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बैकुण्ठपुर@ खेत की मक्का,मूंगफली और लिट्टी-चोखा से सजती है वेदांती तिवारी की मौसमी महफिल

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  • लकड़ी की आग, खेत की मक्का और लिट्टी-चोखा…कुड़ेली में हर साल जमती है देसी महफिल
  • न होटल, न तामझाम… खेत की उपज से सजती है वेदांती तिवारी की अनोखी मौसमी पार्टी
  • मोबाइल की दुनिया से दूर,मक्का-मूंगफली के साथ बचपन की यादें ताजा करती है यह मौसमी पार्टी
  • मक्का-मूंगफली बहाना है,असली मकसद अपनापन…कई दिनों तक जुटते हैं जिलेभर के परिचित
  • खेत से निकली मक्का-मूंगफली, लकड़ी की आग और लिट्टी-चोखा… कुड़ेली की पार्टी बनी खास पहचान
  • पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष की देसी पार्टी का अलग अंदाज,मक्का-मूंगफली के साथ लिट्टी-चोखा का स्वाद
  • आधुनिक पार्टियों से अलग कुड़ेली की मौसमी महफिल,खेत की फसल परोसकर मेहमानों की आवभगत
  • पार्टी हो तो ऐसी…न होटल का बिल,न दिखावे का तामझाम,खेत की मक्का-मूंगफली और लिट्टी-चोखा से
  • कई दिन मेहमाननवाजी!


