- डाक मतपत्रों की गोपनीयता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच जांच समिति सक्रिय,प्रारंभिक राय में निर्वाचन नियमावली के विरुद्ध प्रतीत हुआ मामला
- आयुर्वेद परिषद चुनाव में बड़ा मोड़ः मतगणना स्थगित,जांच समिति ने उठाए नियमों पर सवाल…
- डाक मतपत्रों की गोपनीयता से NOC सत्यापन तक शिकायतें,जांच समिति की प्रारंभिक राय…‘प्रथम
- दृष्टया निर्वाचन नियमावली के विरुद्ध प्रतीत हो रहा मामला’
- खबरों के बाद परिषद चुनाव पर ब्रेक, मतगणना स्थगित,जांच में नियमों के उल्लंघन का प्रथमदृष्टया संकेत
- डाक मतपत्रों पर उठे सवाल,अब मतगणना पर रोक,आयुर्वेद परिषद चुनाव जांच के घेरे में…
- आयुर्वेद परिषद चुनाव की मतगणना रुकी,जांच समिति की रिपोर्ट में नियमावली पर गंभीर सवाल…
- शिकायतों ने रोकी परिषद चुनाव की मतगणना,जांच समिति बोली—प्रथमदृष्टया नियमावली के विरुद्ध
-न्यूज डेस्क-
अंबिकापुर/रायपुर,30 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ आयुर्वेद,यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के तृतीय परिषद निर्वाचन को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है,चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्राप्त शिकायतों,प्रस्तुत दस्तावेजों और जांच समिति की प्रारंभिक राय के बाद परिषद निर्वाचन की मतगणना प्रक्रिया को जांच पूरी होने तक आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। आयुष संचालनालय द्वारा जारी आदेश में जांच समिति के अभिमत का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्रथम दृष्टया यह मामला निर्वाचन नियमावली के विरूद्ध प्रतीत हो रहा है,इसके साथ ही समिति ने शिकायतों और संबंधित तथ्यों की पूरी जांच होने तक मतगणना आगे नहीं बढ़ाने की अनुशंसा की, विभाग ने परिषद की निर्वाचन नियमावली के नियम 17 का उल्लेख करते हुए मतगणना स्थगित रखने का निर्णय लिया है,यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब परिषद चुनाव की प्रक्रिया को लेकर डाक मतपत्रों की व्यवस्था,उनकी गोपनीयता,मतदाताओं के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठ रहे थे।
‘दैनिक घटती-घटना’ ने लगातार उठाए थे सवाल-परिषद निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद दैनिक ‘घटती-घटना’ ने डाक मतपत्रों की व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया, उपलब्ध शिकायतों,दस्तावेजों और संबंधित पक्षों द्वारा उठाई गई आपत्तियों के आधार पर चुनाव प्रक्रिया के अलग-अलग पहलुओं को समाचारों के माध्यम से सामने लाया गया,खबरों में विशेष रूप से यह सवाल उठाया गया था कि डाक मतपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षित रखरखाव की व्यवस्था निर्वाचन प्रक्रिया के निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं,इसके अलावा चुनाव लड़ने वाले शासकीय चिकित्सकों की आवश्यक अनुमति एवं एनओसी,मतपत्रों से मतदाता क्रमांक हटाने तथा मतपत्रों के संग्रहण जैसे मुद्दे भी चर्चा में आए,लगातार उठाए गए इन सवालों के बीच संबंधित पक्षों की ओर से विभागीय स्तर पर शिकायतें और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद मामला जांच की प्रक्रिया तक पहुंचा।
शिकायतों के बाद गठित हुई जांच समिति-शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए आयुष संचालनालय ने मामले की जांच के लिए शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय,बिलासपुर के प्राचार्य को जांच अधिकारी नियुक्त किया, जांच अधिकारी को शिकायतों,दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए,जांच समिति की ओर से संबंधित अभ्यर्थियों और शिकायतकर्ताओं को अपना पक्ष रखने तथा शिकायतों के समर्थन में दस्तावेज एवं साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया,इसी क्रम में शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय बिलासपुर के प्राचार्य एवं जांच समिति की ओर से पत्र क्रमांक स्था/जांच/2026/2789, दिनांक 25 सितंबर 2026 जारी किया गया।
सरगुजा संभाग के प्रत्याशी डॉ. भुवन भास्कर साहू को नोटिस-जांच समिति ने सरगुजा संभाग से परिषद चुनाव के प्रत्याशी डॉ. भुवन भास्कर साहू,ग्राम सोनहत,जिला कोरिया को भी नोटिस जारी कर संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए,नोटिस में परिषद निर्वाचन से संबंधित विभिन्न शिकायतों का उल्लेख किया गया,इनमें विशेष रूप से शासकीय आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों द्वारा चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक पूर्व अनुमति अथवा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) के सत्यापन,मतदान की गोपनीयता बनाए रखने,मतपत्रों से मतदाता क्रमांक हटाने तथा मतपत्रों के निष्पक्ष एवं सुरक्षित संग्रहण से संबंधित बिंदुओं को जांच के दायरे में रखा गया,समिति ने डॉ. भुवन भास्कर साहू को 29 सितंबर 2026 को शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर के रचना शरीर विभाग में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा था।
