14,144 कैप्सूल समेत बड़ी खेप बरामद,आरोपी ने अनमोल गुप्ता का बताया माल,गढ़वा से सप्लाई लाने का दावा
-संवाददाता-
सीतापुर,11 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच सीतापुर में करीब 6 लाख रुपये कीमत के नशीले कैप्सूल,टैबलेट और कफ सिरप की बरामदगी ने एक बार फिर सूखे नशे के कारोबार और उसकी सप्लाई चेन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संभागीय आबकारी उड़नदस्ता टीम ने तपेश्वरी गौड़ा मैदान के पास एक युवक को कथित तौर पर बोरी में नशीले पदार्थों की खेप के साथ पकड़ा है। गिरफ्तार युवक की पहचान संजय विश्वकर्मा के रूप में हुई है। विभाग के मुताबिक, पूछताछ में उसने बरामद माल सीतापुर निवासी अनमोल गुप्ता का होने और उसके लिए गढ़वा से माल लाने की बात कही है। अब सवाल यह है कि कार्रवाई का दायरा केवल कथित कैरियर की गिरफ्तारी तक सीमित रहेगा या नशे के इस नेटवर्क की दूसरी कडि़यों तक भी पहुंचेगा? आबकारी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 11 अक्टूबर को सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में टीम सीतापुर क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी दौरान तपेश्वरी गौड़ा मैदान के पास बोरी लेकर खड़ा एक व्यक्ति सरकारी वाहन देखकर भागने लगा। टीम के नगर सैनिक ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम संजय विश्वकर्मा बताया। बोरी की तलाशी लेने पर उसमें बड़ी मात्रा में कैप्सूल, टैबलेट और कफ सिरप बरामद होने की बात कही गई है। विभाग के अनुसार, जब्त सामग्री में 14,144 नग Spasmo Proxyvon Plus कैप्सूल, 880 नग Nitrosum-10 टैबलेट, 1,110 नग Alprascen टैबलेट और 20 नग Onerex 3 कफ सिरप शामिल हैं। इनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 6 लाख रुपये बताई गई है। आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21(बी) और 22(सी) के तहत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया है। विभागीय सूचना के अनुसार, आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिए रिमांड की कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई में सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल बरामद नशीले पदार्थों की मात्रा नहीं,बल्कि आरोपी के बयान में सामने आया कथित सप्लाई नेटवर्क है। विभाग के अनुसार, संजय ने पूछताछ में बताया कि माल अनमोल गुप्ता का है और वह उसके साथ काम करता है। उसने गढ़वा जाकर माल लाने की बात भी कही है। हालांकि,यह आरोपी का कथित बयान है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि इस बयान में तथ्य हैं, तो जांच का दायरा संजय विश्वकर्मा की गिरफ्तारी से आगे बढ़ना चाहिए। माल कहां से खरीदा गया, किसके माध्यम से सीतापुर पहुंचा, इसके लिए धन कौन उपलब्ध कराता था और इसे आगे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था—इन सवालों के जवाब ही कार्रवाई को निर्णायक बनाएंगे। केवल बोरी के साथ पकड़े गए व्यक्ति पर कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं होगा, यदि इस कारोबार के पीछे दूसरे लोग भी सक्रिय हैं। सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता ने इसे सूखे नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ की बड़ी सफलता बताया है। उनके अनुसार,सीतापुर क्षेत्र में लंबे समय से इस संबंध में शिकायतें मिल रही थीं। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि जब शिकायतें पहले से मिल रही थीं,तो कथित कारोबार की जड़ तक पहुंचने में अब तक कितनी प्रगति हुई थी? क्या पहले मिली सूचनाओं पर निगरानी की गई थी और क्या संभावित सप्लाई मार्गों की पहचान की गई थी?
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