-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,02 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
आज के दौर में जब पार्टी और मिलन समारोह का मतलब अक्सर होटल,रेस्टोरेंट,महंगे व्यंजन और आधुनिक इंतजामों से जोड़कर देखा जाता है, वहीं कोरिया जिले के ग्राम कुड़ेली में हर साल होने वाला एक आयोजन इन तमाम धारणाओं से बिल्कुल अलग नजर आता है, यहां पार्टी का अंदाज न तो किसी बड़े होटल जैसा है और न ही इसमें आधुनिक तामझाम की जरूरत होती है,खेत से निकली ताजी मक्का-मूंगफली, लकड़ी की आग,हरी मिर्च की चटनी और लिट्टी-चोखा के साथ लोगों के बीच बैठकर बातचीत—यही इस मौसमी पार्टी की असली पहचान है। ग्राम कुड़ेली निवासी एवं पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष वेदांती तिवारी पिछले कई वर्षों से अपने गृह निवास पर इस मौसमी आयोजन की परंपरा निभाते आ रहे हैं, फसल के मौसम में होने वाली यह पार्टी अब उनके परिचितों और शुभचिंतकों के लिए भी एक खास इंतजार का अवसर बन चुकी है, सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से जनप्रतिनिधि, परिचित और उनके चाहने वाले पहुंचते हैं तथा ग्रामीण परिवेश में तैयार किए गए भोजन का आनंद लेते हैं।
पार्टी की शुरुआत खेत से होती है- इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसकी शुरुआत किसी बाजार या रेस्टोरेंट से नहीं,बल्कि खेत से होती है,वेदांती तिवारी स्वयं खेती से जुड़े हुए हैं और हर साल अपने खेतों में मक्का और मूंगफली की फसल लेते हैं,जब फसल तैयार होती है तो खेत से ताजी मक्का और मूंगफली निकालकर उन्हें इस मौसमी आयोजन में शामिल किया जाता है,खेत से निकली ताजी उपज को सीधे घर लाया जाता है और फिर खुले स्थान पर लकड़ी की आग जलाकर उसे पकाया जाता है,आग पर सिकती मक्का और मूंगफली की खुशबू के बीच जब लोग एक साथ बैठते हैं तो आयोजन का माहौल अपने आप ही किसी ग्रामीण चौपाल जैसा बन जाता है,यही वह पहलू है जो इस पार्टी को सामान्य आयोजनों से अलग बनाता है, यहां भोजन केवल परोसा नहीं जाता,बल्कि उसे तैयार करने की पूरी प्रक्रिया भी आयोजन का हिस्सा होती है।
कई दिनों तक चलता है मेल-मिलाप-वेदांती तिवारी की यह मौसमी पार्टी किसी एक शाम तक सीमित नहीं रहती,करीब सात दिनों तक अलग-अलग समय पर लोग उनके घर पहुंचते हैं,इस दौरान जिले के कई जनप्रतिनिधियों के साथ उनके परिचित और शुभचिंतक भी शामिल होते हैं,एक दिन में सभी लोगों को बुलाने के बजाय कई दिनों तक यह सिलसिला चलने से अधिक लोगों को शामिल होने का अवसर मिल जाता है,कोई दोपहर में पहुंचता है तो कोई शाम को,लोग आते हैं,खेत की उपज से तैयार भोजन का स्वाद लेते हैं, बातचीत करते हैं और फिर अपने साथ इस देसी आयोजन की याद लेकर लौटते हैं।
मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर आमने-सामने की बातचीत- आज की जीवनशैली में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने लोगों के बीच संपर्क तो बढ़ाया है,लेकिन आमने-सामने बैठकर बातचीत और साथ समय बिताने का अवसर कम होता जा रहा है,ऐसे समय में कुड़ेली की यह मौसमी पार्टी लोगों को कुछ घंटे मोबाइल और आधुनिक व्यस्तताओं से अलग होकर एक-दूसरे के साथ बैठने का अवसर देती है, यहां बातचीत का केंद्र कोई औपचारिक एजेंडा नहीं होता,लोग खेती,गांव,पुराने परिचितों, परिवार और अपने अनुभवों पर चर्चा करते हैं, कई लोगों के लिए यह आयोजन पुराने दिनों की याद भी ताजा करता है,जब गांवों में लोग सामूहिक रूप से खेतों और चौपालों पर बैठकर समय बिताया करते थे।
बचपन की यादों से जुड़ा मक्का और मूंगफली का स्वाद-मक्का और मूंगफली केवल इस पार्टी के व्यंजन नहीं हैं,बल्कि ग्रामीण जीवन और बचपन की यादों से भी जुड़े हुए हैं, खेत से ताजा मक्का तोड़कर आग में भूनना और गर्मागर्म मूंगफली खाना गांवों में लंबे समय से चली आ रही परंपरा का हिस्सा रहा है, इसी पुराने स्वाद को वेदांती तिवारी ने अपने इस आयोजन के माध्यम से एक सामूहिक मिलन का रूप दिया है,यही वजह है कि इस पार्टी में शामिल होने वाले लोगों के लिए यह केवल खाना खाने का अवसर नहीं रह जाता,बल्कि बचपन और ग्रामीण जीवन की यादों को फिर से जीने जैसा अनुभव बन जाता है।
आधुनिक पार्टी से अलग है पूरा आयोजन-आजकल होने वाली पार्टियों में सजावट, संगीत, विभिन्न प्रकार के व्यंजन और आधुनिक व्यवस्थाएं आम बात हैं,इसके मुकाबले कुड़ेली की यह पार्टी काफी सरल है। यहां मुख्य आकर्षण ही खेत की उपज और पारंपरिक भोजन है,न किसी बड़े होटल की जरूरत,न महंगे इंतजाम की,खुले वातावरण में लकड़ी की आग पर पकता मक्का,मूंगफली और लिट्टी-चोखा ही आयोजन का केंद्र होता है, यही सादगी इसमें शामिल होने वाले लोगों को पसंद आती है।
किसान से मेजबान तक की भूमिका- वेदांती तिवारी के लिए यह आयोजन उनकी खेती से भी सीधे जुड़ा हुआ है,एक किसान के रूप में खेत में पैदा की गई फसल को अपने परिचितों और शुभचिंतकों के साथ साझा करना इस आयोजन का मूल भाव दिखाई देता है,यानी खेत में मेहनत से तैयार हुई फसल केवल बाजार तक नहीं जाती,बल्कि उसका एक हिस्सा लोगों के साथ बैठकर साझा करने की परंपरा में भी बदल जाता है,इस लिहाज से यह आयोजन खेती,भोजन और सामाजिक मेल-मिलाप को एक साथ जोड़ता है।
लोगों को रहता है इस मौसम का इंतजार
पार्टी में शामिल होने वाले लोगों के बीच इसकी चर्चा और इंतजार का कारण भी यही सादगी बताई जाती है,आधुनिकता से दूर खुले वातावरण में बैठकर ताजा खेत की उपज खाना और पुराने परिचितों के साथ समय बिताना आज के दौर में अपने आप में अलग अनुभव है,लोगों के लिए यह आयोजन किसी औपचारिक कार्यक्रम से ज्यादा अपनेपन का अवसर बनता है,यही कारण है कि मौसम आने के साथ ही इस पार्टी को लेकर परिचितों के बीच उत्सुकता दिखाई देती है।
ग्रामीण संस्कृति और अपनत्व की महफिल
वेदांती तिवारी की मौसमी पार्टी को यदि केवल मक्का-मूंगफली खाने का आयोजन कहा जाए तो शायद इसकी पूरी तस्वीर सामने नहीं आएगी, इसकी असली पहचान इसके पीछे छिपे अपनत्व, ग्रामीण संस्कृति और सामूहिक मेल-जोल में है, खेत में उगी फसल से लेकर लकड़ी की आग पर पकने वाले भोजन और फिर एक साथ बैठकर खाने तक—पूरी प्रक्रिया ग्रामीण जीवन की उस सहजता को सामने लाती है,जो आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ में कहीं पीछे छूटती जा रही है,कुड़ेली में हर साल होने वाला यह आयोजन इसी पुराने देसीपन को कुछ दिनों के लिए फिर से जीवंत कर देता है,मक्का,मूंगफली और लिट्टी-चोखा बहाना हैं,असल में यहां लोग एक-दूसरे से मिलने,साथ बैठने और अपनेपन के कुछ पल बिताने के लिए जुटते हैं। यही इस मौसमी पार्टी की सबसे बड़ी खासियत है।
लकड़ी की आग पर पकता है देसी स्वाद
मौसमी पार्टी में आधुनिक गैस चूल्हे या बड़े किचन की जगह लकड़ी की आग का इस्तेमाल किया जाता है, ताजी मक्का और मूंगफली को इसी आग पर पकाया जाता है, साथ में हरी मिर्च की चटनी और लिट्टी-चोखा का इंतजाम रहता है, लिट्टी-चोखा भी इस देसी महफिल का महत्वपूर्ण हिस्सा है, मिट्टी और खेत से जुड़े ग्रामीण परिवेश में लकड़ी की आग पर तैयार होने वाले इन व्यंजनों का स्वाद लोगों को खासा पसंद आता है, आयोजन में आने वाले लोग अपने परिचितों के साथ बैठकर भोजन करते हैं और बातचीत का दौर चलता रहता है। इस दौरान भोजन से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है लोगों का एक-दूसरे से मिलना और समय बिताना।


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