बच्चों ने शब्दबीज पेटी से निकाले शब्दों के पत्ते,खेल-खेल में सीखने की पहल…‘छोटे पाँव मजबूत कदम’ संस्था ने शब्दबीज डायरी के लिए उपलब्ध कराईं कॉपियां
-संवाददाता-
सूरजपुर,09 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। कहीं हाथों में शब्दों के पत्ते, कहीं चेहरों पर मुस्कान,तो कहीं कुछ नया सीखने की उत्सुकता। शासकीय प्राथमिक शाला चट्टीडांड़ में जिला स्तरीय शैक्षिक नवाचार ‘शब्दबीज’ का शुभारंभ अनूठे अंदाज में किया गया। यहां बच्चों ने शब्दबीज पेटी से अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप शब्द लिखे पत्ते निकाले और शब्दों को समझने, पढ़ने तथा अपने दैनिक जीवन में उनका प्रयोग करने की नई यात्रा शुरू की। यह गतिविधि महज एक कार्यक्रम का शुभारंभ नहीं, बल्कि बच्चों में भाषा सीखने के प्रति रुचि जगाने और शिक्षा को अधिक रोचक एवं व्यवहारिक बनाने की पहल के रूप में सामने आई। नवाचार के माध्यम से शब्दों को केवल किताबों के पन्नों तक सीमित रखने के बजाय बच्चों के अनुभव,संवाद और दैनिक जीवन से जोड़ने का संदेश दिया गया।
शब्दबीज पेटी बनी बच्चों के आकर्षण का केंद्र- कार्यक्रम में शब्दबीज पेटी के माध्यम से बच्चों को शब्दों से परिचित कराने की गतिविधि आयोजित की गई, बच्चों ने उत्साह के साथ अपनी कक्षा के अनुरूप शब्दों के पत्ते निकाले। इस प्रक्रिया ने शब्द सीखने को एक रोचक गतिविधि में बदल दिया, जिसमें बच्चों की सहभागिता और जिज्ञासा प्रमुख रही, ‘शब्दबीज’ का उद्देश्य बच्चों को केवल शब्द याद कराना नहीं,बल्कि उन्हें शब्दों का अर्थ समझने, सही उच्चारण करने,पढ़ने-लिखने और बातचीत में उनका उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है,प्रारंभिक कक्षाओं में भाषा की मजबूत नींव आगे की पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण होती है। शब्दों की बेहतर समझ से बच्चों को पाठ समझने, प्रश्नों के उत्तर देने,अपने विचार व्यक्त करने और कक्षा की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने में मदद मिलती है।
शब्दबीज डायरी में संजोएंगे नए शब्द- नवाचार को नियमित अभ्यास से जोड़ने के लिए विद्यालय के प्रधानपाठक गौतम शर्मा की पहल पर ‘छोटे पाँव मजबूत कदम’ संस्था ने बच्चों को शब्दबीज डायरी तैयार करने के लिए कॉपियां उपलब्ध कराईं, इन कॉपियों में बच्चे नए शब्दों को लिखकर उनका संग्रह तैयार कर सकेंगे, शब्दबीज डायरी बच्चों के लिए केवल लिखने की कॉपी नहीं,बल्कि भाषा सीखने की यात्रा का साथी बनने की परिकल्पना के साथ शुरू की गई है, नियमित रूप से शब्द लिखने,उन्हें समझने और दोहराने से बच्चों को अपने शब्द भंडार को बढ़ाने का अवसर मिलेगा, साथ ही वे सीखे गए शब्दों का उपयोग बोलचाल और लेखन में करने का अभ्यास कर सकेंगे।
शब्दबीज सूत्र से शब्दवीर सम्मान तक की जानकारी-शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान बच्चों को शब्दबीज नवाचार की अवधारणा, उद्देश्य और कार्यप्रणाली से विस्तारपूर्वक परिचित कराया गया। उन्हें शब्दबीज सूत्र,शब्दबीज पट्ट, शब्दबीज डायरी,शब्द उत्सव,शब्दबीज संवर्धक और शब्दवीर सम्मान के बारे में जानकारी दी गई,इन गतिविधियों का उद्देश्य शब्द सीखने की प्रक्रिया को निरंतर अभ्यास, सहभागिता और प्रोत्साहन से जोड़ना है,शब्दों को पढ़ना,उनका अर्थ समझना,सही तरीके से बोलना और व्यवहार में इस्तेमाल करना भाषा सीखने के महत्वपूर्ण चरण हैं, नवाचार इसी प्रक्रिया को बच्चों के लिए सहज,रुचिकर और उपयोगी बनाने पर केंद्रित है।
भाषा की मजबूत नींव से आगे बढ़ेंगे बच्चे- प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर भाषा संबंधी दक्षता विकसित करना बच्चों की शैक्षणिक प्रगति में अहम भूमिका निभाता है,यदि बच्चा शब्दों को समझने और अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में सक्षम होता है,तो उसे अन्य विषयों को समझने में भी सहायता मिलती है, ‘शब्दबीज’ के माध्यम से बच्चों को सीखने की ऐसी प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है,जिसमें वे केवल सुनने या याद करने तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं गतिविधियों में भाग लेकर सीखें, शब्दों के पत्ते निकालना,उन्हें डायरी में लिखना और उनका अर्थ समझना बच्चों में पढ़ने-लिखने की आदत को प्रोत्साहित करने का माध्यम बन सकता है।
शिक्षा में नवाचार को मिला सामूहिक सहयोग- कार्यक्रम में शाला प्रबंधन समिति की अध्यक्ष चन्द्रलेखा,पालक शिक्षक समिति की अध्यक्ष श्रीमती आशा,सहायक जिला नोडल विजय बरगाह, सहायक जिला नोडल कुमारी टेसु सुमन तथा शिक्षिका मंजू कुजूर उपस्थित रहीं, चट्टीडांड़ की शासकीय प्राथमिक शाला में शुरू हुई यह पहल बच्चों को शब्दों से जोड़ने के साथ भाषा सीखने को आनंददायक बनाने का संदेश देती है,शब्दबीज पेटी से निकला प्रत्येक शब्द बच्चों के लिए नई जानकारी और अभ्यास का अवसर बन सकता है,नियमित गतिविधियों, शब्दबीज डायरी और शिक्षकों के मार्गदर्शन से बच्चों में भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने तथा उनकी अभिव्यक्ति क्षमता को मजबूत करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है,शब्दों के इन छोटे-छोटे बीजों से बच्चों के ज्ञान का वृक्ष कितना विकसित होगा,यह नियमित अभ्यास और निरंतर मार्गदर्शन पर निर्भर करेगा,लेकिन चट्टीडांड़ में हुई इस शुरुआत ने सीखने को उत्सुकता, सहभागिता और आनंद से जोड़ने की एक नई तस्वीर जरूर प्रस्तुत की है।
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