एल-1 फर्म को काम नहीं देने का आरोप,कुलपति बोले…संबंधित टेंडर निरस्त हो चुका,कुलसचिव ने कहा…एल-1 को ही काम दिया जाना था…
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,06 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में शेड निर्माण की निविदा प्रक्रिया को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता मार्कण्डेय तिवारी ने आरोप लगाया है कि 24 अप्रैल 2026 को जारी निविदा में उनकी फर्म पारिजात एजेंसी एल-1 रही, इसके बावजूद कार्यादेश जारी नहीं किया गया। उन्होंने एल-2 फर्म से नेगोशिएशन कर काम दिए जाने के निर्णय की जांच की मांग की है। शिकायत में विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया, विभिन्न एजेंसियों के भुगतान और कुलपति आवास पर हुए खर्च की भी स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायत के अनुसार शेड निर्माण की निविदा में चार एजेंसियों ने हिस्सा लिया था। तुलनात्मक पत्र में पारिजात एजेंसी की दर सबसे कम दर्ज होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने संबंधित नोटशीट में दर्ज ‘निगोशिएट विद एल-2 फर्म’ टिप्पणी को जांच का आधार बताया है। उन्होंने मूल नोटशीट, फाइल मूवमेंट,अधिकारियों के अनुमोदन और टिप्पणी लिखने वाले अधिकारी की जांच की मांग की है। जरूरत पडऩे पर हस्तलिखित टिप्पणी का फोरेंसिक परीक्षण कराने का भी अनुरोध किया गया है।
कुलपति बोले-टेंडर निरस्त हो चुका है : कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले ने शिकायत में लगाए आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी विभाग में छत मरम्मत का काम हुआ था। उसी ठेकेदार से रजिस्ट्रार ने शेड का काम मौखिक रूप से करा लिया। बाद में पता चला कि संबंधित ठेकेदार दूसरा है। उन्होंने कहा कि शेड मरम्मत और नया शेड निर्माण के लिए अलग-अलग टेंडर हुए थे और नया शेड निर्माण वाला टेंडर निरस्त हो चुका है।
कुलसचिव बोले- एल-1 को ही काम मिलना था : वहीं कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि दर्रीपारा स्थित पुराने विश्वविद्यालय और भकुरा विश्वविद्यालय में शेड निर्माण के टेंडर हुए थे। दर्रीपारा में एल-1 को काम दिया गया, जबकि भकुरा में एल-1 और एल-2 की स्थिति को लेकर निर्णय लिया गया। उनका कहना है कि संबंधित प्रक्रिया में एल-1 को ही कार्य दिया जाना था।
रिकॉर्ड की जांच की मांगः शिकायतकर्ता ने शेड निर्माण से जुड़े वर्क ऑर्डर, मेजरमेंट बुक, बिल, भुगतान रिकॉर्ड और मूल निविदा फाइल का मिलान कराने की मांग की है। साथ ही यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि एल-2 से नेगोशिएशन क्यों किया गया और एल-1 को कार्यादेश क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया, विभिन्न एजेंसियों के भुगतान और कुलपति आवास पर हुए खर्च की भी स्वतंत्र जांच की मांग की है।
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