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अंबिकापुर/सूरजपुर@ जेल में बढ़ी सुरक्षा,पुलिस परिवार के घर जले दीप,प्रधान आरक्षक ने साझा किया दर्द…

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  • सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में सजा के बाद जेल प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर
  • फांसी की सजा के बाद कुलदीप साहू की सुरक्षा बढ़ी,रायपुर जेल शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू
  • एक फैसले से लौटा इंसाफ का भरोसा, पुलिस परिवार ने जलाए दीप,तीन दोषियों को मृत्युदंड,मुख्य आरोपी की सुरक्षा बढ़ी मृत्युदंड के बाद कुलदीप पर कड़ी निगरानी,रायपुर जेल की तैयारी
  • अंबिकापुर जेल अधीक्षक ने बताया-आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देश परअदालत के फैसले पर पुलिस लाइन में दिवाली,
  • प्रधान आरक्षक ने की भावुक पोस्ट मां-बेटी हत्याकांड में तीन को मृत्युदंड, एक को मृत्यु पर्यंत कारावास
  • अंबिकापुर केंद्रीय जेल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई पेशी,जेल अधीक्षक बोले—आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देश और जेल नियमावली के तहत 10 साल की सजा के बाद कोर्ट से मुस्कुराते निकला था कुलदीप,मृत्युदंड की खबर पर इस बार प्रतिक्रिया अलग, पुलिस कॉलोनी में फैसले का स्वागत


