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सोनहत/कोरिया@ सोनहत के दुर्गम वनांचलों में स्वास्थ्य विभाग का विशेष अभियान,चार गांवों में पहुंचे चिकित्सक,214 मरीजों का उपचार

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  • खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियंका पांडेय के नेतृत्व में गठित तीन चिकित्सा दलों ने संभाला मोर्चा
  • चिरायु दल ने स्कूली बच्चों की जांच कर दीं निःशुल्क दवाएं,मलेरिया जांच में नहीं मिला एक भी सक्रिय मामला
  • मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलवंत सिंह के निर्देश पर जारी है शिविर


-राजन पाण्डेय-
सोनहत/कोरिया,09 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
वनांचल और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी बीमारियों की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने जिस तत्परता से गांवों तक पहुंचकर उपचार की व्यवस्था की,उससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है,सोनहत विकासखंड के दुर्गम गांव निग्नोहर, कचोहर,देवतीडांड और बंसीपुर में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने एक साथ विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाकर कुल 214 मरीजों की जांच की और उन्हें आवश्यक दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराईं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच गांवों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने की इस पहल में विभागीय अधिकारियों के निर्देशन से लेकर मैदानी अमले की सक्रियता तक देखने को मिली। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुरूप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलवंत सिंह ने मौसमी बीमारियों की रोकथाम और ग्रामीणों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया,वहीं,सोनहत की खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियंका पांडेय ने जमीनी स्तर पर व्यवस्था संभालते हुए तीन अलग-अलग चिकित्सा दल गठित किए,इन दलों में एमबीबीएस और बीएमएस चिकित्सकों के साथ आवश्यक स्वास्थ्यकर्मियों को शामिल किया गया,ताकि एक ही दिन में अलग-अलग दुर्गम गांवों तक पहुंचकर मरीजों की जांच,उपचार और दवा वितरण का कार्य किया जा सके।
चार गांवों में एक साथ स्वास्थ्य शिविर, 214 मरीजों को मिला उपचार-8 अक्टूबर 2026 को आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविरों में चिकित्सकों ने ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें सुनीं और लक्षणों के आधार पर जांच कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया। शिविरों में सर्दी,खांसी,बुखार,खुजली,पेचिस सहित अन्य समस्याओं से पीडि़त मरीज पहुंचे। स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीजों को दवाएं देने के साथ बीमारियों से बचाव के उपाय भी बताए, ग्राम निग्नोहर में कुल 52 मरीजों की जांच की गई। इनमें सर्दी,खांसी और बुखार से पीडि़त 24 मरीज, पेचिस का एक मरीज तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित 27 मरीज शामिल रहे, ग्राम कचोहर में 60 मरीजों का उपचार किया गया, जिनमें बुखार के 12, सर्दी-खांसी के 30 और अन्य समस्याओं के 28 मरीज शामिल थे, इसी क्रम में ग्राम देवतीडांड में सर्वाधिक 67 मरीजों की जांच की गई,इनमें सर्दी,खांसी और बुखार के 10,खुजली के पांच तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित 52 मरीज शामिल रहे। ग्राम बंसीपुर में 35 मरीजों को उपचार और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई गईं। इनमें सर्दी,खांसी और बुखार के 13 मरीज तथा अन्य समस्याओं से पीडि़त 22 मरीज शामिल थे,इस प्रकार चारों गांवों में कुल 214 मरीजों की जांच और उपचार किया गया। दुर्गम गांवों में एक साथ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने से उन ग्रामीणों को विशेष लाभ मिला, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में इलाज के लिए विकासखंड मुख्यालय तक पहुंचने में समय, संसाधन और आवागमन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान,चिरायु दल ने मौके पर किया परीक्षण-स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी गई, चिरायु योजना के अंतर्गत गठित विशेष चिकित्सा दल ने वनांचल क्षेत्र के