29 सितंबर को प्रस्तुत हुए दस्तावेज और साक्ष्य-निर्धारित तिथि पर डॉ. भुवन भास्कर साहू सहित अन्य शिकायतकर्ताओं की ओर से जांच समिति के समक्ष दस्तावेज एवं साक्ष्य प्रस्तुत किए गए,समिति ने उपलब्ध शिकायतों और प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण किया,यही परीक्षण आगे चलकर मामले के उस महत्वपूर्ण बिंदु तक पहुंचा,जहां जांच समिति ने प्रथम दृष्टया चुनाव प्रक्रिया को निर्वाचन नियमावली के अनुरूप नहीं प्रतीत होने की बात कही,हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि प्रारंभिक जांच की यह राय अंतिम निष्कर्ष नहीं है, शिकायतों में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
नियम 17 के तहत मतगणना पर लगा ब्रेक-जांच समिति की प्रारंभिक राय के बाद आयुष विभाग ने परिषद की निर्वाचन नियमावली के नियम 17 का हवाला देते हुए मतगणना की प्रक्रिया रोकने का निर्णय लिया, संचालक के अनुमोदन के बाद उप संचालक अरविन्द कुमार मराबी द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जांच पूर्ण होने तक मतगणना की कार्यवाही आगामी आदेश तक स्थगित रखी जाए,इस आदेश के बाद परिषद चुनाव की मतगणना अब जांच के अंतिम परिणाम पर निर्भर हो गई है।
डाक मतपत्र बने विवाद का सबसे अहम केंद्र-पूरे विवाद में डाक मतपत्रों की प्रक्रिया सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक बनकर सामने आई है,शिकायतों में मतपत्रों की गोपनीयता,मतदाता क्रमांक हटाने और उनके सुरक्षित संग्रहण को लेकर सवाल उठाए गए, चुनावी प्रक्रिया में डाक मतपत्रों से संबंधित किसी भी व्यवस्था का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि मतदाता की पहचान और उसके मतदान की गोपनीयता चुनाव की निष्पक्षता से सीधे जुड़ी होती है,हालांकि इस मामले में शिकायतकर्ताओं द्वारा उठाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण अभी जांच समिति द्वारा किया जाना बाकी है। विभाग ने फिलहाल प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मतगणना रोकने का निर्णय लिया है।
एनओसी सत्यापन पर भी जांच की नजर-शिकायतों में शासकीय आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों के चुनाव लड़ने से पहले आवश्यक अनुमति अथवा एनओसी से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन का मुद्दा भी शामिल है,जांच समिति द्वारा संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है कि चुनाव में भाग लेने वाले पात्र अभ्यर्थियों से संबंधित आवश्यक विभागीय अनुमति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्राप्त और सत्यापित हुई थी या नहीं, इसी तरह मतपत्रों पर मतदाता क्रमांक की मौजूदगी और उसके प्रभाव से जुड़े सवाल भी जांच के दायरे में हैं।
‘इलाज करने वाले डॉक्टरों के चुनाव का इलाज कौन करेगा?’ से मतगणना रोकने तक-परिषद चुनाव को लेकर‘दैनिक घटती-घटना’ ने अपने समाचारों में सवाल उठाया था इलाज करने वाले डॉक्टरों के चुनाव का इलाज कौन करेगा? उस समय यह सवाल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में सामने आया था,अब विभागीय जांच और मतगणना स्थगित होने के बाद वही चुनाव प्रक्रिया स्वयं जांच के दायरे में आ गई है,हालांकि किसी भी शिकायत अथवा मीडिया रिपोर्ट को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता,इस मामले में अंतिम स्थिति जांच समिति की पूरी रिपोर्ट और उसके आधार पर शासन द्वारा लिए जाने वाले निर्णय से ही स्पष्ट होगी।
अब अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें-मतगणना स्थगित होने के बाद सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि अंतिम जांच रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष सामने आता है, क्या शिकायतों में लगाए गए आरोप दस्तावेजों से प्रमाणित होते हैं? क्या चुनाव प्रक्रिया में वास्तव में निर्वाचन नियमावली का उल्लंघन हुआ? क्या डाक मतपत्रों के रखरखाव और गोपनीयता में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ? क्या एनओसी का सत्यापन नियमानुसार किया गया? और मतपत्रों से मतदाता क्रमांक हटाने तथा उनके सुरक्षित संग्रहण की प्रक्रिया में कोई खामी रही? इन सभी सवालों का जवाब अंतिम जांच के बाद ही सामने आएगा।
अब आगे क्या?-फिलहाल विभाग ने मतगणना पर रोक लगा दी है,लेकिन निर्वाचन को रद्द करने अथवा पूरी प्रक्रिया को दोबारा कराने संबंधी कोई अंतिम निर्णय इस आदेश से स्वतः सिद्ध नहीं होता,आगे की कार्रवाई जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट और सक्षम स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी,इस पूरे घटनाक्रम में एक बात स्पष्ट है कि परिषद चुनाव से जुड़ी शिकायतें अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहीं,बल्कि विभागीय जांच और औपचारिक प्रशासनिक कार्रवाई के स्तर तक पहुंच चुकी हैं,दैनिक‘घटती-घटना’ द्वारा प्रकाशित खबरों के बाद शिकायतों, दस्तावेजों और विभागीय जांच की प्रक्रिया सामने आई और अब मतगणना भी रोक दी गई है,हालांकि इसे सीधे तौर पर केवल समाचार प्रकाशन का परिणाम बताने के बजाय घटनाक्रम के क्रम में देखा जाना अधिक उचित होगा,अंतिम जांच रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि शिकायतों में उठाए गए सवालों में कितनी वास्तविकता थी और परिषद निर्वाचन की आगे की प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।
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