-संवाददाता-
अंबिकापुर/सूरजपुर,09 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
सूरजपुर के बहुचर्चित मां-बेटी दोहरे हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुख्य दोषी कुलदीप साहू को अंबिकापुर केंद्रीय जेल से रायपुर केंद्रीय जेल स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है, रायपुर केंद्रीय जेल में फांसी की व्यवस्था होने के कारण यह कदम आगे की जेल प्रक्रिया से जुड़ा बताया जा रहा है, फिलहाल कुलदीप अंबिकापुर केंद्रीय जेल में बंद है,जेल प्रशासन ने उसकी सुरक्षा बढ़ा दी है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों तथा जेल नियमावली के अनुसार किए जाने की बात कही है, इस संबंध में 8 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों में भी रायपुर जेल स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी गई है, 8 अक्टूबर को सूरजपुर फास्ट ट्रैक कोर्ट ने प्रधान आरक्षक की पत्नी और नाबालिग बेटी की हत्या के मामले में कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह और चंद्रकांत चौधरी को मृत्युदंड सुनाया, जबकि आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को मृत्यु पर्यंत कारावास की सजा दी, अदालत का यह फैसला मामले की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव है,हालांकि,मृत्युदंड के क्रियान्वयन से पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक है।
रायपुर जेल में स्थानांतरण की तैयारी, लेकिन फांसी की प्रक्रिया अभी नहीं- पत्रकारों ने जेल अधीक्षक से पूछा कि अंबिकापुर केंद्रीय जेल में फांसी देने की व्यवस्था उपलब्ध है या नहीं, इस पर उन्होंने बताया कि प्रदेश में फांसी की व्यवस्था रायपुर केंद्रीय जेल में है, ऐसे में आगे की प्रक्रिया के तहत बंदी को रायपुर स्थानांतरित किया जा सकता है,यहां एक कानूनी अंतर समझना जरूरी है,रायपुर जेल स्थानांतरण की तैयारी का अर्थ यह नहीं है कि मृत्युदंड का क्रियान्वयन निकट है या उसकी तारीख तय हो गई है,अदालत के आदेश के अनुसार,तीनों दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पुष्टि होने तक निष्पादित नहीं की जा सकती,इसलिए फिलहाल जेल प्रशासन की कार्रवाई को सुरक्षा, स्थानांतरण और नियमानुसार व्यवस्था के संदर्भ में देखना चाहिए,मृत्युदंड के क्रियान्वयन से संबंधित आगे की प्रक्रिया न्यायिक पुष्टि और निर्धारित कानूनी कदमों पर निर्भर करेगी।
29 सितंबर को मुस्कुराते हुए बाहर आया था कुलदीप– कुलदीप साहू के व्यवहार को लेकर 29 सितंबर को भी चर्चा हुई थी, उस दिन पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलने के प्रयास से जुड़े एक अलग मामले में उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी,इसके बाद वह न्यायालय परिसर से बाहर निकलते समय मुस्कुराता हुआ दिखाई दिया था, उसके इस व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ और लोगों ने इस पर प्रतिक्रियाएं दी थीं,अब मां-बेटी हत्याकांड में मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद जेल अधीक्षक ने बंदी की प्रतिक्रिया पहले से अलग होने की बात कही है,हालांकि,चेहरे के भावों के आधार पर किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा,इस मामले में पुष्ट तथ्य यही है कि अलग-अलग मामलों में सजा सुनाए जाने के बाद कुलदीप के सार्वजनिक व्यवहार को लेकर चर्चा हुई है।
पुलिस परिवार ने फैसले का स्वागत किया,पुलिस कॉलोनी में जले दीप-सजा सुनाए जाने के बाद सूरजपुर में पुलिस परिवार और पुलिस लाइन से जुड़े लोगों ने फैसले का स्वागत किया,उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार, पुलिस कॉलोनी में रहने वाले कुछ परिवारों ने घरों के सामने दीप जलाए और पटाखे फोड़कर खुशी जताई,फैसले वाली शाम पुलिस लाइन और कॉलोनी में उत्सव जैसा माहौल दिखाई दिया, प्रधान आरक्षक के परिवार के साथ हुई घटना के बाद पुलिस महकमे और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश था,ऐसे में अदालत से सजा सुनाए जाने को कई लोगों ने न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना, हालांकि,इस खुशी के बीच उस परिवार की अपूरणीय क्षति भी बनी हुई है,जिसने इस घटना में अपने प्रियजनों को खो दिया,यह प्रतिक्रिया केवल सजा पर संतोष व्यक्त करने का अवसर नहीं, बल्कि उस लंबे इंतजार की भी याद दिलाती है जिसमें पीडि़त परिवार और पुलिस महकमे को न्यायिक फैसले की प्रतीक्षा करनी पड़ी।
प्रधान आरक्षक की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में-फैसले के बाद प्रधान आरक्षक तालिब शेख की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में आई,पोस्ट में न्याय,संघर्ष और कठिन समय में उम्मीद बनाए रखने जैसे भाव व्यक्त किए गए हैं,यह प्रतिक्रिया मामले से जुड़े परिवार के भावनात्मक पक्ष को सामने लाती है, हालांकि,पोस्ट के आधार पर परिवार की पूरी मनोदशा या उसकी ओर से किसी औपचारिक बयान का निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए, इसे फैसले के बाद सामने आई व्यक्तिगत प्रतिक्रिया के रूप में ही देखा जाना उचित होगा।
चार दोषियों की सजा में अंतर, अदालत के तर्क महत्वपूर्ण-इस मामले में तीन दोषियों को मृत्युदंड और आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को मृत्यु पर्यंत कारावास दिया गया है,सजा में इस अंतर को लेकर चर्चा हो रही है, सजा तय करते समय अदालत प्रत्येक दोषी की भूमिका, अपराध की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के निर्धारित सिद्धांतों पर विचार करती है,इसलिए चारों दोषियों को अलग-अलग सजा दिए जाने के कारणों को समझने के लिए न्यायालय के विस्तृत फैसले में दर्ज तर्कों का इंतजार है।
अब आगे की निगाहें न्यायिक प्रक्रिया पर-सूरजपुर के दोहरे हत्याकांड में निचली अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है, तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक को मृत्यु पर्यंत कारावास दिया गया है,अब मृत्युदंड की हाईकोर्ट से पुष्टि और अन्य संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी,इधर,अंबिकापुर केंद्रीय जेल में सुरक्षा बढ़ाए जाने और रायपुर जेल स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी के बीच जेल प्रशासन ने नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने की बात कही है, फिलहाल दो बातें स्पष्ट हैं—कुलदीप साहू की सुरक्षा बढ़ाई गई है और रायपुर जेल स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है,लेकिन मृत्युदंड का क्रियान्वयन हाईकोर्ट की पुष्टि तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा।
जेल अधीक्षक ने क्या बताया?
केंद्रीय जेल अंबिकापुर के जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि दोषियों को न्यायालय के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया था, इसी माध्यम से कुलदीप साहू को सजा सुनाए जाने की जानकारी मिली, पत्रकारों ने जब बंदी की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा, तो जेल अधीक्षक ने बताया कि इस बार उसकी प्रतिक्रिया पहले जैसी नहीं थी और वह कुछ नकारात्मक दिखाई दिया, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं न्यायालय में मौजूद नहीं थे, इसलिए वहां बंदी के चेहरे के भावों के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी देने की स्थिति में नहीं थे, जेल अधीक्षक के अनुसार, मृत्युदंड की सजा के बाद बंदी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है, आगे की कार्रवाई निर्धारित जेल प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।


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