स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया,चिकित्सकों ने बच्चों में मौसमी बीमारियों,कुपोषण,त्वचा संबंधी संक्रमण और अन्य शारीरिक समस्याओं के संभावित लक्षणों की जांच की,जांच के दौरान जिन बच्चों को आवश्यकता थी,उन्हें मौके पर ही आवश्यक दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। साथ ही बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ-सफाई, संतुलित खानपान और बीमारियों से बचाव के संबंध में जानकारी दी गई,स्वास्थ्यकर्मियों ने अभिभावकों को भी बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की समझाइश दी,दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार की उपलब्धता महत्वपूर्ण है,ऐसे में चिरायु दल की सक्रियता से स्कूली बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया गया।
डॉ. बलवंत सिंह के निर्देशन और डॉ. प्रियंका पांडेय के नेतृत्व में गांवों तक पहुंचीं सेवाएं-इस अभियान में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बलवंत सिंह के निर्देशन और खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियंका पांडेय के नेतृत्व में विभागीय अमले की सक्रियता प्रमुख रही। मौसमी बीमारियों की सूचना पर चिकित्सा दलों का गठन कर उन्हें दूरस्थ गांवों तक भेजना और एक ही दिन में चार स्थानों पर शिविर आयोजित करना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा,सोनहत जैसे वनांचल क्षेत्र में दूरी और कठिन रास्तों के कारण समय पर इलाज प्राप्त करना कई ग्रामीणों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की टीमों का गांवों तक पहुंचना केवल मरीजों की जांच और दवा वितरण तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इससे ग्रामीणों को बीमारी की स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता लेने और बचाव के उपाय अपनाने के प्रति जागरूक करने का अवसर भी मिला, चारों गांवों में आयोजित शिविरों में 214 मरीजों का उपचार, स्कूली बच्चों का चिरायु दल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण और मलेरिया जांच में किसी सक्रिय मामले का सामने नहीं आना अभियान के प्रमुख परिणाम रहे, स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से दूरस्थ ग्रामीणों को उनके गांव के नजदीक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हुईं और मौसमी बीमारियों की निगरानी तथा रोकथाम के प्रयासों को गति मिली।
मलेरिया की जांच में नहीं मिला कोई सक्रिय मामला,ग्रामीणों को किया जागरूक
मौसमी बीमारियों के बीच मलेरिया की आशंका को देखते हुए शिविरों में मरीजों की मलेरिया जांच भी की गई। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार,जांच के दौरान मलेरिया का एक भी सक्रिय मामला सामने नहीं आया, वनांचल क्षेत्र में बुखार की शिकायतों के बीच यह राहत की बात रही,जिला मलेरिया सलाहकार रत्नेश शुक्ला ने ग्रामीणों को मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने मच्छरों से बचाव, घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, स्वच्छता बनाए रखने तथा बुखार आने पर तत्काल जांच कराने के महत्व के संबंध में जागरूक किया, स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों को यह संदेश भी दिया गया कि बुखार या अन्य लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और उचित उपचार से बीमारी की गंभीरता को कम करने में मदद मिल सकती है।
चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने संभाली जिम्मेदारी-
विशेष स्वास्थ्य शिविरों में डॉ. विनीत दुबे,डॉ. अरविन्द यादव,डॉ. रेखा दीपांकर,डॉ. स्नेहा भगत और मो. गफ्फार ने मरीजों की जांच,उपचार और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श देने में भूमिका निभाई। वहीं, शिविरों के संचालन और व्यवस्थाओं में मिथलेश राजवाड़े,लालचंद,अनिल कपूर,सुदामा और सुचिता बेग ने सक्रिय योगदान दिया, चिकित्सा दलों के बीच कार्य विभाजन और गांवों तक पहुंचकर सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयास से एक ही दिन में चार दूरस्थ गांवों के मरीजों को लाभ मिला,इस दौरान उपचार के साथ रोगों की पहचान,आवश्यक दवाओं का वितरण और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता पर भी ध्यान दिया गया।


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