Breaking News

कोरिया@ बैकुण्ठपुर शहर को पीछे करने की दिशा में फिर एक नया प्रयास?

Share

तहसील-एसडीएम कार्यालय चेरवापारा ले जाने की मांग पर उठे सवाल, राजीव गुप्ता बोले—पहले जनता की राय जानें
शहर से बाहर जाएंगे तहसील-एसडीएम कार्यालय तो किसे होगी सुविधा? राजीव गुप्ता ने उठाया सवाल
बैकुण्ठपुर के भविष्य पर फिर सवाल, तहसील-एसडीएम कार्यालय चेरवापारा ले जाने के प्रस्ताव का मुद्दा गरमाया
कार्यालयों के स्थानांतरण से बदल रही बैकुण्ठपुर की तस्वीर? राजीव गुप्ता ने जनसुविधा को लेकर जताई चिंता
चेरवापारा में तहसील-एसडीएम कार्यालय का प्रस्ताव, राजीव गुप्ता ने कहा—निर्णय से पहले जनता की राय जरूरी
पहले अदालतें और कार्यालय शहर से दूर, अब तहसील-एसडीएम की बारी? राजीव गुप्ता ने उठाए सवाल
बैकुण्ठपुर को पीछे करने का एक और कदम? तहसील-एसडीएम कार्यालय चेरवापारा ले जाने पर विरोध के स्वर
तहसील-एसडीएम कार्यालय चेरवापारा ले जाने के प्रस्ताव पर राजीव गुप्ता ने उठाए सवाल, बोले—जनता की सुविधा और शहर के भविष्य को ध्यान में रखकर हो निर्णय
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 05 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। बैकुण्ठपुर शहर के भविष्य और प्रशासनिक सुविधाओं को लेकर एक नया सवाल सामने आया है, जिला अधिवक्ता संघ बैकुण्ठपुर द्वारा 29 सितंबर 2026 को विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित पत्र सौंपकर बैकुण्ठपुर तहसील न्यायालय एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) कार्यालय के लिए ग्राम चेरवापारा स्थित शासकीय भूमि पर भवन निर्माण की मांग की गई है, इस पत्र के सामने आने के बाद शहर के भविष्य, आम नागरिकों की सुविधा और महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों के स्थान को लेकर बहस शुरू हो गई है।
अधिवक्ता संघ के पत्र में जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर में तहसील न्यायालय एवं एसडीएम राजस्व न्यायालय को एक स्थान पर संचालित करने की आवश्यकता बताते हुए ग्राम चेरवापारा में स्थित शासकीय भूमि, खसरा क्रमांक 825/4 एवं 823/2, पर भवन निर्माण का प्रस्ताव रखा गया है, पत्र में भूमि का कुल रकबा 4.76 हेक्टेयर बताया गया है, साथ ही वर्तमान में कलेक्टर कार्यालय के आसपास वैकल्पिक व्यवस्था के तहत न्यायालय संचालित किए जाने की बात भी पत्र में कही गई है, लेकिन इसी प्रस्ताव ने अब एक दूसरा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या बैकुण्ठपुर जैसे जिला मुख्यालय के महत्वपूर्ण कार्यालयों को शहर के भीतर या उसके आसपास सुविधाजनक स्थान पर विकसित किया जाना चाहिए या फिर उन्हें शहर से बाहर ग्राम पंचायत क्षेत्र की ओर ले जाना उचित होगा?
अधिवक्ता संघ ने बताया न्यायिक सुविधा से जुड़ा विषय- जिला अधिवक्ता संघ के पत्र में कहा गया है कि बैकुण्ठपुर तहसील न्यायालय का अपना भवन नहीं है और वर्तमान में वह वन विभाग के भवन में विभिन्न व्यवस्थाओं के साथ संचालित हो रहा है, इसी तरह अनुविभागीय अधिकारी राजस्व का न्यायालय भी पुराने भवन में संचालित होने का उल्लेख पत्र में किया गया है, पत्र में व्यवहार न्यायालय के कलेक्टर कार्यालय के पास अलग से नवनिर्मित भवन में संचालित होने की बात कही गई है, संघ के अनुसार व्यवहार न्यायालय से तहसील न्यायालय की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है, अलग-अलग