साहित्यकारों ने रहीम के दोहों,सोरठा,बरवै और कवित्त के जरिए साझा की साहित्यिक विरासत
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,03 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। रहीम भारतीय साहित्य परंपरा के ऐसे रचनाकार हैं, जिनकी वाणी में नीति,प्रेम,जीवन-दर्शन और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम दिखाई देता है। उनके साहित्य की यही विविधता भारतीय संस्कृति को समृद्ध और जीवंत बनाती है। इसी साहित्यिक विरासत को केंद्र में रखकर सरगुजा हिन्दी साहित्य परिषद की ओर से स्थानीय भारतेन्दु भवन में ‘रहिमन धागा प्रेम का…’कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने रहीम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विचार रखे, वहीं उनकी रचनाओं के सस्वर पाठ ने साहित्यप्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया। हिंदी के युवा साहित्यकार डॉ. दीपक सिंह ने कहा कि रहीम भारतीय संस्कृति के कल्पवृक्ष पर मधुर वाणी बिखेरने वाले कोयल के समान हैं। रहीम जैसे कवियों और कलाकारों ने भारतीय संस्कृति की परंपरा को सघन, विविधतापूर्ण और जीवंत बनाया है। इस परंपरा को आगे बढ़ाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। वरिष्ठ साहित्यकार प्रभुनारायण वर्मा ने रहीम के दोहों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके दोहों में अद्भुत मिठास और अपनापन है। रहीम ने सामान्य जीवन की वस्तुओं, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और रोजमर्रा की घटनाओं से भी गहरी नीतिपरक बातें सहजता से निकाल लीं। रामायण, महाभारत और पौराणिक प्रसंगों को भी उन्होंने आम जीवन से जोड़कर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कवि-कथाकार रमेश द्विवेदी ने रहीम की अन्य रचनाओं पर शोधपूर्ण और विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने रहीम के सोरठा,बरवै,घनाक्षरी,कवित्त,सवैया और पद जैसे छंदों की विशेषताओं और साहित्यिक गुणों को उदाहरणों के साथ सामने रखा। कार्यक्रम में अंजनि पाण्डेय और अंजनि कुमार मिश्रा ने रहीम की अनेक रचनाओं का सुमधुर एवं मार्मिक सस्वर पाठ किया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम के साहित्यिक वातावरण को और जीवंत बना दिया। वहीं कृष्ण कुमार त्रिपाठी ने रहीम के दोहों का यथास्थान प्रभावी प्रयोग करते हुए कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। कार्यक्रम के आयोजन में वेदप्रकाश अग्रवाल,द्वितेन्द्र मिश्रा, राजेश कुमार मिश्रा,महेश वर्मा और डॉ. मृदुला सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में हरिशंकर त्रिपाठी,बबनजी पाण्डेय,श्याम कश्यप बेचैन,डॉ. रिजवानुल्ला,निर्मल तिग्गा,त्रिलोक कपूर कुशवाहा, त्रिभुवन सिंह,चंद्रशेखर तिवारी,विवेक दुबे,विनीत सेठी,वंदना दत्ता एवं डॉ. विश्वासी एक्का सहित नगर के अनेक साहित्यकार,संस्कृतिकर्मी और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।
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