता के लिए पात्र परिवारों का आंगनबाड़ी सेवाओं से नियमित जुड़ाव आवश्यक है। बच्चों की वृद्धि की निगरानी और जरूरत पड़ने पर समय पर परामर्श मिलने से उनकी देखभाल को बेहतर बनाया जा सकता है।
’नवजात शिशुओं की देखभाल में परिवार की भूमिका अहम’
नवजात शिशु की देखभाल केवल माता की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार का दायित्व है। मां को पर्याप्त भोजन, आराम और सहयोग मिलने से वह अपने स्वास्थ्य के साथ शिशु की देखभाल पर भी ध्यान दे सकती है। शिशुओं के पोषण, नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच के संबंध में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा स्वास्थ्यकर्मियों का मार्गदर्शन परिवारों के लिए उपयोगी है।प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, महतारी वन्दन योजना जैसी योजनाएं भी पात्र महिलाओं को मातृत्व के दौरान सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित हैं। इन योजनाओं की जानकारी जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाना और उन्हें सेवाओं से जोड़ना महत्वपूर्ण है।
’एनीमिया के प्रति जागरूकता जरूरी’
किशोरियों और महिलाओं में एनीमिया की रोकथाम के लिए पौष्टिक भोजन के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच और स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह का पालन आवश्यक है। परिवारों को महिलाओं के खानपान और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए। किशोरावस्था से ही पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने से बालिकाओं को स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ने में सहायता मिलती है।
’बेटियों की शिक्षा से महिला सशक्तिकरण को मिलेगी मजबूती’
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का संदेश बेटियों के जन्म, संरक्षण और शिक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है। बालिकाओं की पढ़ाई जारी रखने, उन्हें सुरक्षित वातावरण देने और निर्णय लेने का अवसर प्रदान करने में परिवार तथा समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षा और कौशल विकास के अवसर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा सामाजिक एवं आर्थिक भागीदारी बढ़ाने में सहायक होते हैं।
‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ का भाव भी यही है कि समुदाय आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़कर बच्चों और महिलाओं के बेहतर भविष्य में योगदान दे। जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और नागरिकों की सहभागिता से पोषण, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।
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