स्थानों पर न्यायालय संचालित होने से आम जनता और अधिवक्ताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, इसी आधार पर अधिवक्ता संघ ने चेरवापारा में उपलब्ध शासकीय भूमि पर तहसील न्यायालय और एसडीएम राजस्व न्यायालय का भवन बनाने की मांग रखी है। संघ का तर्क है कि इससे व्यवहार न्यायालय, कलेक्टर न्यायालय, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व का न्यायालय और तहसील न्यायालय एक ही क्षेत्र में आ जाएंगे तथा न्यायिक कार्य अधिक सुगम और शीघ्र हो सकेगा, पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत कलेक्टर कार्यालय परिसर अथवा उसके आसपास संबंधित न्यायालय संचालित किया जाना उचित होगा।
लेकिन शहर के नागरिकों के सामने खड़ा हुआ दूसरा सवाल- अधिवक्ता संघ की मांग का आधार न्यायिक सुविधा है, लेकिन दूसरी ओर यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि तहसील और एसडीएम कार्यालय केवल अधिवक्ताओं और न्यायालयीन मामलों से जुड़े लोगों के लिए नहीं होते, इन कार्यालयों में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण और शहरी नागरिक अपने राजस्व एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं, नामांतरण, सीमांकन, भूमि संबंधी मामले, आय-जाति-निवास प्रमाणपत्र से जुड़े काम, राजस्व प्रकरण, पटवारी एवं तहसील संबंधी कार्य सहित अनेक मामलों के लिए आम नागरिकों को तहसील और एसडीएम कार्यालय जाना पड़ता है, यही वजह है कि यदि इन कार्यालयों को बैकुण्ठपुर शहर से दूर ग्राम चेरवापारा क्षेत्र में ले जाने का निर्णय होता है तो उसका असर केवल न्यायालयीन व्यवस्था पर नहीं बल्कि बैकुण्ठपुर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों नागरिकों की रोजमर्रा की आवाजाही पर भी पड़ सकता है।
लगभग 30 हजार नागरिकों की सुविधा का सवाल- कांग्रेस नेता राजीव गुप्ता ने कहा की बैकुण्ठपुर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े नागरिकों के लिए यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तहसील और एसडीएम कार्यालय आम प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र हैं, बचरा-पोड़ी और पटना क्षेत्र सहित दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से आने वाले नागरिकों को पहले ही लंबी दूरी तय कर जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ता है, ऐसे में यदि तहसील और एसडीएम कार्यालय भी शहर की मुख्य आबादी से बाहर चले जाते हैं तो ग्रामीण नागरिकों के लिए दूरी और बढ़ सकती है, स्थानीय स्तर पर यह चिंता व्यक्त की जा रही है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े करीब 30 हजार नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए किसी भी निर्णय से पहले उनकी राय ली जानी चाहिए, यह केवल भवन कहां बनेगा, इसका सवाल नहीं है, यह सवाल है कि सरकारी कार्यालय नागरिकों के लिए बनाए जाते हैं या नागरिकों को सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी?
बैकुण्ठपुर पहले ही झेल रहा है संस्थानों के दूर जाने का असर- कांग्रेस नेता राजीव गुप्ता ने कहा की शहर के लोगों की चिंता का एक बड़ा कारण यह भी है कि पिछले समय में कई महत्वपूर्ण संस्थानों और कार्यालयों के स्थान को लेकर बैकुण्ठपुर में चर्चा होती रही है, स्थानीय लोगों की ओर से यह तर्क सामने रखा जा रहा है कि जिला विभाजन, बाईपास सड़क, न्यायालयों, एसपी कार्यालय, नर्सिंग कॉलेज और मॉडल स्कूल जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों के शहर से दूर जाने या शहर से बाहर विकसित होने का असर बैकुण्ठपुर की शहरी गतिविधियों पर पड़ा है, ऐसे में यदि अब तहसील और एसडीएम जैसे आम नागरिकों से सीधे जुड़े कार्यालय भी शहर की मुख्य आबादी से दूर चले जाते हैं तो भविष्य में अन्य कार्यालयों और संस्थानों को भी शहर से बाहर ले जाने की दिशा मजबूत हो सकती है, यही वह आशंका है जिसके कारण यह विषय अब केवल तहसील कार्यालय के भवन निर्माण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि बैकुण्ठपुर शहर के भविष्य की दिशा से जुड़ा सवाल बन गया है।
बस स्टैंड को लेकर भी समय-समय पर उठती रही है चर्चा- बैकुण्ठपुर शहर में बस स्टैंड को भी भविष्य में शहर से बाहर ले जाने की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं, ऐसे में स्थानीय लोगों की चिंता यह है कि यदि महत्वपूर्ण कार्यालय और संस्थान एक-एक कर शहर से बाहर जाते रहे तो आने वाले समय में शहर की प्रशासनिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है, स्थानीय नागरिकों की चिंता का आधार यह है कि किसी कार्यालय का शहर से बाहर जाना सिर्फ भवन की लोकेशन बदलना नहीं होता, उसके साथ रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों की आवाजाही, छोटे कारोबार, परिवहन, चाय-नाश्ते की दुकानें, दस्तावेज तैयार करने वाले व्यवसाय और अन्य नागरिक सेवाएं भी प्रभावित होती हैं, इसलिए किसी भी ऐसे निर्णय को केवल उपलब्ध शासकीय भूमि के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।
चेरवापारा की भूमि पर प्रस्ताव, लेकिन शहर की राय कहां?- अधिवक्ता संघ के पत्र में चेरवापारा स्थित खसरा क्रमांक 825/4 एवं 823/2 की शासकीय भूमि का उल्लेख किया गया है,  पत्र के अनुसार इस भूमि का कुल रकबा 4.76 हेक्टेयर है और इसे तहसील न्यायालय एवं एसडीएम राजस्व न्यायालय के भवन के लिए उपयुक्त बताया गया है, यानी प्रस्ताव में भूमि की उपलब्धता का आधार स्पष्ट रूप से सामने रखा गया है, लेकिन अब दूसरा प्रश्न है—क्या केवल भूमि उपलब्ध होना ही पर्याप्त आधार है? किसी भी सरकारी कार्यालय के लिए जमीन का चयन करते समय नागरिकों की पहुंच, सार्वजनिक परिवहन, आसपास की आबादी, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों की सुविधा, भविष्य में शहर का विस्तार और अन्य प्रशासनिक कार्यालयों से दूरी जैसे पहलुओं को भी देखना आवश्यक है, यदि चेरवापारा क्षेत्र में भवन निर्माण का प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो इन सभी पहलुओं पर सार्वजनिक चर्चा होना जरूरी होगा।
पहले जमीन, फिर स्वीकृति और बाद में जनता को जानकारी?- बैकुण्ठपुर के नागरिकों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं ऐसा न हो कि पहले जमीन का चयन हो जाए, फिर प्रशासनिक स्वीकृति, बजट, टेंडर और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ जाए और जब तक आम नागरिकों को इसकी जानकारी मिले, तब तक निर्णय लगभग अंतिम स्थिति में पहुंच चुका हो, शहरवासियों का तर्क है कि ऐसे संवेदनशील विषय पर निर्णय प्रक्रिया की शुरुआत में ही नागरिकों की राय सामने आनी चाहिए, यदि जनता को यह व्यवस्था सुविधाजनक लगती है तो वह भी स्पष्ट होना चाहिए, और यदि नागरिकों को लगता है कि कार्यालय शहर के भीतर या कलेक्टर कार्यालय के आसपास होना चाहिए तो उनकी बात भी प्रशासन तक पहुंचनी चाहिए।
वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण- इस पूरे मामले में बैकुण्ठपुर के वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है, नगर क्षेत्र के अध्यक्ष, पार्षद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को यह देखना होगा कि शहर के नागरिक इस विषय पर क्या चाहते हैं, आगामी नगरीय चुनावों में अध्यक्ष एवं पार्षद पद के लिए मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों के सामने भी यह विषय रखा जाना चाहिए कि वे बैकुण्ठपुर के प्रशासनिक भविष्य को किस रूप में देखते हैं, क्या महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय शहर के भीतर रहेंगे? क्या उन्हें शहर के आसपास एक प्रशासनिक परिसर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए? या फिर उपलब्ध शासकीय भूमि के आधार पर कार्यालयों को शहर के बाहरी क्षेत्र में स्थानांतरित करना उचित होगा? इन सवालों पर सार्वजनिक चर्चा जरूरी है।
यह अधिवक्ता संघ के विरोध का विषय नहीं- यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरे विषय को अधिवक्ता संघ के विरोध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, अधिवक्ता संघ ने न्यायालयीन व्यवस्था को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से अपनी मांग रखी है, उनके पत्र में भी न्यायिक कार्य को सुगम और शीघ्र बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, लेकिन उसी प्रस्ताव के व्यापक प्रभाव को देखते हुए बैकुण्ठपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की सुविधा पर चर्चा होना भी उतना ही आवश्यक है, एक पक्ष न्यायिक सुविधा की बात कर रहा है, तो दूसरा पक्ष आम नागरिकों की प्रशासनिक सुविधा की, दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर ऐसा समाधान निकाला जा सकता है, जिससे न्यायालयीन व्यवस्था भी बेहतर हो और आम नागरिकों को तहसील-एसडीएम कार्यालय तक पहुंचने में परेशानी भी न हो।
अंतिम निर्णय से पहले हो नागरिकों की राय- बैकुण्ठपुर शहर के भविष्य से जुड़े इस विषय पर सबसे जरूरी सवाल यही है कि क्या अंतिम निर्णय लेने से पहले शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों से राय ली जाएगी? यदि चेरवापारा में कार्यालयों के निर्माण का प्रस्ताव प्रशासन के समक्ष है तो इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संगठनों के सुझाव लिए जा सकते हैं, इसके बाद यह तय किया जा सकता है कि न्यायालयों और राजस्व कार्यालयों को एक स्थान पर रखने का सबसे सुविधाजनक मॉडल क्या होगा, क्योंकि यह निर्णय आने वाले कई वर्षों के लिए बैकुण्ठपुर की प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करेगा, बैकुण्ठपुर के सामने अब सवाल साफ है—शहर के साथ विकास होगा या विकास के नाम पर महत्वपूर्ण संस्थान शहर से बाहर जाते रहेंगे? तहसील और एसडीएम कार्यालय कहां बनेंगे, यह सिर्फ भवन और जमीन का फैसला नहीं है, यह बैकुण्ठपुर की आने वाली पीढ़ियों की सुविधा, शहर के विस्तार और प्रशासनिक पहुंच का फैसला है। इसलिए अंतिम निर्णय से पहले नागरिकों की वास्तविक राय जानना जरूरी है।


Share

Check Also

बैकुण्ठपुर@ उद्घाटन के लिए गाड़ी ने लिया ‘अवतार’, कार्यक्रम खत्म होते ही हुई ‘अदृश्य’?

Share गाड़ी आई कहां से, उद्घाटन हुआ कैसे? RTI के जवाब ने खड़ा कर दिया …

Leave a Reply